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आतंकी संगठनों में शामिल हुए कश्मीर के 80 युवा, सुरक्षा एजेंसियों ने चेताया

Sun, 03 Jun 2018 08:06 PM IST
एजेंसी, श्रीनगर
एजेंसी, श्रीनगर Updated Sun, 03 Jun 2018 08:06 PM IST
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youths joined terrorists groups in jammu kashmir says Security agencies

केंद्र सरकार की पहल पर कश्मीर में पवित्र रमजान माह के दौरान एकतरफा संघर्ष विराम से आतंकवाद रोधी कार्रवाई पर रोक लगी हुई है। इन सबके बीच सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी गुटों में स्थानीय युवकों की भर्ती बढ़ने को लेकर आगाह किया है। एजेंसियों के अनुसार, यह आंकड़ा 80 को पार कर गया है और नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर कई ओर से घुसपैठ की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हुई है।

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सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण कश्मीर में शोपियां और पुलवामा जिले सबसे ज्यादा आतंकवाद से प्रभावित हैं। यहां के युवा आईएसआईएस-कश्मीर और अंसार गजवात उल हिंद जैसे आतंकी गुटों में भर्ती हो रहे हैं। ये गुट अल कायदा से मदद मिलने का दावा करते हैं। अकेले मई महीने में ही 20 युवक इन आतंकी गुटों में शामिल हुए हैं। इनमें गांदरबल का रऊफ भी शामिल है। रऊफ सरकारी पॉलीटेक्निक में डिप्लोमा कोर्स के चौथे सेमेस्टर का छात्र है।  
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आईपीएस का भाई बना आतंकी
आईपीएस अधिकारी इनामुल हक मेंगनू के भाई के शोपियां से गायब होने की खबर है। वह यूनानी डॉक्टर हैं। कहा जा रहा है कि वह आतंकी गुट में शामिल हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार, अप्रैल के आखिरी तक यह आंकड़ा 45 तक पहुंच चुका है। इन दोनों जिलों से अप्रैल के बाद से 16 और युवक लापता हुए हैं। इसकी जांच की जा रही है कि वे आतंकी गुट में शामिल हुए हैं या नहीं। 

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संघर्ष विराम के दौरान घुसपैठ बढ़ी

youths joined terrorists groups in jammu kashmir says Security agencies

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि एकतरफा संघर्ष विराम के दौरान एलओसी पर घुसपैठ बढ़ी है। इसके चलते कुछ आतंकी पूंछ और राजौरी जिले के साथ ही एलओसी से कश्मीर घाटी में घुसपैठ करने में कामयाब रहे हैं। इसने सुरक्षा बलों की चिंता बढ़ा दी है क्योेंकि वे खुद को इस महीने के अंत में शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए तैयार कर रहे हैं। अमरनाथ यात्रा दो महीने तक चलती है। 

आतंकियों की भर्ती के मामले 2018 हो सकता है सबसे बुरा साल
अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2018 आतंकी गुटों में युवाओं के शामिल होने के मामले में सबसे बुरा साल हो सकता है। इस साल मई तक 81 युवक आतंकी गुटों में शामिल हो चुके हैं और साल के अंत के यह आंकड़ा बहुत बढ़ सकता है। वर्ष 2017 में 126 युवकों ने बंदूक थामी थी। 

जम्मू-कश्मीर विधानसभा और संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, 2010 के बाद यह सबसे अधिक है।  2010-2013 की तुलना में 2014 के बाद से घाटी में आतंकी गुटों में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 2010 से 2013 तक क्रमश: 54, 23, 21 और 6 युवक आतंकी गुटों में शामिल हुए जबकि 2014 में यह संख्या 53, 2015 में 66 और 2016 में यह संख्या बढ़कर 88 हो गई। 

पढ़े-लिखे युवा बन रहे आतंकी
इस साल आतंकी गुटों में शामिल होने वाले युवाओं में कई उच्च शिक्षित भी हैं। इनमें 26 वर्षीय जुनैद अशरफ सेहरई भी है जो कश्मीर यूनिवर्सिटी से एमबीए डिग्री धारी है। उसके पिता ने तहरीक ए हुर्रियत की कमान सैयद अली शाह गिलानी से थामी है। यह गुट पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी संगठन है। इसके अलावा कुपवाड़ा निवासी और पीएचडी स्कॉलर मन्नान बशीर वानी भी आतंकी गुट में शामिल हुए है। उसने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है।  

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