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कोरोनावायरस का खौफः भुतहा शहर बन गया है वुहान, सड़कों पर सिर्फ पुलिस और अफसर

Sat, 07 Mar 2020 06:25 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 07 Mar 2020 06:25 AM IST
सार

  • 8 दिसंबर को मिला था पहला मरीज, 23 जनवरी तक सामान्य थे हालात
  • मरीजों के मिलने और मौतों का आंकड़ा बढ़ा तब वुहान में हुई किलेबंदी

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Wuhan has become a ghost town, only police and officers on the streets
कोरोनावायरस का खौफ - फोटो : social media

विस्तार

कोरोना वायरस दुनिया के लिए डर और मातम लेकर आया है। चीन के वुहान शहर की सुनसान सड़कों को देखकर डर लगता है मानों वुहान भूतों का शहर है। सड़कों पर गाड़ियां नहीं, बाजार बंद,  हर तरफ डर, भय, मातम का माहौल और एक अजीब सी मायूसी। लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे  हैं।

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वहीं चीन के वाइस प्रीमियर सुन चुनलान के वुहान दौरे के दौरान एक व्यक्ति अपार्टमेंट से चिल्ला कर बता रहा है कि वुहान के अधिकारी फर्जी काम कर रहे हैं। वीडियो चर्चा का केंद्र बनने के साथ बता रहा है कि वुहान में जहां-तहां फंसे लोग किस कदर असहाय और मजबूर थे।
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कोरोना संक्रमण के केंद्र के रहे चीन के शहर वुहान शहर से लौटे लातूर के एमबीबीएस छात्र आशीष कुर्मे (20) वहां का भयावह मंजर बताते बताते सिहर उठते हैं। आशीष बताते हैं कि वह वुहान के पास स्थित एक यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। कोरोना का पहला केस 8 दिसंबर को ही मिल गया था, लेकिन इसकी जानकारी जनवरी के पहले हफ्ते में मिली।
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शुरुआत में लोगों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं थी। मरीजों के मिलने और मौतों का आंकड़ा बढ़ा तो पूरे शहर में किलेबंदी कर दी गई। हमें नियमित मास्क उपलब्ध कराया जाता था और स्वास्थ्य जांच भी होती थी।

हमारे शिक्षक कर रहे थे देखभाल

आशीष बताते हैं कि सड़कों पर जो लाशों का वीडियो चल रहा था, वह फर्जी था। मैं जब वापस लौटा तब देखा। ये सच है कि वुहान में उस वक्त जिंदगी बदलने लगी थी। जनवरी के पहले हफ्ते से ही लोगों के शरीर के तापमान की जांच होने लगी थी।

लोग 23 जनवरी तक सामान्य ढंग से घूम फिर रहे थे। बाजार जा रहे थे लेकिन अचानक किलेबंदी हो गई और लोग जहां-तहां फंस गए। किलेबंदी के बाद हमारे शिक्षक हमारी देखभाल करते थे। हमें जो भी चाहिए था सब मिल रहा था। किसी बाहरी को हमारे हॉस्टल में आने की इजाजत नहीं थी।

तीस सवालों का जवाब देने का बाद विमान में बैठने को मिला

हालात खराब हुए तो मैंने घर वापसी का फैसला किया तब पता चला कि वुहान एयरपोर्ट बंद है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने घर वापसी के लिए बस यूनिवर्सिटी भेजी जहां से हमें एयरपोर्ट पहुंचाया गया। इस दौरान सरकारी अधिकारी और पुलिस की टीम सड़क पर मौजूद थी। तीस सवालों का जवाब देने के बाद विमान में बैठने दिया गया। भारत लौटा तो चौदह दिनों तक निगरानी में रहा।

वुहान के नागरिक ने कहा चीन के अधिकारी फर्जी काम करते हैं :

चीन के वाइस प्रीमियर सुन चुनलान जब वुहान शहर का दौरा कर रहे थे तब वुहान के एक नागरिक ने चीनी अधिकारियों की पोल खोल दी। दौरे के दौरान अपार्टमेंट में रहने वाला नागरिक चीख-चीख कर कह रहा था कि अधिकारी फर्जी काम कर रहे हैं।

विबो के जरिए बीजिंग नागरिकों की समस्या जान रहा है

हालांकि चीन में सरकार के खिलाफ कोई नहीं बोल सकता है लेकिन चीन के ट्विटर जैसे नेटवर्क विबो पर लोग अपने वीडियो पोस्ट कर सकते हैं, ताकि वहां की सरकार या बीजिंग में बैठे अधिकारियों को सच्चाई का पता चल सके। ये भी कहा जा रहा था कि प्रीमियर ने एक वीडियो की जांच के आदेश दिए हैं लेकिन किस वीडियो की जांच होगी ये पता नहीं चल सका है।
 

लोग खुद कर रहे खाने-पीने का इंतजाम

वुहान के रहने वाले कुछ लोगों ने बताया है कि मांग और आपूर्ति में असंतुलन के चलते खाने पीने की चीजों का भारी संकट हो गया है। जो भी चीज बिक रही है उसकी गुणवत्ता को लेकर हर किसी के मन में संदेह है। सब को अपना या अपनों का ही सहारा था। कुछ लोगों ने विबो पर आवाज पोस्ट करते हुए लिखा है कि, उम्मीद है कि इसका असर होगा और समस्याएं हल होंगी।

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