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गुजरात चुनाव से पहले राहुल गांधी बन पाएंगे कांग्रेस अध्यक्ष ?

Sun, 19 Nov 2017 06:51 PM IST
शशिधर पाठक/अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 19 Nov 2017 06:51 PM IST
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Will Rahul Gandhi become Congress President before Gujarat Assembly elections
rahul gandhi

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने करीब महीना भर पहले राहुल गांधी के बहुत जल्द कांग्रेस अध्यक्ष बनने की संभावना जताई थी। सोनिया ने यह संभावना दीपावली से पहले जताई थी। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेता लगातार राहुल गांधी को पार्टी की कमान सौंपने की मांग कर रहे हैं। 

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राहुल गांधी खुद इस समय काफी बेहतर फॉर्म में चल रहे हैं। उनके हर ट्वीट, कमेंट को न सिर्फ तवज्जो मिल रही है, बल्कि गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान वह पार्टी के तारणहार के रूप में दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या राहुल गुजरात चुनाव से पहले कांग्रेस अध्यक्ष बन जाएंगे?
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राहुल गांधी के दिल्ली और कुछ राज्यों में बेहद करीबी दोस्त हैं। उनके वड़ोदरा के एक करीबी मित्र के अनुसार वह गुजरात चुनाव से पहले कांग्रेस के अध्यक्ष बन जाएंगे। सूत्र का कहना है कि पूरी पटकथा थोड़े बदलाव के साथ तय हो चुकी है। सूत्र का यह भी कहना है कि पहले यह तारीख नवंबर महीने की ही थी, लेकिन गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों में देरी के कारण राहुल को यह जिम्मेदारी देने में थोड़ा सा संशोधन हुआ है। राहुल के वड़ोदरा के इस करीबी के अनुसार पार्टी के वरिष्ठ प्रभावशाली कांग्रेस महासचिव ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। 

सूत्र का कहना है कि 25 नवंबर के बाद और 14 दिसंबर के बीच में कभी भी राहुल गांधी इस पद पर चुने जा सकते हैं। हालांकि इस बारे में दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय का कोई नेता मुंह नहीं खोलता। खुद कांग्रेस उपाध्यक्ष से भी जब इस बारे में जानने की कोशिश हुई थी तो बिना कुछ बोले उन्होंने बस थोड़ा सा इंतजार करने का संकेत किया था। हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि उनके पास पार्टी संविधान के अनुसार नये अध्यक्ष के लिए 31 दिसंबर 2017 तक का समय है।

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राहुल ही कांग्रेस अध्यक्ष क्यों?

Will Rahul Gandhi become Congress President before Gujarat Assembly elections
राहुल गांधी - फोटो : PTI

भारतीय राजनीति में छवि युद्ध का दौर चल रहा है। भाजपा ने अटल बिहारी वाजपेयी की छवि पर कभी केन्द्र में सत्ता पर काबिज हुई थी। छवि युद्ध में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी कमजोर पड़े और भाजपा को सफलता नहीं मिल पाई।

2014 में भाजपा के मातृ संगठन आरएसएस ने इस पद के लिए गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को सबसे उपयुक्त पाया। भाजपा ने दांव लगाया और सफल रही। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद सत्ता पक्ष ने कांग्रेस उपाध्यक्ष की छवि को मंच से सार्वजनिक तौर पर खराब करने का हर प्रयास किया।

 इसके बावजूद भी केन्द्र सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है। ऐसे में प्रधानमंत्री की छवि से मुकाबले के लिए कांग्रेस के पास अब राहुल गांधी का चेहरा है। राहुल राष्ट्रीय राजनीति को समझते हैं और उनकी लोगों के बीच में स्वीकार्यता लगातार तेजी से बढ़ रही है। वैसे भी राहुल गांधी करीब डेढ़ दशक से राजनीति में कड़ी मेहनत करते हुए सक्रिय हैं। वह 17 मई 2004 से अमेठी के सांसद हैं। 25 सितंबर 2007 से 19 जनवरी 2013 तक कांग्रेस पार्टी के महासिचव और फिर उपाध्यक्ष बने थे। 2004 से वह लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को केन्द्र सरकार के समक्ष उठाते रहे हैं।

सबको मंजूर
कभी समय था कि कांग्रेस राहुल को आगे करती थी तो दूसरे दलों के कुछ वरिष्ठ नेता मुंह बिचकाते थे। अब बात नहीं रही। राहुल गांधी ने अपनी स्वीकार्यता बढ़ाई है। राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मिलकर उ.प्र. विधानसभा चुनाव लड़ा। माकपा महासिचव सीताराम येचुरी को राहुल गांधी से मिलने में परहेज नहीं होता। एनसीपी के नेता शरद पवार राहुल गांधी को तवज्जो देते हैं।

राहुल गांधी नई पीढ़ी के नेताओं के बीच में कांग्रेस उपाध्यक्ष के तौर पर अपनी अलग पहचान रखने लगे हैं। वह शरद यादव के पास जब किसी प्रस्ताव के साथ कांग्रेस महासिचव गुलाम नबी आजाद को भेजते हैं तो उन्हें तवज्जो मिलती है। यहां तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अब राहुल गांधी पर पहले की तरह जैसे (कुछ लोगों की उम्र बढ़ जाती है लेकिन उनकी बुद्धि नहीं बढ़ती) कटाक्ष नहीं करते। 

अन्य कारण
 -राहुल गांधी पार्टी के भीतर सर्वमान्य नेता हैं और अभी तक पार्टी के भीतर कोई भी चेहरा उनसे प्रतिद्वंदिता के सामने नहीं आया है।
-कांग्रेस पार्टी के संविधान के अनुसार 31 दिसंबर 2017 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अपने अध्यक्ष का चुनाव करना है।
-कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। वह पार्टी की सामान्य गतिविधियों, प्रचार, प्रसार तथा जन आंकांक्षाओं के लिए पर्याप्त समय दे पाने में असमर्थ हैं।
-एनएसयूआई, युवक कांग्रेस समेत अन्य पार्टी के मुख्य संगठनों में कांग्रेस उपाध्यक्ष ने न केवल पारदर्शिता को बढ़ाया है, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर तमाम सुधार किए हैं। ऐसे में पार्टी की नई पीढ़ी भी राहुल गांधी के साथ है।  

गुजरात चुनाव से पहले क्यों?

Will Rahul Gandhi become Congress President before Gujarat Assembly elections
राहुल गांधी - फोटो : PTI
राजनीति में सूरज का उगना काफी अहम माना जाता है। कांग्रेस को उम्मीद है कि गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 हर हाल में अच्छे नतीजे देगा। राहुल गुजरात में कड़ी मेहनत कर रहे हैं। बड़ी संजीदगी से राजनीतिक सूझ बूझ के साथ डटे। यह प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष का गृहराज्य भी है। 

ऐसे में चुनाव नतीजे से मेें भाजपा के माथे पर बल ला देना कांग्रेस के लिए सौगात भरी उपलब्धि है। पार्टी के रणनीतिकार इसे अपने नव निर्वाचित अध्यक्ष को उपहार के रूप में देकर पूरे देश में राजनीतिक परिदृश्य को बदलने की सोच रहे हैं। वैसे भी यह नतीजा उस समय आएगा जब संसद का शीत कालीन सत्र चल रहा होगा। ऐसे में इसकी अहमियत और बढ़ जाएगी।  



 
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