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‘मानद पद के लिए बार-बार चुनाव लड़ना ठीक नहीं’
Jammu
Updated Sat, 21 Jun 2014 05:35 AM IST
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जम्मू। चार सालों तक चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रेसीडेंट पद को संभालने के बाद अचानक चुनाव न लड़ने का फैसला लेने वाले चैंबर प्रेसीडेंट वाईवी शर्मा का कहना है कि चैंबर प्रेसीडेंट पद एक ऑनरी पोस्ट है। ऐसी पोस्ट के लिए बार-बार चुनाव लड़ना ठीक नहीं होता। किसी भी मानद पद के लिए यदि आप बार-बार चुनाव लड़ते हैं तो लोग उसमें आपका स्वार्थ ढूंढने लगते हैं। इसलिए मैंने फिर प्रेसीडेंट पद का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। शर्मा वर्ष 1992 में सर्वसम्मति से प्रेसीडेंट बनाए गए थे। यदि इस बार भी ऐसा होता तो क्या आप जिम्मेदारी संभालते? इस सवाल पर उन्होेंने स्पष्ट इंकार कर दिया। उनका कहना था कि एक बार फैसला लेने के बाद लगातार प्रेसीडेंट बनने का इरादा नहीं है। इसके अलावा ज्वाइंट चैंबर आफ एलओसी ट्रेडर्स के चेयरमैन पद की भी जिम्मेदारी देखनी है।
चैंबर प्रेसीडेंट शर्मा चूंकि सक्रिय कांग्रेसी कार्यकर्ता हैं और ऐसी चर्चा है कि वे राजनीति में प्रवेश कर सकते हैं। इस सवाल पर शर्मा का कहना है कि यह लोगों की अटकलें हैं। उनका अभी ऐसा कोई इरादा नहीं है। यदि पार्टी अवाम की सेवा के लिए कोई ऐसी जिम्मेदारी देती है तो वे विचार कर सकते हैं। लेकिन अभी ऐसा कोई इरादा नहीं है। चार साल के कार्यकाल की मुख्य उपलब्धियों पर शर्मा ने कहा कि किश्तवाड़ दंगों के बाद प्रभावित व्यापारियोें को सरकार से मुआवजा दिलवाना और श्री अमरनाथ यात्रा विवाद के समय व्यापारियों के हितोें की रक्षा करना मुख्य रहा। इसके अलावा पहले हर कोई अकसर जम्मू बंद की काल दे देता था। लेकिन हमने फैसला लिया कि यदि किसी ने बंद का आह्वान करना है तो पहले चैंबर से संपर्क करे। चैंबर उस पर विचार करेगा और यदि उनका स्टैंड सही होगा तो चैंबर बंद को समर्थन भी देगा। इससे रोजाना बंद की काल पर कुछ हद तक विराम लगा है।
अपने कार्यकाल के दौरान उद्योगों का बकाया वैट रिफंड न करवा पाने का प्रेसीडेंट शर्मा को मलाल है। उन्होंने कहा कि रियासत की इंडस्ट्री जब कच्चा माल खरीदती है तो वैट अदा करती है। बाद में यह सरकार से रिफंड मिलता है। वर्तमान में लगभग 61 करोड़ रुपये का वैट रिफंड होना है, लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद अभी तक इसे वित्त विभाग से जारी नहीं करवाया जा सका। जिसका उन्हें खेद है। ज्वाइंट चैंबर आफ एलओसी ट्रेडर्स के चेयरमैन की भूमिका ज्यादा अच्छी है या फिर चैंबर प्रेसीडेंट की? इस सवाल पर शर्मा ने कहा कि दोनों का अपना महत्व है। चैंबर रियासत का सबसे बड़ी व्यापारिक व औद्योगिक संगठन है तो ज्वाइंट चैंबर आफ एलओसी ट्रेडर्स दो देशों के बीच विश्वास निर्माण बनाने में अहम भूमिका अदा करता है। दुर्भाग्यपूर्ण घटना में कश्मीर के दो हिस्से हो गए और दोनों ओर के लोगों के बीच संबंध बनाना बड़ी चुनौती है।
