{"_id":"57d06d3d4f1c1b2556319457","slug":"fifty-percent-reduction-in-admissions","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू विश्वविद्यालय के डिस्टेंस एजूकेशन दाखिलों में पचास फीसदी कमी","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
जम्मू विश्वविद्यालय के डिस्टेंस एजूकेशन दाखिलों में पचास फीसदी कमी
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Mon, 12 Sep 2016 01:06 AM IST
विज्ञापन
एडमिशन
- फोटो : Demo Pic.
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू विश्वविद्यालय के ओपन डिस्टेंस लर्निंग निदेशालय (डिस्टेंस एजूकेशन) में इस सेशन स्नातक पहले वर्ष के बीए, बीकाम के दाखिलों में पचास फीसदी कटौती आई है।
इसका मुख्य कारण इस बार रिएपेयर विद्यार्थियों को दाखिला प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा पीजी कोर्सों में इस सेशन दाखिलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। विभाग के निदेशक प्रो. ध्यान सिंह भाऊ ने कहा कि सेंट्रल काउंसिल कश्मीर विश्वविद्यालय की ओर से जारी सर्कुलर में रिएपेयर विद्यार्थियों को स्नातक में दाखिला प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा रहा है।
पिछले साल स्नातक बीए, बीकाम में करीब 1500 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था, लेकिन इस बार यह आंकड़ा आधा ही रह गया है।
डिस्टेंस एजूकेशन में अधिकांश वे विद्यार्थी पहुंचते हैं, जिन्हें कालेजों में निर्धारित सीटों पर दाखिला नहीं मिल पाता या रिएपेयर के चलते उनके पास यह बेहतर विकल्प रहता है। लेकिन इस बार अकादमिक व्यवस्था में बदलाव के कारण अब एक विषय में रिएपेयर वाले विद्यार्थी को उक्त पेपर उत्तीर्ण न होने तक दाखिला के लिए एक वर्ष का इंतजार करना पड़ेगा।
विज्ञापन
हालांकि पीजी विषयों के दाखिलों में विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल उर्दू में यहां 500 दाखिले हुए थे, इस बार यह आंकड़ा छह सौ से ऊपर चल गया है। यही हाल कामर्स में भी है। पीजीडीएम में 100 से यह संख्या बढ़कर दो सौ से ऊपर गई है।
पीजी सोशियोलाजी में पिछले साल के आठ सौ के मुकाबले इस बार नौ सौ से अधिक विद्यार्थियों का दाखिला हुआ है। अंग्रेजी में यह आंकड़ा चार सौ से बढ़कर पांच सौ से अधिक हो गया है। डोगरी में पिछले साल 120 दाखिलों के मुकाबले इस बार करीब दो सौ दाखिले हुए हैं। इस साल डिस्टेंस एजूकेशन में भी स्नातक की सेमेस्टर परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इसका शेड्यूल तय किया गया है।
विज्ञापन
इसका मुख्य कारण इस बार रिएपेयर विद्यार्थियों को दाखिला प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा पीजी कोर्सों में इस सेशन दाखिलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। विभाग के निदेशक प्रो. ध्यान सिंह भाऊ ने कहा कि सेंट्रल काउंसिल कश्मीर विश्वविद्यालय की ओर से जारी सर्कुलर में रिएपेयर विद्यार्थियों को स्नातक में दाखिला प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा रहा है।
विज्ञापन
पिछले साल स्नातक बीए, बीकाम में करीब 1500 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था, लेकिन इस बार यह आंकड़ा आधा ही रह गया है।
डिस्टेंस एजूकेशन में अधिकांश वे विद्यार्थी पहुंचते हैं, जिन्हें कालेजों में निर्धारित सीटों पर दाखिला नहीं मिल पाता या रिएपेयर के चलते उनके पास यह बेहतर विकल्प रहता है। लेकिन इस बार अकादमिक व्यवस्था में बदलाव के कारण अब एक विषय में रिएपेयर वाले विद्यार्थी को उक्त पेपर उत्तीर्ण न होने तक दाखिला के लिए एक वर्ष का इंतजार करना पड़ेगा।
विज्ञापन
हालांकि पीजी विषयों के दाखिलों में विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल उर्दू में यहां 500 दाखिले हुए थे, इस बार यह आंकड़ा छह सौ से ऊपर चल गया है। यही हाल कामर्स में भी है। पीजीडीएम में 100 से यह संख्या बढ़कर दो सौ से ऊपर गई है।
पीजी सोशियोलाजी में पिछले साल के आठ सौ के मुकाबले इस बार नौ सौ से अधिक विद्यार्थियों का दाखिला हुआ है। अंग्रेजी में यह आंकड़ा चार सौ से बढ़कर पांच सौ से अधिक हो गया है। डोगरी में पिछले साल 120 दाखिलों के मुकाबले इस बार करीब दो सौ दाखिले हुए हैं। इस साल डिस्टेंस एजूकेशन में भी स्नातक की सेमेस्टर परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इसका शेड्यूल तय किया गया है।