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सीमांत गांव खाली, बनाए गए 16 विस्थापित शिविर
ब्यूरो/अमर उजाला, सांबा
Updated Sun, 04 Jan 2015 01:10 PM IST
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पाक गोलीबारी से पलायन करने वाले ग्रामीणों के लिए जिला प्रशासन की ओर से 16 विस्थापित शिविर बनाए गए हैं। जिले के सीमांत इलाकों से लगभग आठ हजार लोगों के पलायन का अनुमान है। इनमें से कुछ राहत शिविरों में पहुंचे, जबकि अन्य ने अपने रिश्तेदारों व सुरक्षित स्थानों की शरण ली।
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संाबा के डीसी मुबारक सिंह ने शनिवार को जिला अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन बैठक कर सीमा पर बने तनाव को लेकर विचार विमर्श किया। साथ ही विस्थापितों के लिए लगाए गए शिविरों में राहत पहुंचाने को कहा है।
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जिला प्रशासन की ओर से एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। जिला के सभी बीडीओ को रात को अपने स्टेशन पर रुकने को कहा गया है।
जिला में बनाए गए विस्थापित शिविरों में चीची माता मंदिर, कालीबाड़ी पंचायत घर, सरकारी स्कूल रेईयंा, कबीर मंदिर कालीबडी, नृसिंह मंदिर घग्वाल, नोनाथ आश्रम घग्वाल, सरकारी हासस राजपुरा, पंचायतघर मदून तरेली आदि में विस्थापिताें को रखा जा रहा है।
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शनिवार दोपहर को डीसी एंव एसएसपी ने सीमांत गांवों का दौरा कर विस्थापितों का हाल जाना। उधर रामगढ क्षेत्र में भी शिविर लगाए गए है।
भारत पाक सीमा के साथ सटे बैनगलाड गांव में शुक्रवार रात से जारी गोलाबारी में कई गोले गिरे थे जबकि सुबह पीपल के पेड़ के निकट खडे़ दो लोग भी पाक गोलाबारी से घायल हो गए थे जिन्हें सांबा ले जाया गया और फौरी उपचार के बाद जम्मू रेफर कर दिया था।
ग्रामीण जगदीश कुमार, तारा चन्द्र, नंद लाल भाटिया, करतार चंद्र आदि ने बताया की रात भर उन के गांव पर पाक रेंजरों ने गोले बरसाये थे।
जिस से शिव पाल के मकान की छत पर गोला गिरा और छत टूट गई हालांकि परिवार बाल बाल बच गया, प्रकाश चंद के घर में धार्मिक स्थल पर एक गोला गिरा जो फटा नहीं जीवित रहा था, रमेश चन्द्र की दुकान पर गोला गिरा, किशोर कुमार के मकान पर भी एक गोला गिरा था, सुरिन्द्र की गाय भी गोलाबारी में मारी गई।
गोरखा का ट्रैक्टर पर गोला पड़ा, धर्मपाल की वैन को गोलाबारी से नुकसान हुआ, मस्त राम की कार को नुकसान हुआ। ग्रामीणों का माली नुकसान हुआ है।
क्षेत्र के सतपाल शर्मा ने बताया कि उन के गांव के लोग सारी रात सो नहीं पाए थे गोलाबारी में गांव से निकलना भी किसी खतरे से खाली नही था। जैसे ही सुबह गोलीबारी कुछ देर के लिए रूकी तो वे लोग गांव छोड़ कर भाग निकले थे। कुछ लोग तो अपने अपने रिश्तेदाराें के घर चले गए कुछ विस्थापित शिविराें में पहुंचे थे।