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Hindi News ›   Jharkhand ›   Khunti's water tap scheme faces questions; despite spending crores, villagers yearn for every drop of water.

झारखंड: बूंद-बूंद पानी को तरसे गांव, जल जीवन मिशन की योजनाओं पर उठे सवाल; 16 पंचायतों में जांच की मांग

Thu, 08 Oct 2026 08:37 AM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Thu, 08 Oct 2026 08:37 AM IST
सार

झारखंड के खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड में जल जीवन मिशन और जल-नल योजनाओं की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गांवों में नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है।

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Khunti's water tap scheme faces questions; despite spending crores, villagers yearn for every drop of water.
खराब हैंडपंप की वजह से बढ़ी समस्या - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड की राजधानी रांची समेत कई जिलों में जल जीवन मिशन की योजनाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रांची से सटे खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड में भी जल जीवन मिशन और जल-नल योजनाओं के संचालन को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गांवों में नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। वहीं, विभागीय अधिकारी इस मामले पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। मुरहू के उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने योजनाओं की जमीनी स्थिति की जांच कराने और लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

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कई गांवों में नियमित पानी की आपूर्ति नहीं

अरुण कुमार साबू के अनुसार, जल-नल योजना का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था, लेकिन मुरहू प्रखंड के कई इलाकों में ग्रामीण आज भी पानी के लिए परेशान हैं। उनका कहना है कि पहले हैंडपंप और कुएं ग्रामीणों के प्रमुख जलस्रोत हुआ करते थे, लेकिन कई जगह अब पर्याप्त संख्या में हैंडपंप भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जल-नल योजनाओं में लगाए गए मोटर खराब होने और बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण भी पानी की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

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गर्मी में बढ़ जाती है परेशानी

उप प्रमुख ने कहा कि गर्मी के मौसम में नदी और दूसरे जलस्रोतों में पानी का स्तर कम होने से समस्या और गंभीर हो जाती है। कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण भी जलापूर्ति बाधित होने की बात सामने आई है। उन्होंने कुछ पानी की टंकियों की सुरक्षा और रखरखाव पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई टंकियों में सुरक्षा जाली तक नहीं लगी है, जिससे उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

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16 पंचायतों में योजनाओं का भौतिक सत्यापन कराने की मांग

अरुण कुमार साबू ने मुरहू प्रखंड की सभी 16 पंचायतों में जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई योजनाओं का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान पानी के स्रोत, पाइपलाइन, मोटर, पानी की टंकी, बिजली की व्यवस्था और पानी की गुणवत्ता की भी पड़ताल होनी चाहिए।

उनका कहना है कि केवल कागजों पर योजनाओं की स्थिति देखने के बजाय मौके पर जाकर यह पता लगाया जाए कि वास्तव में कितने घरों तक नियमित पानी पहुंच रहा है।

खराब हैंडपंप की मरम्मत में ग्रामीणों पर खर्च का आरोप

उप प्रमुख ने पेयजल विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि हैंडपंप खराब होने पर विभाग की ओर से मिस्त्री उपलब्ध करा दिया जाता है, लेकिन पाइप या दूसरी जरूरी सामग्री का खर्च कई बार ग्रामीणों को खुद उठाना पड़ता है। उन्होंने पिछले तीन वर्षों में मुरहू प्रखंड में पेयजल योजनाओं के रखरखाव और मरम्मत के लिए उपलब्ध कराई गई राशि और उसके इस्तेमाल का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।

नई योजनाओं के साथ पुरानी योजनाओं की मरम्मत भी जरूरी

अरुण साबू ने कहा कि नई पेयजल योजनाएं शुरू करने के साथ पुरानी योजनाओं का नियमित रखरखाव भी जरूरी है। उन्होंने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से खराब योजनाओं को तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की। उन्होंने पाइपलाइन और खराब मोटरों की मरम्मत कराने के साथ उन इलाकों में स्थायी वैकल्पिक जलस्रोत विकसित करने की भी मांग की, जहां मौजूदा जलस्रोत उपलब्ध नहीं हैं। उनका कहना है कि तभी जल जीवन मिशन का उद्देश्य जमीन पर पूरी तरह पूरा हो सकेगा।

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