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नेत्रदान करने का सपना जल्द होगा पूरा

Wed, 24 Sep 2014 01:16 AM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, जम्मूू
ब्यूूराे/अमर उजाला, जम्मूू Updated Wed, 24 Sep 2014 01:16 AM IST
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soon fulfill the dream of eye donation

जीएमसी में आई (नेत्र) बैंक की कवायद तेज की गई है। बैंक के लिए भवन का निर्माण मुकम्मल कर लिया गया है।

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नेशनल ब्लाइंड कंट्रोल प्रोग्राम के तहत निर्माणाधीन इस नेत्र बैंक से लोग नेत्रदान कर सकेंगे। हालांकि बैंक को चालू करने में अभी कई चुनौतियां भी हैं। इसके लिए आई बैंक आर्गन एक्ट में मेडिकल कालेज जम्मू और उसके आपथोमोलाजी विभाग को एमसीआई से पंजीकृत होना पड़ेगा।

इस सारी प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है। विभाग के एचओडी डा. दिनेश गुप्ता के अनुसार नेत्र बैंक को स्थापित करने की दिशा में काम शुरू किया गया है। इसके शुरू होने के बाद राज्य के लोगों को आधुनिक नेत्रदान की सुविधा मिल सकेगी। भवन का निर्माण होने पर दूसरे चरण में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से नेत्र बैंक में आधुनिक उपकरण स्थापित किए जाएंगे।
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संभाग में ट्रांसप्लांट की सुविधा न होने से अभी तक शरीर के प्रमुख अंगों का दान करने की चाह रखने वाले अपनी इस हसरत को पूरा नहीं कर पाए हैं। जीएमसी में राष्ट्रीय स्तर पर 1990 के दशक में राष्ट्रीय स्तर के एक अभियान में कार्नियल (नेत्र) ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू की गई थी लेकिन समय के साथ यह भी दम तोड़ गई।
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 पिछले साल एक सड़क हादसे में एक बाप अपने बेटे के शरीर के अंगों का दान करने जीएमसी पहुंचा था, मगर अस्पताल प्रशासन ने यह कहकर मना कर दिया कि उनके पास ऐसी व्यवस्था ही नहीं है।

जीएमसी में दो दशक पहले कार्नियल ट्रांसप्लांट की सुविधा मुहैया होने पर कई लोगों के कार्नियल ट्रांसप्लांट किए गए लेकिन इनमें अधिकांश बिना शिनाख्त के मिले शवों से ही मानव अंगों का ट्रांसप्लांट किया गया।


देश में मानव अंगों के ट्रांसप्लांट के लिए 1994 में संशोधित करके ह्यूमन आर्गन ट्रांसप्लांटेशन एक्ट लाया गया, जिसे जम्मू-कश्मीर में 1997 में लागू किया गया लेकिन मजबूत ढांचागत सुविधाएं न होने से इस एक्ट का लोगों को कोई लाभ नहीं मिल पाया है। कार्नियल (आंखों के बिल्कुल आगे वाली परत) ट्रांसप्लांट की सारी प्रक्रिया ह्यूमन आर्गन ट्रांसप्लांट एक्ट के तहत की जाती है।

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