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जम्मू-कश्मीर में नए मेडिकल कॉलेजों सहित अन्य पैरा मेडिकल संस्थानों के ढांचे को बढ़ावा
Sun, 14 Jul 2019 04:48 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sun, 14 Jul 2019 04:48 PM IST
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जम्मू-कश्मीर में नए मेडिकल कॉलेजों सहित अन्य पैरा मेडिकल संस्थानों के ढांचे को बढ़ावा दिया गया है। इसमें सैकड़ों सीटों में इजाफा किया गया है, लेकिन शैक्षिक गतिविधियों के लिए स्वतंत्र चिकित्सा विश्वविद्यालय पर कुछ खास नहीं किया गया है। चिकित्सा से जुड़े संस्थानों की शैक्षिक गतिविधियों का राज्य के प्रमुख जम्मू और कश्मीर विश्वविद्यालय पर बोझ बढ़ा है। जबकि नीट की परीक्षा की जिम्मेदारी बोर्ड आफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (बीओपीईई) पर है।
पूर्व गठबंधन सरकार के कार्यकाल में दंत, आयुष पैरा मेडिकल और फिजियोथैरेपी संस्थानों सहित सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार की ओर से एक स्वतंत्र चिकित्सा विश्वविद्यालय की कवायद शुरू की गई थी। इसके लिए जम्मू विश्वविद्यालय, मेडिकल और दंत महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों के साथ अतिरिक्त सचिव स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।
जिस पर प्रस्तावित रिपोर्ट भी दी गई, लेकिन सरकार जाने के बाद उसके आगे कुछ नहीं हो पाया। वर्तमान में राज्य में नर्सिंग और पैरा मेडिकल कॉलेजों/ स्कूलों सहित दो से अधिक चिकित्सा संस्थान हैं, जो कश्मीर और जम्मू विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। इन संस्थानों को राज्य में विशेष मेडिकल विश्वविद्यालय की अनुपस्थिति में प्रवेश, परामर्श, परीक्षा के समय पर आचरण, परिणाम और संबंधित मुद्दों जैसी शैक्षिक गतिविधियों से संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। राज्य के दोनों मुख्य विश्वविद्यालय तीनों क्षेत्रों के हजारों छात्रों की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों का भी बोझ बढ़ा है।
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नए कॉलेजों से चार सौ एमबीबीएस सीटें बढ़ीं
जम्मू-कश्मीर में चार नए मेडिकल कॉलेजों में इसी सत्र से चार सौ सीटों की मंजूरी मिली है। इनमें गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज राजोरी, अनंतनाग, बारामुला और कठुआ में प्रत्येक में 100-100 एमबीबीएस सीटों के लिए दाखिला होगा। इसके साथ राज्य में एमबीबीएस की सीटें बढ़कर 900 हो गई हैं। इन सीटों के लिए जम्मू और कश्मीर विद्यालय शैक्षिक गतिविधियां देख रहे हैं। इसके अलावा सरकारी स्तर पर बीडीएस (डेंटल) की दो सौ सीटों को भी यही विश्वविद्यालय देख रहे हैं।
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पूर्व गठबंधन सरकार के कार्यकाल में दंत, आयुष पैरा मेडिकल और फिजियोथैरेपी संस्थानों सहित सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार की ओर से एक स्वतंत्र चिकित्सा विश्वविद्यालय की कवायद शुरू की गई थी। इसके लिए जम्मू विश्वविद्यालय, मेडिकल और दंत महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों के साथ अतिरिक्त सचिव स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।
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जिस पर प्रस्तावित रिपोर्ट भी दी गई, लेकिन सरकार जाने के बाद उसके आगे कुछ नहीं हो पाया। वर्तमान में राज्य में नर्सिंग और पैरा मेडिकल कॉलेजों/ स्कूलों सहित दो से अधिक चिकित्सा संस्थान हैं, जो कश्मीर और जम्मू विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। इन संस्थानों को राज्य में विशेष मेडिकल विश्वविद्यालय की अनुपस्थिति में प्रवेश, परामर्श, परीक्षा के समय पर आचरण, परिणाम और संबंधित मुद्दों जैसी शैक्षिक गतिविधियों से संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। राज्य के दोनों मुख्य विश्वविद्यालय तीनों क्षेत्रों के हजारों छात्रों की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों का भी बोझ बढ़ा है।
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नए कॉलेजों से चार सौ एमबीबीएस सीटें बढ़ीं
जम्मू-कश्मीर में चार नए मेडिकल कॉलेजों में इसी सत्र से चार सौ सीटों की मंजूरी मिली है। इनमें गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज राजोरी, अनंतनाग, बारामुला और कठुआ में प्रत्येक में 100-100 एमबीबीएस सीटों के लिए दाखिला होगा। इसके साथ राज्य में एमबीबीएस की सीटें बढ़कर 900 हो गई हैं। इन सीटों के लिए जम्मू और कश्मीर विद्यालय शैक्षिक गतिविधियां देख रहे हैं। इसके अलावा सरकारी स्तर पर बीडीएस (डेंटल) की दो सौ सीटों को भी यही विश्वविद्यालय देख रहे हैं।