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यहां बकरियां करती हैं नौकरी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 06 Mar 2016 05:47 PM IST
सार
- गूगल में बकरियों को मोटी सैलरी पर नौकरी
- गूगल के हैडक्वार्टर माउंटेन व्यू में 200 बकरियां
- सैलरी के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी
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कंपनी में कार्यरत हैं 200 बकरियां
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विस्तार
क्या आप कभी सोच सकते हैं कि कोई कंपनी बकरियों को भी मोटी सैलरी पर नौकरी दे सकती है। जी हां, ये सच है। दुनिया की अग्रणी इंटरनेट कंपनी गूगल अपने ऑफिस में बकरियों को भी नौकरी देती है।
गूगल ने अमेरिका स्थित अपने हैडक्वार्टर माउंटेन व्यू में 200 बकरियों को बतौर कर्मचारी काम पर रखा है। कंपनी बकरियों को सैलरी के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी देती है।
हैरान न हों, बकरियां यहां किसी सॉफ्टवेयर पर काम नहीं करतीं, बल्कि कंपनी के लॉन में घास काटने यानी उसे चरने का काम करती हैं। बकरियों द्वारा घास खाने से लॉन में घास की ट्रिमिंग हो जाती है।
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इसके जरिए कंपनी कार्बन उत्सर्जन में कटौती कर रही है। मशीन से घास काटने से ईंधन की खपत होती है, जिससे पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ता है और इस दौरान मशीन से होने वाले शोर से कंपनी के क्रिएटिव कर्मचारियों का ध्यान भी भंग होता है।
वहीं ये बकरियां नियमित रूप से शांति के साथ लॉन की घास खाकर उसे बराबर कर देती हैं। बकरियां सिर्फ घास ही खाएं और वे दफ्तर के भीतर न घुस जाएं, इसके लिए इन्हें चराने वाले चरवाहे को भी खास ट्रेनिंग दी गई है। हालांकि, लॉन में बकरियों द्वारा घास की कटाई का काम सबसे पहले याहू ने वर्ष 2007 में शुरू किया था।
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गूगल ने अमेरिका स्थित अपने हैडक्वार्टर माउंटेन व्यू में 200 बकरियों को बतौर कर्मचारी काम पर रखा है। कंपनी बकरियों को सैलरी के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी देती है।
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हैरान न हों, बकरियां यहां किसी सॉफ्टवेयर पर काम नहीं करतीं, बल्कि कंपनी के लॉन में घास काटने यानी उसे चरने का काम करती हैं। बकरियों द्वारा घास खाने से लॉन में घास की ट्रिमिंग हो जाती है।
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इसके जरिए कंपनी कार्बन उत्सर्जन में कटौती कर रही है। मशीन से घास काटने से ईंधन की खपत होती है, जिससे पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ता है और इस दौरान मशीन से होने वाले शोर से कंपनी के क्रिएटिव कर्मचारियों का ध्यान भी भंग होता है।
वहीं ये बकरियां नियमित रूप से शांति के साथ लॉन की घास खाकर उसे बराबर कर देती हैं। बकरियां सिर्फ घास ही खाएं और वे दफ्तर के भीतर न घुस जाएं, इसके लिए इन्हें चराने वाले चरवाहे को भी खास ट्रेनिंग दी गई है। हालांकि, लॉन में बकरियों द्वारा घास की कटाई का काम सबसे पहले याहू ने वर्ष 2007 में शुरू किया था।