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छह साल बाद भी एलओसी ट्रेड बार्टर सिस्टम पर ही चलने को शर्मा ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एलओसी ट्रेड को बढ़ाने के लिए इसमें बैंकिंग सिस्टम लाना होगा। इसके लिए हमारा देश प्रयास भी कर रहा है। पाकिस्तान ने भी कई बार इस मुद्दे पर सकारात्मक पहल करने की बात कही है, लेकिन उनके दिलो दिमाग पर एक अवरोध है, जिसे दूर करना होगा।
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चैंबर प्रेसीडेंट शर्मा चूंकि सक्रिय कांग्रेसी कार्यकर्ता हैं और ऐसी चर्चा है कि वे राजनीति में प्रवेश कर सकते हैं। इस सवाल पर शर्मा का कहना है कि यह लोगों की अटकलें हैं। उनका अभी ऐसा कोई इरादा नहीं है। यदि पार्टी अवाम की सेवा के लिए कोई ऐसी जिम्मेदारी देती है तो वे विचार कर सकते हैं। लेकिन अभी ऐसा कोई इरादा नहीं है। चार साल के कार्यकाल की मुख्य उपलब्धियों पर शर्मा ने कहा कि किश्तवाड़ दंगों के बाद प्रभावित व्यापारियोें को सरकार से मुआवजा दिलवाना और श्री अमरनाथ यात्रा विवाद के समय व्यापारियों के हितोें की रक्षा करना मुख्य रहा। इसके अलावा पहले हर कोई अकसर जम्मू बंद की काल दे देता था। लेकिन हमने फैसला लिया कि यदि किसी ने बंद का आह्वान करना है तो पहले चैंबर से संपर्क करे। चैंबर उस पर विचार करेगा और यदि उनका स्टैंड सही होगा तो चैंबर बंद को समर्थन भी देगा। इससे रोजाना बंद की काल पर कुछ हद तक विराम लगा है।
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अपने कार्यकाल के दौरान उद्योगों का बकाया वैट रिफंड न करवा पाने का प्रेसीडेंट शर्मा को मलाल है। उन्होंने कहा कि रियासत की इंडस्ट्री जब कच्चा माल खरीदती है तो वैट अदा करती है। बाद में यह सरकार से रिफंड मिलता है। वर्तमान में लगभग 61 करोड़ रुपये का वैट रिफंड होना है, लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद अभी तक इसे वित्त विभाग से जारी नहीं करवाया जा सका। जिसका उन्हें खेद है। ज्वाइंट चैंबर आफ एलओसी ट्रेडर्स के चेयरमैन की भूमिका ज्यादा अच्छी है या फिर चैंबर प्रेसीडेंट की? इस सवाल पर शर्मा ने कहा कि दोनों का अपना महत्व है। चैंबर रियासत का सबसे बड़ी व्यापारिक व औद्योगिक संगठन है तो ज्वाइंट चैंबर आफ एलओसी ट्रेडर्स दो देशों के बीच विश्वास निर्माण बनाने में अहम भूमिका अदा करता है। दुर्भाग्यपूर्ण घटना में कश्मीर के दो हिस्से हो गए और दोनों ओर के लोगों के बीच संबंध बनाना बड़ी चुनौती है।
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छह साल बाद भी एलओसी ट्रेड बार्टर सिस्टम पर ही चलने को शर्मा ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एलओसी ट्रेड को बढ़ाने के लिए इसमें बैंकिंग सिस्टम लाना होगा। इसके लिए हमारा देश प्रयास भी कर रहा है। पाकिस्तान ने भी कई बार इस मुद्दे पर सकारात्मक पहल करने की बात कही है, लेकिन उनके दिलो दिमाग पर एक अवरोध है, जिसे दूर करना होगा।