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झारखंड: थानों में सीसीटीवी न लगाने पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार को लगाई फटकार

Fri, 16 Oct 2026 05:55 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: प्रतीक पांडेय Updated Fri, 16 Oct 2026 05:55 PM IST
सार

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाने पर सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने टेंडर की प्रगति का विवरण तलब किया और ईचागढ़ के पूर्व जेएलकेएम प्रत्याशी तरुण महतो के जेल एवं चिकित्सा रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी।

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Jharkhand High Court on CCTV Cameras in Police Stations Tarun Mahto Custody Case
झारखंड हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

झारखंड हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे न लगाने पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए जारी टेंडर की अब तक की प्रगति पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 नवंबर की तिथि निर्धारित की है।
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सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने डीजीपी द्वारा व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए दिए गए आवेदन पर विचार करते हुए उन्हें उचित कारणों के आधार पर अगले आदेश तक व्यक्तिगत पेशी से छूट प्रदान कर दी है।
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तरुण महतो के चिकित्सा रिकॉर्ड तलब
अदालत ने सुनवाई के दौरान ईचागढ़ से जेएलकेएम के प्रत्याशी रहे तरुण महतो के जेल और चिकित्सा संबंधी सभी रिकॉर्ड आगामी सुनवाई के दौरान प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान न्याय मित्र अधिवक्ता रितेश कुमार महतो ने अदालत को अवगत कराया कि जब तरुण महतो को न्यायिक हिरासत में लिया गया था, तो उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें तुरंत इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित राय ने अदालत में पक्ष रखते हुए बताया कि पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है।
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पीड़ित की पत्नी के पत्र पर लिया संज्ञान
यह पूरा मामला 19 नवंबर, 2025 की रात का है, जब ईचागढ़ से जेएलकेएम के प्रत्याशी रहे तरुण महतो को पुलिस द्वारा उठाए जाने की घटना सामने आई थी। आरोप लगाया गया था कि थाने में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी, जिसके कारण उनकी शारीरिक स्थिति काफी बिगड़ गई थी। इस दर्दनाक घटना से आहत होकर तरुण महतो की पत्नी ने सीधे झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने इस पत्र को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर सुनवाई शुरू की।


आगामी सुनवाई पर प्रशासनिक हलकों की नजरें
पुलिस हिरासत में प्रताड़ना और थानों में सुरक्षा मानकों यानी सीसीटीवी की अनदेखी को लेकर हाईकोर्ट के कड़े रुख से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। चीफ जस्टिस के संज्ञान लेने के बाद से ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप की स्थिति है। अदालत ने टेंडर की प्रगति पर सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। वहीं, डीजीपी को व्यक्तिगत पेशी से फिलहाल राहत मिल गई है। अब आगामी 4 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर प्रशासनिक और कानूनी गलियारों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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