झारखंड: डॉक्टरों की हड़ताल टली, मांगों पर बनी सहमति; सुरक्षा से लेकर वेतन उन्नयन तक इन मुद्दों पर हुई बात
झारखंड में स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक में डॉक्टरों की प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल स्थगित कर दी गई है। इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को प्रोत्साहन राशि का नियमित भुगतान करने पर भी सहमति जताई गई।
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झारखंड में डॉक्टरों की प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल टल गई है। स्वास्थ्य विभाग के साथ हुई बैठक में चिकित्सकों की प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद चिकित्सा संगठनों ने हड़ताल स्थगित करने का फैसला लिया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह और विभिन्न चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच इस मुद्दे पर लंबी बातचीत हुई। बैठक में डॉक्टरों की ज्यादातर प्रमुख मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया गया।
हालांकि, चिकित्सा संगठनों ने स्पष्ट किया कि हड़ताल स्थगित करने की औपचारिक घोषणा ऑनलाइन बैठक के बाद की जाएगी। वहीं, बाकी लंबित मांगों पर छठ पर्व के बाद फिर से बातचीत होगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि मांगों पर सहमति बनने का मतलब यह नहीं है कि सभी मांगें तुरंत लागू हो जाएंगी। कुछ प्रस्तावों को लागू करने के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी।
मांगों पर कार्रवाई के लिए बनेगी राज्यस्तरीय समन्वय समिति
बैठक में डॉक्टरों की समयबद्ध वेतन उन्नयन व्यवस्था यानी डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) लागू करने की मांग पर विस्तार से चर्चा हुई। स्वास्थ्य विभाग ने इस मांग को कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में शामिल करने पर सहमति जताई है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
डॉक्टरों की मांगों पर हुई प्रगति की निगरानी और उनके समाधान के लिए राज्यस्तरीय समन्वय समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति वित्त विभाग के साथ बातचीत कर मांगों को पूरा करने में आ रही अड़चनों को दूर करने का प्रयास करेगी। विभाग ने साफ किया कि जिन प्रस्तावों के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा।
अस्पतालों के पंजीकरण कानून में संशोधन का प्रस्ताव
चिकित्सा संस्थानों के पंजीकरण से जुड़े कानून में संशोधन का प्रस्ताव दो महीने के भीतर कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। इसके साथ ही अस्पतालों के पंजीकरण और प्रमाणन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने पर भी चर्चा हुई। प्रस्ताव के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 30 बेड और शहरी क्षेत्रों में 40 बेड वाले अस्पतालों को क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट के दायरे में रखने की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा, केंद्र और बिहार में लागू प्रावधानों के अनुरूप दंत चिकित्सकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों को पदोन्नति देने के लिए भी प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
डॉक्टरों की सुरक्षा और प्रोत्साहन राशि पर भी सहमति
बैठक में चिकित्सकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस उपाधीक्षक स्तर के नोडल अधिकारी की तैनाती की मांग पर सहमति बनी। इसके अलावा, इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का नियमित भुगतान करने पर भी सहमति जताई गई।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के डॉ. अजय कुमार सिंह और सचिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह के साथ झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (झासा) के सचिव डॉ. मृत्युंजय सिंह समेत विभिन्न चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा संगठनों के बीच हुई इस बातचीत के बाद डॉक्टरों की प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल टल गई है। अब बाकी मांगों पर छठ पर्व के बाद होने वाली बातचीत और सहमति वाले प्रस्तावों पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।