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नवंबर से हवाई जहाज के अंदर मोबाइल पर कर सकेंगे बात, देशी सेटेलाइट का ही होगा उपयोग
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Wed, 12 Sep 2018 03:06 AM IST
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अपनी हवाई यात्रा के दौरान हवा में सैकड़ों मीटर की ऊंचाई पर भी नवंबर से आप मोबाइल फोन के जरिए कॉल मिलाकर बात कर पाएंगे। साथ ही मोबाइल पर इंटरनेट के जरिए संगी-साथियों को हवाई यात्रा का अनुभव भी शेयर कर पाएंगे। देश में इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी देने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देशों के मसौदे पर मंगलवार को दूरसंचार मंत्रालय ने एक बैठक में फिर से चर्चा की, जिसमें नवंबर तक इस बारे में अधिसूचना जारी कर दिए जाने की उम्मीद जताई गई।
सूत्रों के मुताबिक, दिशा-निर्देशों के मसौदे पर उड्डयन, गृह और अंतरिक्ष मंत्रालयों के बीच पहले ही सहमति थी। लेकिन इस सेवा को देश की सीमा के अंदर ही मुहैया कराने और भाषा संबंधित कुछ मुद्दों पर सहमति बनना शेष था। सूत्र बताते हैं कि मंगलवार को बैठक में इन मुद्दों पर भी सहमति बन गई है और अब दूरसंचार मंत्रालय मसौदे में इनके हिसाब से बदलाव करके कानून मंत्रालय को भेजकर जांचने के लिए कहेगा। इस सेवा के नवंबर से शुरू हो जाने की उम्मीद इस कारण भी है कि मंत्रालय ने इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी देने के इच्छुक मोबाइल सेवा प्रदाताओं से अक्तूबर के अंत तक आवेदन देने को कहा है।
देशी सेटेलाइट का ही होगा उपयोग
दूरसंचार विभाग की ओर से ट्राई द्वारा प्रस्तावित अपनी देशी सेटेलाइट और गेटवे से ही ये सेवा मुहैया कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। बता दें कि गृह, रक्षा, अंतरिक्ष और उड्डयन मंत्रालय के सचिवों की समिति ने इन-फ्लाइनट कनेक्टिविटी में विदेशी सेटेलाइट और गेटवे का इस्तेमाल नहीं करने की सिफारिश की थी। दूरसंचार आयोग ने भी सुरक्षा के मद्देनजर इस बात की ही सलाह दी थी। साथ ही समुद्र और जमीन से निर्धारित 3000 मीटर ऊंचाई से ऊपर विमान पहुंचने पर भी सेवा देने पर सहमति बन गई है।
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कई कंपनियां हैं इसके लिए तैयार
इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी सेवाएं मुहैया कराने के लिए स्पाइसजेट और जेट एयरवेज अपनी रुचि दिखा चुके हैं, जबकि अन्य विमानन कंपनियां भी इस ओर रुख कर रही हैं। बता दें कि करीब 30 विदेशी विमानन कंपनियां भारतीय हवाई सीमा से इतर कई देशों में इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी मुहैया कराती हैं। इनमें एयर एशिया, एयर फ्रांस, ब्रिटिश एयरवेज का भारत में भी परिचालन है, लेकिन भारतीय हवाई क्षेत्र के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश और क्रियान्वयन नियम नहीं होने की वजह से यहां ये सेवाएं बंद हो जाती हैं। विभाग द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ये कंपनियां आसानी से यात्रियों को हवाई यात्रा के दौरान मोबाइल फोन व इंटरनेट इस्तेमाल करने की सेवा मुहैया करा सकेंगी।
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सूत्रों के मुताबिक, दिशा-निर्देशों के मसौदे पर उड्डयन, गृह और अंतरिक्ष मंत्रालयों के बीच पहले ही सहमति थी। लेकिन इस सेवा को देश की सीमा के अंदर ही मुहैया कराने और भाषा संबंधित कुछ मुद्दों पर सहमति बनना शेष था। सूत्र बताते हैं कि मंगलवार को बैठक में इन मुद्दों पर भी सहमति बन गई है और अब दूरसंचार मंत्रालय मसौदे में इनके हिसाब से बदलाव करके कानून मंत्रालय को भेजकर जांचने के लिए कहेगा। इस सेवा के नवंबर से शुरू हो जाने की उम्मीद इस कारण भी है कि मंत्रालय ने इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी देने के इच्छुक मोबाइल सेवा प्रदाताओं से अक्तूबर के अंत तक आवेदन देने को कहा है।
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देशी सेटेलाइट का ही होगा उपयोग
दूरसंचार विभाग की ओर से ट्राई द्वारा प्रस्तावित अपनी देशी सेटेलाइट और गेटवे से ही ये सेवा मुहैया कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। बता दें कि गृह, रक्षा, अंतरिक्ष और उड्डयन मंत्रालय के सचिवों की समिति ने इन-फ्लाइनट कनेक्टिविटी में विदेशी सेटेलाइट और गेटवे का इस्तेमाल नहीं करने की सिफारिश की थी। दूरसंचार आयोग ने भी सुरक्षा के मद्देनजर इस बात की ही सलाह दी थी। साथ ही समुद्र और जमीन से निर्धारित 3000 मीटर ऊंचाई से ऊपर विमान पहुंचने पर भी सेवा देने पर सहमति बन गई है।
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कई कंपनियां हैं इसके लिए तैयार
इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी सेवाएं मुहैया कराने के लिए स्पाइसजेट और जेट एयरवेज अपनी रुचि दिखा चुके हैं, जबकि अन्य विमानन कंपनियां भी इस ओर रुख कर रही हैं। बता दें कि करीब 30 विदेशी विमानन कंपनियां भारतीय हवाई सीमा से इतर कई देशों में इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी मुहैया कराती हैं। इनमें एयर एशिया, एयर फ्रांस, ब्रिटिश एयरवेज का भारत में भी परिचालन है, लेकिन भारतीय हवाई क्षेत्र के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश और क्रियान्वयन नियम नहीं होने की वजह से यहां ये सेवाएं बंद हो जाती हैं। विभाग द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ये कंपनियां आसानी से यात्रियों को हवाई यात्रा के दौरान मोबाइल फोन व इंटरनेट इस्तेमाल करने की सेवा मुहैया करा सकेंगी।