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केंद्र की पुनर्वास नीति का विरोध
Jammu
Updated Fri, 20 Jun 2014 05:32 AM IST
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श्रीनगर। कश्मीर में विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए मोदी सरकार की पुनर्वास नीति आरंभ से ही विवादों में फंसती नजर आ रही है। श्रीनगर के बर्बर शाह में स्थित राम मंदिर से हिन्दू वेलफेयर सोसाइटी, कश्मीर की ओर से बुधवार को इसी मामले में एक विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश की गई, लेकिन पहले से मौजूद भारी संख्या में पुलिस बल ने उन्हें मंदिर परिसर से बाहर नहीं निकलने दिया।
हिन्दू वेलफेयर सोसाइटी, कश्मीर के बैनर टेल कई कश्मीरी पंडित एकत्रित हुए और केंद्र और राज्य सरकार विरोधी नारेबाजी की। इनकी मांग है कि उन्हें भी पुनर्वास नीति का हिस्सा बनाया जाए, जैसे विस्थापित कश्मीरी पंडितों को किया गया है। सोसाइटी के प्रचार अध्यक्ष चुन्नी लाल भट का कहना था कि पिछले दो दशकों से वे कश्मीर में रह रहे हैं। उन्हाेंने हर परिस्थिति का सामना किया, लेकिन वादी को नहीं छोड़ा, लेकिन केंद्र सरकार उनकी ओर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह विस्थापित कश्मीरी पंडितों को पुनर्वास नीति का लाभ दिया जा रहा है, उसी तरह उनको भी इसका लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो वे स्थानीय कश्मीरी समुदाय के साथ मिलकर इस नीति का विरोध करेंगे। भट ने कहा कि यदि स्थानीय कश्मीरी पंडितों की आवाज तब भी अनसुनी की जाती है, तो वे मजबूरन कश्मीर से पलायन कर विस्थापित पंडितों की सूची में शामिल होकर नीति का लाभ लेना उचित समझेंगे।
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हिन्दू वेलफेयर सोसाइटी, कश्मीर के बैनर टेल कई कश्मीरी पंडित एकत्रित हुए और केंद्र और राज्य सरकार विरोधी नारेबाजी की। इनकी मांग है कि उन्हें भी पुनर्वास नीति का हिस्सा बनाया जाए, जैसे विस्थापित कश्मीरी पंडितों को किया गया है। सोसाइटी के प्रचार अध्यक्ष चुन्नी लाल भट का कहना था कि पिछले दो दशकों से वे कश्मीर में रह रहे हैं। उन्हाेंने हर परिस्थिति का सामना किया, लेकिन वादी को नहीं छोड़ा, लेकिन केंद्र सरकार उनकी ओर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह विस्थापित कश्मीरी पंडितों को पुनर्वास नीति का लाभ दिया जा रहा है, उसी तरह उनको भी इसका लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो वे स्थानीय कश्मीरी समुदाय के साथ मिलकर इस नीति का विरोध करेंगे। भट ने कहा कि यदि स्थानीय कश्मीरी पंडितों की आवाज तब भी अनसुनी की जाती है, तो वे मजबूरन कश्मीर से पलायन कर विस्थापित पंडितों की सूची में शामिल होकर नीति का लाभ लेना उचित समझेंगे।
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