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दुनिया में बढ़ेगी गर्मी: अल नीनो के मजबूत होने की आशंका, सूखे का खतरा; मौसम को लेकर WMO ने जारी की चेतावनी
Sat, 04 Jul 2026 06:44 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 04 Jul 2026 06:44 AM IST
सार
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने चेतावनी दी है कि जुलाई से सितंबर के बीच अल नीनो के मजबूत होने की आशंका है। इससे दुनिया भर में लू, सूखा, मूसलाधार बारिश और समुद्री हीटवेव जैसी चरम मौसमी घटनाएं बढ़ सकती हैं, जबकि भारत में मानसून पर भी इसका असर पड़ सकता है।
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अल नीनो पर WMO का अलर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दुनिया भर में मौसम के मिजाज में खतरनाक बदलाव दिख सकता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने शुक्रवार को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थितियां आने वाले महीनों में तेजी से मजबूत हो सकती हैं। इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में भीषण लू, सूखा, मूसलाधार बारिश और अन्य चरम मौसमी घटनाओं का खतरा काफी बढ़ गया है।
डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जुलाई से सितंबर के दौरान अल नीनो के बेहद मजबूत रूप में विकसित होने की प्रबल आशंका है। डब्ल्यूएमओ की महानिदेशक सेलेस्ट साउलो ने कहा कि अल नीनो की शुरुआत हो चुकी है और हमारे अनुमान के मुताबिक यह तेजी से एक शक्तिशाली रूप अख्तियार करने जा रहा है। इससे दुनिया के कई हिस्सों में सूखे, भारी बारिश, जमीनी इलाकों में भीषण लू और समुद्री हीटवेव का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
ये भी पढ़ें: मानसून की गजब चाल: कहीं बन रहा आफत, कहीं दे रहा राहत; पहाड़ों पर बारिश का कहर, कई राज्यों के लिए अलर्ट जारी
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क्या होगा भारत पर असर?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 12 जून को ही देश में अल नीनो की दस्तक की घोषणा कर कहा था कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह और मजबूत होगा। इसका असर जून में दिखा था, जब बारिश देश में 40% बारिश कम हुई थी। मध्य भारत सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 50.4% कम वर्षा दर्ज की गई थी। आईएमडी ने जुलाई में भी औसत से कम बारिश होने की आशंका जताई है।
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डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जुलाई से सितंबर के दौरान अल नीनो के बेहद मजबूत रूप में विकसित होने की प्रबल आशंका है। डब्ल्यूएमओ की महानिदेशक सेलेस्ट साउलो ने कहा कि अल नीनो की शुरुआत हो चुकी है और हमारे अनुमान के मुताबिक यह तेजी से एक शक्तिशाली रूप अख्तियार करने जा रहा है। इससे दुनिया के कई हिस्सों में सूखे, भारी बारिश, जमीनी इलाकों में भीषण लू और समुद्री हीटवेव का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
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क्या होगा भारत पर असर?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 12 जून को ही देश में अल नीनो की दस्तक की घोषणा कर कहा था कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह और मजबूत होगा। इसका असर जून में दिखा था, जब बारिश देश में 40% बारिश कम हुई थी। मध्य भारत सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 50.4% कम वर्षा दर्ज की गई थी। आईएमडी ने जुलाई में भी औसत से कम बारिश होने की आशंका जताई है।