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हत्या के आरोप से बरी
Jammu
Updated Fri, 15 Feb 2013 05:31 AM IST
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जम्मू। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कठुआ एमके हंजूरा ने हत्या के आरोपी धर्मेंद्र सिंह को सबूतों के अभाव में बरी करने के आदेश जारी किए। धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ साहिल पुत्र कुलदीप राज की हत्या के आरोप थे।
चार्जशीट के अनुसार मौत का कारण तुरंत पता नहीं चलने के कारण पुलिस ने 174 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई शुरू की, ताकि मौत के कारणों का पता चल सके। जांच के दौरान पाया मृतक के साथ आरोपी ने शराब का सेवन किया। इससे मृतक ने उल्टियां मारनी शुरू कर दी। पुलिस ने उल्टी के कण जमा किए और फारेंसिक लैब में टेस्ट के लिए भेजा। इसमें कोई भी जहरीला पदार्थ नहीं निकला। हालांकि चंडीगढ़ की सेंट्रल फारेंसिक लैब ने रिपोर्ट दी कि कीटनाशक के कुछ मृतक के कपड़ों और शराब के गिलास पर पाए गए। अपराध के कारणों का पता चला और पुलिस ने धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ 302 आरपीसी में मामला दर्ज किया। पब्लिक प्रोसीक्यूटर रवि गुप्ता और एडवोकेट कीर्ति भूषण की दलीलों पर गौर किया। अदालत ने हैरानी जताई कि मृतक कपड़े और उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए सामान की जांच घटना के 56 दिन बाद फारेंसिक लैब भेजे गए।इससे शक पैदा होता है कि 56 दिन तक कपड़े और अन्य सामान कहां और किस हालत में रखा गया। पुलिस की स्टोरी में ही शक पैदा होता है और पाया उसे गलत केस में फंसाया गया है। पूरे मामले ऐसा कोई सबूत या गवाह भी नहीं है जो आरोपी को दोषी बता सके। केस का मेरिट बनता है कि आरोपी धर्मेंद्र सिंह को इस केस से बरी किया जा सके। जेएनएफ
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चार्जशीट के अनुसार मौत का कारण तुरंत पता नहीं चलने के कारण पुलिस ने 174 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई शुरू की, ताकि मौत के कारणों का पता चल सके। जांच के दौरान पाया मृतक के साथ आरोपी ने शराब का सेवन किया। इससे मृतक ने उल्टियां मारनी शुरू कर दी। पुलिस ने उल्टी के कण जमा किए और फारेंसिक लैब में टेस्ट के लिए भेजा। इसमें कोई भी जहरीला पदार्थ नहीं निकला। हालांकि चंडीगढ़ की सेंट्रल फारेंसिक लैब ने रिपोर्ट दी कि कीटनाशक के कुछ मृतक के कपड़ों और शराब के गिलास पर पाए गए। अपराध के कारणों का पता चला और पुलिस ने धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ 302 आरपीसी में मामला दर्ज किया। पब्लिक प्रोसीक्यूटर रवि गुप्ता और एडवोकेट कीर्ति भूषण की दलीलों पर गौर किया। अदालत ने हैरानी जताई कि मृतक कपड़े और उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए सामान की जांच घटना के 56 दिन बाद फारेंसिक लैब भेजे गए।इससे शक पैदा होता है कि 56 दिन तक कपड़े और अन्य सामान कहां और किस हालत में रखा गया। पुलिस की स्टोरी में ही शक पैदा होता है और पाया उसे गलत केस में फंसाया गया है। पूरे मामले ऐसा कोई सबूत या गवाह भी नहीं है जो आरोपी को दोषी बता सके। केस का मेरिट बनता है कि आरोपी धर्मेंद्र सिंह को इस केस से बरी किया जा सके। जेएनएफ
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