{"_id":"acb47d9834aa863648d220659e81844b","slug":"border-people-living-in-fear-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दहशत के साये में सीमावर्ती ग्रामीण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दहशत के साये में सीमावर्ती ग्रामीण
ब्यूरो/अमर उजाला, आरएस पुरा
Updated Sun, 05 Oct 2014 01:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारी बारिश के बाद जल तांडव से अभी सीमावर्ती ग्रामीण अभी उबरे भी न थे कि पाकिस्तान की नापाक हरकतों ने उन्हें फिर जिंदगी के लिए जूझने को मजबूर कर दिया।पिछले एक महीने से बाढ़ के दरम्यान पाकिस्तानी बंदूकें शांत थी।
विज्ञापन
पाकिस्तानी रेंजरों द्वारा अरनियां के चारबा सेक्टर में अग्रिम चौकियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने से आरएस पुरा क्षेत्र के सीमावर्ती लोगों में दहशत का माहौल है। सुचेतगढ़ के सरपंच स्वर्ण लाल भगत का कहना है कि पाक पर भरोसा नहीं किया जा सकता। फसल पक रही है।
विज्ञापन
ऐसे में पाकिस्तानी की गोलाबारी फिर शुरू होने से धान की कटाई पर संकट आ गया है। पाकिस्तान की इस हरकत से दहशत है। उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि देश के नेताओं के पास सहानुभूति दिखाने के अलावा और कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने तीन माह तक शिविरों में गए ग्रामीणों को निशुल्क राशन देने की घोषणा की थी पर आज तक किसी भी ग्रामीण को राशन उपलब्ध नहीं हो सका है।
विज्ञापन
अब्दुल्लिया गांव के सरपंच चौधरी वचन लाल, पूर्व सरपंच उजागर सिंह, रमेश शर्मा, अवतार सिंह का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों ने बार-बार सरकार से सुरक्षित स्थानों पर प्लाट मुहैया करवाने की मांग की, लेकिन नतीजा कुछ भी सामने नहीं आया। सीमांत गांव में बंकर बनाने की घोषणा भी कागजों तक ही सीमित है।
गांच चंदू चक्क के सतपाल, गांव कोराटाना के मुंशी राम का कहना है कि कब तक सीमावर्ती ग्रामीणों को पाकिस्तान की गोलियों का निशाना बनना पड़ेगा। न तो किसान खेतीबाड़ी कर पा रहे हैं और न ही मवेशी पाल पा रहे हैं। मिल्कियत सिंह, अमर नाथ, योगराज का कहना है कि शाम को लोग दशहरे के पर्व के बाद अपने घरों में पहुंचे ही थे कि पाकिस्तान ने गोलों की बरसात शुरू कर दी।