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Book Fair: 'आयुर्वेद अपने आप में संपूर्ण विज्ञान, इसकी किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं', आचार्य बालकृष्ण का बयान

Sun, 09 Feb 2025 02:16 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Sun, 09 Feb 2025 02:16 PM IST
सार

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि आयुर्वेद को स्थापित करने के लिए वैश्विक स्तर पर जो काम होना चाहिए था, वह नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद हमें सिखाता है कि हमें प्रकृति के अनुरूप जीवन बिताने की कोशिश करनी चाहिए।

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world book fair patanjali acharya balkrishna said ayurveda complete science not compete anyone
कार्यक्रम में आचार्य बालकृष्ण और अन्य गणमान्य लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नई दिल्ली के प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेले का आयोजन चल रहा है। रविवार को शिक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ने विश्व पुस्तक मेले में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमें पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए। इस दौरान आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि विश्व पुस्तक मेले जैसे आयोजन बेहद उपयोगी हैं और इनकी वजह से विश्वस्तरीय साहित्य एक जगह उपलब्ध हो पाता है। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि ने योग-आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई है। 
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'आयुर्वेद अपने आप में संपूर्ण विज्ञान'
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि आयुर्वेद को स्थापित करने के लिए वैश्विक स्तर पर जो काम होना चाहिए था, वह नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद अपने आप में सम्पूर्ण विज्ञान है। आयुर्वेद स्वतंत्र है तथा इसकी किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं है। आयुर्वेद हमारे जीवन में रचा-बसा है जबकि एलोपैथी मजबूरी है। आयुर्वेद को यदि औषधि विज्ञान या जड़ी-बूटी के रूप में व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें तो इसके लिए और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद हमें सिखाता है कि हमें प्रकृति के अनुरूप जीवन बिताने की कोशिश करनी चाहिए।
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आचार्य ने बताया कि पतंजलि ने वर्ल्ड हर्बल इंसाइक्लोपीडिया के रूप में एक महाग्रंथ का प्रकाशन किया है जिसमें 32 हजार औषधीय पौधों का सचित्र वर्णन है। इससे पहले केवल 12 हजार औषधीय पौधों की जानकारी ही उपलब्ध थी। इसके अतिरिक्त हमने आयुर्वेद आधारित पुस्तक सौमित्रेयनिदानम् का प्रकाशन किया जिसके द्वारा हमने संसार में पनप रहे नए रोग, नए विकार, नई व्याधियों का नवायुगाचार के अनुरूप स्वरूप, लक्षण व निदान सचित्र प्रस्तुत कर एक चूनौतिपूर्ण कार्य किया है। इसमें शरीर संरचना के आधार पर 14 खण्डों में विभाजित करते हुए 6821 श्लोकों में 471 मुख्य व्याधियों सहित लगभग 500 व्याधियों का सचित्र वर्णन किया गया है। साथ ही ग्रन्थ के माध्यम से आयुर्वेद की परम्परा में प्रथम बार 2500 से भी अधिक चिकित्सकीय अवस्थाओं (Clinical Conditions) का वर्णन किया गया है।
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'हमारे लिए देश व्यापार नहीं, परिवार है'
पतंजलि के स्वदेशी उत्पादों को लेकर कहा कि 'पतंजलि के उत्पाद इस दृष्टि से निर्मित किए जाते हैं कि उनका उपभोग हमारा परिवार कर रहा है। इसीलिए हमारे उत्पादों की गुणवत्ता व शुद्धता के सभी मापदण्डों पर खरे रहते हैं। हमारे लिए देश व्यापार नहीं, परिवार है।' उन्होंने सभी उत्पादक कम्पनियों से आह्वान किया कि जो भी उत्पाद बनाएं अपने परिवार को ध्यान में रखते हुए बनाएं। आचार्य जी ने कहा कि हमने पतंजलि के माध्यम से योग, आयुर्वेद, शिक्षा, चिकित्सा, अनुसंधान, प्राचीन पाण्डुलिपि आधारित ग्रंथ तथा प्रेरणादायक आध्यात्कि पुस्तकों का प्रकाशन किया है। साथ ही भारतीय शिक्षा बोर्ड के अन्तर्गत स्वदेशी शिक्षा व्यवस्था की नींव रखते हुए कक्षा-1 से कक्षा-10 तक के पाठ्यक्रम का प्रकाशन भी किया जा रहा है।
 
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