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झारखंड: राजस्थान में डॉक्टर की मौत के बाद हड़ताल की वजह से ओपीडी सेवा हुई प्रभावित, मरीजों को परेशानी
Sun, 03 Apr 2022 03:19 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, रांची
पीटीआई, रांची
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 03 Apr 2022 03:19 AM IST
सार
पिछले सप्ताह राजस्थान के दौसा जिले में एक महिला डॉक्टर ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। क्योंकि एक मरीज की मौत के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। इसे लेकर जेएचएसए और आईएमए द्वारा बुलाए गए 12 घंटे की हड़ताल के दौरान झारखंड के अधिकांश सरकारी और निजी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित रहीं।
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झारखंड में डॉक्टरों ने की हड़ताल। (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान में रांची की रहने वाली एक महिला चिकित्सक की मौत के बाद झारखंड का चिकित्सक समुदाय भी खासा नाराज है। झारखंड स्वास्थ्य सेवा संघ (जेएचएसए) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त आह्वान पर शनिवार को पूरे राज्य में बुलाई गई हड़ताल का असर नजर आया। पूरे राज्य में आउट पेशेंट विभाग (ओपीडी) की सेवाएं बाधित रहीं।
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जेएचएसए और आईएमए द्वारा बुलाए गए 12 घंटे की हड़ताल के दौरान झारखंड के अधिकांश सरकारी और निजी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित रहीं। उधर राजस्थान में भी चिकित्सा बिरादरी आंदोलन कर रही है और अपने सहयोगी के लिए न्याय की मांग कर रही है। बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह राजस्थान के दौसा जिले में एक महिला डॉक्टर ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। क्योंकि एक मरीज की मौत के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), झारखंड के महासचिव प्रदीप सिंह ने बताया कि झारखंड में सरकारी और निजी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं ठप हैं। राजस्थान में हुई इस घटना और उन्हें इतना बड़ा कदम उठाने के लिए उकसाने वाली पुलिस कार्रवाई से डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ दुखी हैं।
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सिंह ने कहा कि मृतक महिला डॉक्टर ने राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) रांची से एमबीबीएस किया था। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया था। जबकि शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया है कि डॉक्टरों पर धारा 302 (हत्या की सजा) नहीं लगाई जा सकती और एफआईआर से पहले ही जांच कमेटी गठित करने का निर्देश है।
सिंह ने कहा कि झारखंड में भी स्थिति अलग नहीं है, डॉक्टरों को अक्सर मरीजों और उनके रिश्तेदारों से मारपीट का सामना करना पड़ता है।इसलिए हम मांग करते हैं कि झारखंड में जल्द से जल्द मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए।
आईएमए रांची के संयुक्त सचिव डॉ. अजीत कुमार ने बताया कि रांची के दो बड़े सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुई हैं। शहर के निजी अस्पतालों में भी सेवा प्रभावित रहीं। इस बीच, डॉक्टर की मौत पर बेहद दुखद बताते हुए, केंद्रीय मंत्री और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीएमओ से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया।
पूर्वी सिंहभूम जिले की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिन में लगभग 1,000 डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। आईएमए जमशेदपुर के सचिव डॉ. सौरभ चौधरी ने बताया कि घटना के विरोध में और चिकित्सा सुरक्षा अधिनियम को तत्काल लागू करने की मांग के समर्थन में चिकित्सकों ने हाथों में तख्तियां लेकर जिला कलेक्ट्रेट के सामने दो घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। डॉ चौधरी ने कहा कि आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर, जिले की सभी नियमित चिकित्सा सेवाएं निलंबित रहीं।
उन्होंने बताया कि आईएमए जमशेदपुर के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मुलाकात की और अपनी मांगों के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन सौंपा।