दुनियाभर में 62 फीसदी शिशुओं को नहीं मिल पाता है मां का दूध
- 46 प्रतिशत बच्चे ही छह माह होने तक मां का दूध पी पाते हैं।
- ब्राजील में ब्रेस्ट मिल्क डोनर्स का सबसे बड़ा नेटवर्क है।
- ब्राजील में 217 मिल्क बैंक और 126 मिल्क कलेक्शन पॉइंट हैं
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नवजात बच्चों को मां के दूध की उपलब्धता को लेकर यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में चौकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक विश्व के करीब 77 करोड़ नवजात या हर दो में से एक शिशु को मां का दूध पहले घंटे में नहीं मिल पाता है। यह आंकड़ा शिशु मृत्यु दर के लिए बेहद अहम है।
यूनिसेफ के मुताबिक दो से 23 घंटे तक मां का दूध न मिलने से बच्चे के जन्म से 28 दिनों के भीतर मृत्यु दर का यह आंकड़ा 40 फीसदी होता है, जबकि 24 घंटे के बाद भी दूध न मिलने से मृत्यु दर का यही आंकड़ा बढ़कर 80 प्रतिशत तक हो जाता है।
यूनिसेफ के मुताबिक अगर जन्म से छह महीने तक शिशु को स्तनपान कराया जाए तो लगभग आठ लाख शिशुओं को मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सकता है। यह शोध पिछले 15 वर्षों के अध्ययन के आधार पर तय की गई है। भारत में वर्ष 2000 में 16 फीसदी ऐसे शिशु थे जिन्हें मां का दूध नहीं मिल पाया था। वर्ष 2015 में यह आंकड़ा बढ़कर 45 फीसदी तक हो गया है।
शिशु मृत्यु की बढ़ती दर
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार जहां शिशु मृत्यु दर का वैश्विक औसत प्रति एक हजार पर 49.4 है वहीं भारत का औसत 38 है। नवजात शिशु मृत्युदर (प्रति एक हजार पर 39) और जन्म के पहले पांच सालों में होने वाली मौतों (प्रति एक हजार पर 48) के मामले में भी भारत आगे है, जो कि चिंताजनक है। शिशु मृत्यु पर रोकथाम के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय न्यूनतम विकास लक्ष्य अभी भारत की पहुंच से कोसों दूर है।
नवजात शिशुओं की मौत की एक बड़ी वजह मां का दूध न मिलना पाया गया। वहीं कुपोषण के मामले में भारत की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 5 साल से कम आयु के 42.5 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं और 69.5 प्रतिशत बच्चे खून की कमी से जूझ रहे हैं। दुनिया के 10 अविकसित बच्चों में से चार भारतीय होते हैं और पांच साल से कम उम्र के लगभग 15 लाख बच्चे हर साल भारत में अपनी जान गंवाते हैं।
मां के दूध का बैंक
संरक्षण बेहद जटिल
मुंबई के लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल जनरल अस्पताल में 1989 में स्थापित किए गए एशिया के सबसे पहले ह्यूमन मिल्क बैंक 'स्नेहा' को अब 'सायन मिल्क बैंक' के नाम से जाना जाता है। उल्लेखनीय है कि मां का दूध तो शिशु का सर्वोत्तम आहार है ही लेकिन कई बार उच्च रक्तचाप, अधिक रक्तस्राव या तेज बुखार के चलते मां शिशु को दूध नहीं पिला पाती हैं। उस स्थिति में किसी दूसरी मां का दूध ही सर्वश्रेष्ठ विकल्प होता है, लेकिन यह सीधा शिशु को नहीं दिया जा सकता है।उससे पहले कुछ सेफ्टी टेस्ट करने पड़ते हैं और सावधानियां भी बरतनी होती हैं। डोनर मदर का स्वस्थ होना जरूरी है। ऐसी मांओं से इलेक्ट्रिक पंप की सहायता से दूध निकाला जाता है, जिसे बैंक में 62.5 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर 30 मिनट तक पॉश्च्युराइज करने के बाद 4 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर ठंडा किया जाता है। इसके बाद जांच होती है।
अमेरिका सबसे आगे
- 1569.79 लीटर मिल्क डोनेशन का गिनीज रिकॉर्ड है। अमेरिकी माएं मिल्क डोनेशन में सबसे अव्वल हैं। यह आंकड़ा जनवरी वर्ष 2011 से मार्च 2014 तक का है।
- एशिया का पहला मिल्क बैंक भारत में नवंबर 1989 में मुंबई के लोकमान्य तिलक हॉस्पिटल में खुला था। विश्व का पहला ब्रेस्ट मिल्क बैंक 1911 में विएना में खुला था।