अपराजिताः छात्राओं ने दिया सशक्तिकरण का संदेश, बोलीं- न गलत करेंगे और न होने देंगे
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अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत जम्मू संभाग में छन्नी हिम्मत स्थित गवर्नमेंट मिडिल स्कूल में चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में छात्राओं ने महिला सशक्तिकरण से जुडे़ कई मामलों पर चर्चा की और अमर उजाला की टीम के साथ अपनी व्यक्तिगत कहानियों को साझा भी किया। छात्राओं का कहना था कि न ही वह गलत करेंगी और न ही अपने आसपास किसी के साथ गलत होने देंगी।
चित्रकला प्रतियोगिता में अनीता और संगीता ने पहला स्थान हासिल किया। वहीं चंदा और पूजा दूसरे व अंजू तीसरे स्थान पर रहीं। इस दौरान छात्राओं ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम लोगों में उत्साह भरने का काम करते हैं। ऐसी प्रतियोगिताएं समय-समय पर कराई जानी चाहिए। छात्राओं को उनकी शक्ति का अहसास दिलाने का यह बेहतरीन तरीका है। छात्राओं ने कहा कि वह घर जाकर अपने घरवालों और दोस्तों को भी महिला सशक्तिकरण के बारे में बताएंगी।
छात्राओं ने चित्रकला के माध्यम से लड़कियों से जुड़े कई अहम मुद्दों जैसे दहेज प्रथा, बेटी-बचाओ बेटी पढ़ाओ, महिलाओं के प्रति होने वाले शोषण आदि विषयों के बारे में दर्शाया। इस दौरान अनुराधा, अंशु, सपना, गंगा, पूजा, निशा आदि ने भाग लिया।
मुझे इस प्रतियोगिता में भाग लेकर काफी अच्छा लगा। इस तरह की गतिविधियां आगे भी हमारे स्कूल में होती रहनी चाहिए। छात्राओं के लिए अपनी बात सबके आगे रखने के लिए अच्छा तरीका है। -गुनगुन महंत, छात्रा
यह अभियान प्रशंसा के लायक है। इससे छात्राओं का मनोबल बढ़ता है और उन्हें महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर विचार प्रस्तुत करने का मौका मिलता है।
-संगीता, छात्रा
यह पहल लड़कियों को जागरूक कर रही है। अपराजिता जैसा अभियान नारी के अधिकार की आवाज है। महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में भी पता चलता है।
-निशा, छात्रा
मुझे लगता है कि लड़कियों को कभी भी खुद को कम नहीं समझना चाहिए। वह हर क्षेत्र में लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती हैं। गलत करना या गलत सहना दोनों ही गलत है।
-अनुराधा, छात्रा
अपराजिता कार्यक्रम एक मुहिम के रूप में देश में जागरूकता लाने का काम कर रहा है। यह महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दे को समाज में उठाने के लिए अच्छा तरीका है।
-नीरू राजपूत, प्रिंसिपल
यह अभियान समाज में महिला सशक्तिकरण में काफी बड़ा योगदान दे रहा है। आज हर क्षेत्र में नारी ने अपना प्रबल स्थान बनाया है। सभी को चाहिए कि वह अपनी बेटियों को पढ़ने दें और समाज का सामना करने के लिए सक्षम बनाएं।
-मोनिका कोतवाल, शिक्षिका
एक पुरुष पढ़ता है तो केवल एक परिवार पढ़ता है पर जब एक महिला को पढ़ाया जाता है तो दो परिवार पढ़ते हैं। समाज की दिशा को निर्धारित करने के लिए महिला वर्ग को पर्याप्त अवसर प्रदान करने होंगे।
-राजेश रानी, शिक्षिका