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रिफ्यूजियों ने केंद्र सरकार को कोसा
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
Updated Tue, 16 Dec 2014 01:46 AM IST
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रिफ्यूजी एक्शन कमेटी ने केंद्र सरकार के खिलाफ रोष जाहिर करते हुए शहीद भगत सिंह पार्क में जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी रिफ्यूजियों ने कहा कि केंद्र सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया है, इसका खामियाजा पार्टी को राजय में भुगतना पड़ेगा।
कमेटी के महासचिव छज्जू सिंह मन्हास ने कहा कि वर्षों बाद भी रिफ्यूजी स्थायी नागरिकता के अधिकार के लिए तरस रहे हैं। किसी भी सरकार ने उनकी मांग को पूरा करने के लिए सकारात्मक पहल नहीं की। पार्टियों ने वोट बैंक की राजनीति के लिए उनका इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने कहा कि इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी हमारे बच्चे नौकरी के लिए तरस रहे हैं। हमें न ही कोई अधिकार है और न ही कोई रियायत। केंद्र सरकार ने जिस वादे के लिए हमसे वोट मांगे थे वह वादा सरकार बनने के छह महीने बाद भी पूरा नहीं किया गया।
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यशपाल अबरोल ने कहा कि इस मुद्दे को कई बार विभिन्न स्तर पर उठाया गया। राज्य के मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों से लेकर प्रधानमंत्री तक हमने मांग रखी, लेकिन आज तक किसी ने भी हमारे दर्द को नहीं सुना। रिफ्यूजियों ने कहा कि इसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार ने उनके साथ जो किया है उसका नतीजा उन्हें राज्य में हो रहे विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चुनावों के बाद वह नागरिकता और अन्य मांगों के लिए आंदोलन करेंगे।
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कमेटी के महासचिव छज्जू सिंह मन्हास ने कहा कि वर्षों बाद भी रिफ्यूजी स्थायी नागरिकता के अधिकार के लिए तरस रहे हैं। किसी भी सरकार ने उनकी मांग को पूरा करने के लिए सकारात्मक पहल नहीं की। पार्टियों ने वोट बैंक की राजनीति के लिए उनका इस्तेमाल किया गया।
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उन्होंने कहा कि इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी हमारे बच्चे नौकरी के लिए तरस रहे हैं। हमें न ही कोई अधिकार है और न ही कोई रियायत। केंद्र सरकार ने जिस वादे के लिए हमसे वोट मांगे थे वह वादा सरकार बनने के छह महीने बाद भी पूरा नहीं किया गया।
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यशपाल अबरोल ने कहा कि इस मुद्दे को कई बार विभिन्न स्तर पर उठाया गया। राज्य के मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों से लेकर प्रधानमंत्री तक हमने मांग रखी, लेकिन आज तक किसी ने भी हमारे दर्द को नहीं सुना। रिफ्यूजियों ने कहा कि इसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार ने उनके साथ जो किया है उसका नतीजा उन्हें राज्य में हो रहे विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चुनावों के बाद वह नागरिकता और अन्य मांगों के लिए आंदोलन करेंगे।