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आतंकी होने के आरोप से पांच रिहा
Jammu
Updated Sat, 19 Jul 2014 05:30 AM IST
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जम्मू। भद्रवाह में वर्ष 2006 में चुनाव के दौरान हमला करने के पांच आरोपियों को भद्रवाह के प्रिंसिपल सेशन जज एमके शर्मा की अदालत ने अभियोजन की विफलता के कारण बरी कर दिया। आरोप था कि मंसूर अहमद, बशीर अहमद, ताहिर हुसैन, गुलाम जिलानी और आबिद हुसैन आतंकी संगठन लश्कर से जुड़े हैं और चुनाव के दौरान उन्हें हमला किया। इससे एक पुलिस कांस्टेबल की मौत हो गई, जबकि चार घायल हो गए।
पुलिस केस के अनुसार 20 अप्रैल 2006 की शाम एसओजी पुंछ से पुलिस टीम चुनावी ड्यूटी के लिए भद्रवाह पहुंची। पुलिसकर्मी थाने के पास चिनार के वृक्ष के नीचे इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोग पहुंचे और उन्होंने ग्रेनेड फेंके। साथ ही गोलियां भी चलाईं। क्रास फायरिंग में पांच पुलिसकर्मी फारूक अहमद, मोहम्मद यूसुफ, हफीजउल्लाह, शौकत अहमद और मसूद शाह जख्मी हो गए। बाद में इलाज के दौरान हफीजउल्लाह ने दम तोड़ दिया। जांच में पता चला कि दस अप्रैल 2006 की शाम सात बजे पाकिस्तानी आतंकी और लश्कर का जिला कमांडर हमले के आरोपी मंसूर अहमद, बशीर अहमद और ताहिर हुसैन से मिला और उन्हें पुलिस व सेना के वाहन पर ग्रेनेड फेंकने को कहा। इसके लिए उसने सभी को 15-15 हजार रुपये देने का वादा किया। इसके बाद आरोपियों ने पुलिस टीम पर ग्रेनेड फेंके। आरोपी गुलाम जिलानी और आबिद हुसैन ने अन्य आतंकियों को पनाह देने के साथ खाने-पीने का सामान मुहैया करवाया। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने अदालत में चार्जशीट पेश की। प्रिंसिपल सेशन जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि जांच अधिकारी ने घटनास्थल से बरामद वस्तुओं को सील नहीं किया। जांच अधिकारी ने बताया कि अदालत के आदेश पर बरामद ग्रेनेड को नष्ट कर दिया। अधिकारी ने अदालत के आदेश को तो पेश किया, लेकिन ग्रेनेड नष्ट करने को साबित नहीं कर सके। इससे अभियोजन की दलील शक के घेरे में आती है। वहीं मृतक कांस्टेबल का पोस्टमार्टम करने वाला डाक्टर मौत का कारण स्पष्ट नहीं कर सका। तमाम सबूतों और संभावनाओं पर गौर करने के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन अपने केस को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। इसलिए पांचों को आतंकी होने के आरोपों से बरी किया जाता है। जेएनएफ
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पुलिस केस के अनुसार 20 अप्रैल 2006 की शाम एसओजी पुंछ से पुलिस टीम चुनावी ड्यूटी के लिए भद्रवाह पहुंची। पुलिसकर्मी थाने के पास चिनार के वृक्ष के नीचे इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोग पहुंचे और उन्होंने ग्रेनेड फेंके। साथ ही गोलियां भी चलाईं। क्रास फायरिंग में पांच पुलिसकर्मी फारूक अहमद, मोहम्मद यूसुफ, हफीजउल्लाह, शौकत अहमद और मसूद शाह जख्मी हो गए। बाद में इलाज के दौरान हफीजउल्लाह ने दम तोड़ दिया। जांच में पता चला कि दस अप्रैल 2006 की शाम सात बजे पाकिस्तानी आतंकी और लश्कर का जिला कमांडर हमले के आरोपी मंसूर अहमद, बशीर अहमद और ताहिर हुसैन से मिला और उन्हें पुलिस व सेना के वाहन पर ग्रेनेड फेंकने को कहा। इसके लिए उसने सभी को 15-15 हजार रुपये देने का वादा किया। इसके बाद आरोपियों ने पुलिस टीम पर ग्रेनेड फेंके। आरोपी गुलाम जिलानी और आबिद हुसैन ने अन्य आतंकियों को पनाह देने के साथ खाने-पीने का सामान मुहैया करवाया। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने अदालत में चार्जशीट पेश की। प्रिंसिपल सेशन जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि जांच अधिकारी ने घटनास्थल से बरामद वस्तुओं को सील नहीं किया। जांच अधिकारी ने बताया कि अदालत के आदेश पर बरामद ग्रेनेड को नष्ट कर दिया। अधिकारी ने अदालत के आदेश को तो पेश किया, लेकिन ग्रेनेड नष्ट करने को साबित नहीं कर सके। इससे अभियोजन की दलील शक के घेरे में आती है। वहीं मृतक कांस्टेबल का पोस्टमार्टम करने वाला डाक्टर मौत का कारण स्पष्ट नहीं कर सका। तमाम सबूतों और संभावनाओं पर गौर करने के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन अपने केस को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। इसलिए पांचों को आतंकी होने के आरोपों से बरी किया जाता है। जेएनएफ
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