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चिंताजनक: धूल से घुट रहा दम, हर साल 380 करोड़ लोगों की सांसों पर संकट; डब्ल्यूएमओ ने दी चेतावनी

Sun, 13 Jul 2025 07:30 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 13 Jul 2025 07:30 AM IST
सार

डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में रेत और धूल भरी आंधियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लगभग 150 देशों के 33 करोड़ से अधिक लोग सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। हर साल करीब 200 करोड़ टन धूल वातावरण में घुल रही है जिसका कुल भार मिस्र के गीजा स्थित 307 पिरामिडों के बराबर है।

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WMO warns Dust storms becoming a global disaster
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

धूल और रेत से उठता संकट अब किसी क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं रहा। हर साल वातावरण में प्रवेश कर रही 200 करोड़ टन धूल से 380 करोड़ लोग प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें से कई वर्षों तक इसके संपर्क में रहे। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की ताजा रिपोर्ट इस वैश्विक चुनौती की भयावहता उजागर करती है।

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डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में रेत और धूल भरी आंधियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लगभग 150 देशों के 33 करोड़ से अधिक लोग सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। हर साल करीब 200 करोड़ टन धूल वातावरण में घुल रही है जिसका कुल भार मिस्र के गीजा स्थित 307 पिरामिडों के बराबर है। यह धूल हवा, स्वास्थ्य, कृषि और वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। यह रिपोर्ट 12 जुलाई को ‘रेत और धूल के तूफानों से मुकाबले के अंतरराष्ट्रीय दिवस’ के अवसर पर जारी की गई। इस दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2023 में की थी, ताकि इन तूफानों के खतरनाक असर को कम करने और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों को मजबूती मिल सके। 2024 में धूल की औसत मात्रा भले ही 2023 के मुकाबले थोड़ी कम रही हो, लेकिन क्षेत्रीय असर अधिक घातक रहा। रिपोर्ट के मुताबिक वातावरण में पहुंचने वाली 80 फीसदी से ज्यादा धूल उत्तर अफ्रीका और मध्य पूर्व के रेगिस्तानों से आती है, जो हवा के जरिये हजारों किलोमीटर दूर तक फैलती है।
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कुछ क्षेत्रों में पांच साल में 1,600 से अधिक लोग हुए प्रभावित
डब्ल्यूएमओ और विश्व स्वास्थ्य संगठन के साझा आंकड़ों के अनुसार 2018 से 2022 के बीच 380 करोड़ लोग धूल के खतरनाक स्तर के संपर्क में आए  जो 2003-2007 की तुलना में 31 फीसदी अधिक है। कुछ क्षेत्रों में लोग पांच वर्षों में 1,600 से अधिक दिनों तक धूल के प्रभाव में रहे। लैंसेट की रिपोर्ट बताती है कि यह समस्या केवल अस्थायी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक खतरा बन चुकी है। एक अमेरिकी अध्ययन के अनुसार वर्ष 2017 में सिर्फ अमेरिका में धूल और हवा से हुए कटाव से 154 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, जो 1995 के मुकाबले चार गुना अधिक था। 2024 में आए प्रमुख धूल तूफानों में स्पेन के कैनरी द्वीप, पूर्वी एशिया के 14 तूफान और मंगोलिया से उठे तूफान शामिल रहे, जिनसे बीजिंग में पीएम10 का स्तर 1,000 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक पहुंच गया और दृश्यता घटकर मात्र एक किलोमीटर रह गई।

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