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आज भी इन मंदिरों में पुरुषों के प्रवेश पर है रोक

Fri, 28 Sep 2018 12:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 28 Sep 2018 12:32 PM IST
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women got entry in Sabarimala but in these temples across India entry of male is ban
इन मंदिरों में पुरुषों के प्रवेश पर रोक है

सुप्रीम कोर्ट ने आज सबरीमाला मंदिर मामले पर अहम फैसला दिया है। जिसके बाद से हर उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति मिल गई है। जब से यह मंदिर बना है तभी से यहां 10 से 50 वर्ष की उम्र वाली महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगी हुई थी। कोर्ट ने कहा कि पूजा करने का अधिकार भगवान के सभी भक्तों को है, लिंग के आधार पर इसमें कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है। हालांकि आपको शायद ही यह बात पता हो कि भारत के कुछ मंदिरों में पुरुषों का प्रवेश वर्जित है। आज हम आपको ऐसे ही मंदिरों के बारे में बताएंगे। 

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अत्तुकल मंदिर- अत्तुकल भगवती मंदिर केरल में स्थित है। इस मंदिर में महिलाओं की पूजा होती है। इस मंदिर ने पोंगल त्योहार मनाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। इसमें तीस लाख महिलाओं ने हिस्सा लिया था। पुरुषों को मंदिर में प्रवेश करने की इजाजत नहीं है, जहां त्योहार के दौरान महिलाओं की सबसे बड़ी सभा देखने को मिलती है।
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चक्कूलाथूकावु मंदिर- केरल के इस मंदिर में देवी भगवती की पूजा होती है। यहां 'नारी पूजा' नामक वार्षिक अनुष्ठान होता है जिसमें पुरुष पुजारी उन महिला भक्तों के चरण धोते हैं, जिन्होंने 10 दिनों से व्रत रखा होता है। इस दिन को धनु कहते हैं। नारी पूजा के दौरान केवल महिलाओं को मंदिर के अंदर जाने की इजाजत होती है।
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संतोषी मां- संतोषी मां का व्रत केवल महिलाएं या अविवाहित लड़कियां ही रख सकती हैं। इस अवधि के दौरान वह खट्टे फल या आचार नहीं खा सकतीं। पुरुषों को मंदिर में आने की इजाजत है लेकिन शुक्रवार के दिन मंदिर के अंदर उनका प्रवेश वर्जित होता है।

ब्रह्मा मंदिर- 14वीं शताब्दी में राजस्थान के पुष्कर में यह मंदिर बनाया गया था। इस मंदिर में शादीशुदा पुरुषों का आना सख्त मना है। यह पूरे विश्व में बना हुआ ब्रह्मा का अकेला मंदिर है।

भगवती मंदिर- कन्याकुमारी में बने हुए इस मंदिर में मां भगवती दुर्गा के कन्या रूप की पूजा होती है। पुराण के अनुसार यहां देवी सती के रीढ़ की हड्डी गिरी थी। उन्हें संन्यास की देवी भी माना जाता है। इसी वजह से केवल संन्यासी पुरुष मंदिर के दरवाजे तक आ सकते हैं। वहीं शादीशुदा पुरुषों के आने पर रोक है।

माता मंदिर- एक निश्चित अवधि के दौरान बिहार के मुजफ्फरपुर में बने इस मंदिर में प्रवेश वर्जित हो जाता है। यह नियम इतने सख्त हैं कि पुरुष पुजारी को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है। उस अवधि के दौरान केवल महिलाएं यहां आ सकती हैं। 

त्र्यंबकेश्वर मंदिर- महाराष्ट्र के नासिक में स्थित इस मंदिर का गर्भगृह भगवान शिव को समर्पित है। यहां के गर्भगृह में पहले महिलाओं के जाने पर रोक थी। जिसके बाद 2016 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि यदि महिलाओं का जाना वर्जित है तो पुरुषों के जाने पर भी प्रतिबंध लगे। इसके बाद से गर्भगृह में पुरुषों का जाना मना हो गया है। 


कामरुप कामाख्या मंदिर- असम में स्थित इस मंदिर में माता की माहवारी का उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान यहां पुरुषों के प्रवेश पर रोक रहती है। इस दौरान केवल महिला संत और संन्यासिन मंदिर की पूजा करती हैं। इस मंदिर में माता सती के माहवारी कपड़े को बहुत शुभ माना जाता है और इसे भक्तों के बीच बांटा जाता है।

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