फैक्ट्री कर्मचारियों को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा
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सरकार ने फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारियों को दिवाली का उपहार देते हुए बोनस की गणना के लिए वेतन सीमा को दोगुना कर दिया है।
कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, बोनस का भुगतान (संशोधन) विधेयक, 2015 को मंजूरी दे गई है। इसके अनुसार बोनस की गणना के लिए वेतन सीमा मौजूदा 3,500 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये कर दी गई है।
यह संशोधन विधेयक पहली अप्रैल 2015 से प्रभावी होगा। अब इस विधेयक को संसद में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। इस विधेयक में बोनस के भुगतान के लिए पात्रता सीमा बढ़ाए जाने का प्रस्ताव भी है।
विधेयक में बोनस भुगतान के लिए वेतन की अधिकतम सीमा दस हजार रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 21,000 रुपये कने का प्रावधान है।
क्या है बोनस गणना का मौजूदा तरीका
बोनस भुगतान का कानून, 1965 सभी फैक्ट्रियों और ऐसे प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जहां अकाउंटिंग वर्ष के किसी भी दिन 20 या इससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं।
यह विधेयक एक नया प्रावधान धारा 12 उपलब्ध कराता है जो केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह बोनस गणना के आधार को परिवर्तित कर सकती है।
वर्तमान में धारा 12 के तहत अगर किसी कर्मचारी का वेतन 3,500 रुपये से अधिक है तो उसे अधिकतम या न्यूनतम देय बोनस की गणना 3,500 रुपये प्रति माह के वेतन के हिसाब से ही की जाती है।
इससे पहले पात्रता और गणना की सीमा में साल 2007 में संशोधन किया गया था जो पहली अप्रैल 2006 से प्रभावी था।