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देश भर में तैयार होगा स्ट्रोक मैप, एम्स के डॉक्टरों ने शुरू किया जागरूकता कार्यक्रम

Wed, 16 Oct 2019 05:40 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 16 Oct 2019 05:40 AM IST
सार

  • देश में मृत्यु का कारण बनीं बीमारियों में ब्रेन स्ट्रोक चौथे नंबर पर
  • देश भर में तैयार होगा स्ट्रोक मैप, तुरंत मिलेगा नजदीकी अस्पताल
  • हर जिले में कम से कम चार बेड का स्ट्रोक यूनिट हो रहा तैयार

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World stroke day: map will be prepared across the country, AIIMS doctors start awareness program
Brain stroke

विस्तार

ब्रेन स्ट्रोक के रोगियों के लिए सरकार जल्द ही एक ऐसा मैप लेकर आ रही है जिसके जरिये उन्हें तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सकेगी। घर के नजदीक अस्पताल के बारे में इस मैप पर पूरी जानकारी होगी। इसके अलावा आशा और एएनएम कर्मचारियों के जरिये सरकार हर राज्य में घर बैठे ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियों की निशुल्क जांच भी कराएगी।

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ताकि जिन लोगों में बीमारी की आशंका मिलती है तो उन्हें समय रहते उपचार दिया जा सके। 29 अक्तूबर को दुनिया भर में मनाए जाने वाले विश्व ब्रेन स्ट्रोक दिवस को लेकर सोमवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने यह जानकारी दी। डॉक्टरों ने बताया कि देश में प्रति एक लाख की आबादी पर 116 के आसपास ब्रेन स्ट्रोक के रोगी मिलते हैं।
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देश में मृत्यु का कारण बनने वाली बीमारियों में इसका चौथा स्थान है। जबकि दिव्यांगता देने में पांचवां स्थान है। डॉक्टर पद्मा एम श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए स्ट्रोक मैप तैयार करने जा रही है। एम्स के न्यूरो रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रोहित भाटिया ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाए तो नुकसान की आशंका कम होती है। ये दोनों ही डॉक्टर सरकार की उस कमेटी के भी हिस्सा थे, जिसमें ब्रेन स्ट्रोक को लेकर गाइडलाइन बनाकर सभी राज्यों को भेजी गई है। इन गाइडलाइन का पालन नहीं करने वाले राज्यों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत केंद्र की ओर से मिलने वाले सालाना बजट में कटौती की जाएगी।
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डॉ. पद्मा ने बताया कि चीन के बाद अब भारत ने भी लकवाग्रस्त मरीजों के लिए रोबोट की खोज की है। हालांकि, यह रोबोट दूसरे देशों की तुलना में सस्ती कीमत में उपलब्ध होगा। आईआईटी के साथ मिलकर एम्स के डॉक्टरों ने एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जिसे हाथ में पहना जाएगा और वह लकवाग्रस्त मरीज के उस हिस्से में काम करेगा जो अंग लकवा से पीड़ित है। 

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