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Om Birla: 'कोशिश करेंगे JPC में सभी दलों के प्रतिनिधि हों', संविधान संशोधन विधेयकों पर लोकसभा स्पीकर का बयान

Sat, 30 Aug 2025 08:05 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर Published by: बशु जैन Updated Sat, 30 Aug 2025 08:05 PM IST
सार

20 अगस्त को लोकसभा में  गृह मंत्री अमित शाह ने तीन विधेयक पेश किए थे।  प्रस्तावित कानूनों में गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार रहे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को हटाने का प्रावधान है। इन विधेयकों का विपक्ष ने कड़ा विरोध किया और दावा किया कि ये असांविधानिक हैं तथा इनका उद्देश्य विभिन्न राज्यों में सत्तासीन उसके नेताओं को निशाना बनाना है।

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Will try to have representatives of all parties in JPC, LS Speaker's statement on Constitution Amendment Bills
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला। - फोटो : Youtube/@SansadTV

विस्तार

संविधान संशोधन विधेयकों को लेकर संयुक्त संसदीय समिति के गठन पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बड़ा बयान दिया है। ओम बिरला ने कहा कि वह प्रयास करेंगे कि संसद की संयुक्त समिति में विभिन्न दलों का प्रतिनिधित्व हो। यह समिति लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार पीएम, सीएम, मंत्रियों और अधिकारियों को हटाने का प्रस्ताव करने वाले तीन विवादास्पद विधेयकों की जांच करेगी। वह इस मामले पर सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा करेंगे।
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ओम बिरला ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों से अपने प्रतिनिधियों के नाम प्रस्तुत करने को कहा गया है। समिति का गठन शीघ्र ही किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संसदीय समितियां राजनीतिक विभाजन से ऊपर उठकर काम करती हैं और सदस्य इन समितियों में अपनी बात खुलकर रख सकते हैं।
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अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण पर संसद और राज्य विधानसभाओं की समितियों के अध्यक्षों के राष्ट्रीय सम्मेलन में ओम बिरला ने कहा कि मेरा प्रयास सर्वोत्तम परंपराओं को बनाए रखना होगा। सभी राजनीतिक दलों के साथ बातचीत और विचार-विमर्श किया जाएगा।
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गृह मंत्री ने लोकसभा में पेश किए थे विधेयक
20 अगस्त को लोकसभा में  गृह मंत्री अमित शाह ने तीन विधेयक पेश किए थे। इसमें पहला संघ राज्य क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक 2025;  दूसरा संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025; और तीसरा जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 है। प्रस्तावित कानूनों में गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार रहे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को हटाने का प्रावधान है।

विपक्ष के विरोध के बाद जेपीसी बनाने पर बनी सहमति
इन विधेयकों का विपक्ष ने कड़ा विरोध किया और दावा किया कि ये असांविधानिक हैं तथा इनका उद्देश्य विभिन्न राज्यों में सत्तासीन उसके नेताओं को निशाना बनाना है। सदन ने विधेयकों को जांच के लिए संसद की एक संयुक्त समिति को भेज दिया है। इसमें लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य होंगे, लेकिन अभी तक इस समिति का गठन नहीं हुआ है। तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और आम आदमी पार्टी ने घोषणा की है कि वे समिति का हिस्सा नहीं होंगे। हालांकि कांग्रेस ने इस पर कुछ नहीं कहा है। जबकि समाजवादी पार्टी ने विपक्ष से पैनल में शामिल न होने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है। 

अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण के लिए विधायी समितियां गठित करें राज्य सरकार: ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए राज्यों से विधायी निकाय बनाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि भुवनेश्वर एजेंडा 2025 के तहत विभिन्न सुझाव प्राप्त हुए हैं और संबंधित संसदीय समिति उन्हें अमल में लाने के लिए केंद्र और राज्यों के समक्ष उठाएगी।

उन्होंने कहा कि औसतन संसदीय समिति की 70 से 80 प्रतिशत सिफारिशें सरकार द्वारा स्वीकार कर ली जाती हैं, जिससे कार्यपालिका को जवाबदेह और पारदर्शी बनाने में इसकी महत्ता पर प्रकाश पड़ता है। इस मुद्दे पर संसदीय समिति ने कई सशक्त निर्णय लिए हैं। इसमें 1.5 लाख से अधिक नौकरियों को नियमित करना और विभिन्न क्षेत्रों में आरक्षण का लाभ प्रदान करना शामिल है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इन निकायों की बैठक 25 वर्षों के बाद और पहली बार दिल्ली से बाहर आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य एक-दूसरे से सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए विचार-विमर्श को बढ़ावा देना तथा हाशिए पर पड़े समुदायों के कल्याण के प्रयासों को सक्रिय करना है। ओम बिरला ने भी कहा कि भारत ने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार किए हैं कि वे वर्तमान आकांक्षाओं के अनुरूप हों।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के सदस्यों को अपनी बात रखने की अनुमति है और वे अक्सर चर्चा के दौरान आवंटित समय से अधिक समय तक बोलते हैं। सदन को नियमों के अनुसार काम करना चाहिए। असहमति लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन इसे गरिमापूर्ण तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों की हालिया मानसून सत्र के दौरान जानबूझकर सदन में व्यवधान डालने की प्रवृत्ति की आलोचना की।

दो दिवसीय सम्मेलन में संसदीय समिति के अलावा 19 राज्य विधानमंडल समितियों और एक केंद्र शासित प्रदेश की समिति के सदस्यों ने भाग लिया। सम्मेलन में ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने कहा कि इन समुदायों का कल्याण केवल नीति का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह देश की प्रगति का भी पैमाना है, क्योंकि लोकतंत्र समानता, सम्मान, स्वतंत्रता और बंधुत्व के स्तंभों पर टिका है। उनका सशक्तीकरण कोई दान नहीं बल्कि लोकतंत्र का सार है।

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