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क्या प्रियंका गांधी नरेंद्र मोदी को पूर्वांचल में रोक पाएंगी?
Thu, 24 Jan 2019 07:57 PM IST
Amit Sharma
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Published by: Amit Sharma
Updated Thu, 24 Jan 2019 07:57 PM IST
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priyanka gandhi
- फोटो : pti
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में पूर्वांचल को ही अपनी राजनीति का केंद्र बनाया था। उनकी इस रणनीति के पीछे यूपी में पूर्वांचल की 43 लोकसभा सीटों के आलावा बिहार तक पार्टी का असर छोड़ना भी था। वे इसमें कामयाब रहे और पूर्वांचल में भाजपा को भारी सफलता मिली।
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इस बार कांग्रेस ने प्रियंका गांधी जैसे हाई प्रोफाइल चेहरे को सीधे पूर्वांचल की जिम्मेदारी देकर यह साफ़ कर दिया है कि वह प्रधानमंत्री को पूर्वांचल में ही घेर देना चाहती है, लेकिन अहम सवाल यह है कि क्या प्रियंका गांधी नरेंद्र मोदी जैसे नेता के सामने मजबूत चुनौती बनने में कामयाब होंगी?
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पहले ही तीन अहम राज्यों के विधानसभा चुनाव में जीत के मुहाने पर आकर ठिठक चुका भाजपा का विजयी रथ पूर्वांचल में आकर ठहर जाएगा? राजनीतिक पंडितों की राय इस मसले पर बंटी हुई है।
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भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि प्रियंका गांधी एक बड़ा चेहरा हैं। नेता के मुताबिक़ कांग्रेस जिस तरह प्रियंका को इंदिरा गांधी की छवि से जोड़ने की कोशिश कर रही है, अगर वह उसमें जरा भी सफल होती है तो उससे भाजपा को परेशानी अवश्य होगी।
उनका कहना है कि प्रियंका के आने से भाजपा को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार अवश्य करना पड़ेगा। भाजपा की रणनीति का इशारा गुरुवार को ही देखने को मिल सकता है।
मुसलमान वोट बर्बाद नहीं करेगा
माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी के सीधे राजनीती के मैदान में आने का असर सपा-बसपा के गठबंधन पर भी पड़ेगा क्योंकि कांग्रेस के मजबूत होने से गठबंधन के एक बड़े वोट बैंक मुसलमान वोटों का बंटवारा अवश्य होगा। लेकिन समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई का कहना है कि प्रियंका गांधी के आने से गठबंधन को कोई खतरा नहीं है।
जामेई के मुताबिक मुसलमान जानता है कि यूपी में भाजपा को रोकने की जिम्मेदारी उसी की है, इसलिए वह उसी को वोट देगा जो भाजपा को हराने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि यूपी में भाजपा को सिर्फ सपा-बसपा का गठबंधन ही हरा सकता है, इसलिए मुसलमान सिर्फ गठबंधन को ही वोट देगा।
भीड़ आएगी, वोट नहीं
पूर्व में वाराणसी का प्रतिनिधित्व कर चुके भाजपा के वरिष्ठ नेता बिजय सोनकर शास्त्री कहते हैं कि प्रियंका गांधी एक बड़ा और चर्चित नाम हैं। उनके आने से कांग्रेस की रैलियों में लोगों की भीड़ उन्हें देखने के लिए उमड़ सकती है, लेकिन यह भीड़ वोट बैंक में तब्दील नहीं होगी।
इसके पूर्व का अनुभव है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी की रैलियों में भारी संख्या में लोग जुटे थे, लेकिन जब वोट देने की बारी आई तब लोगों ने उनकी जगह भाजपा या अन्य दलों को वोट दिया। यह बात लोकसभा के साथ साथ पिछले यूपी विधानसभा चुनाव में भी साबित हो चुकी है। ऐसी स्थिति में उन्हें नहीं लगता कि प्रियंका गांधी नरेंद्र मोदी के सामने कोई बड़ी चुनौती पेश कर पाएंगी।
नकारात्मक राजनीती कामयाब नहीं होगी
भदोही से भाजपा सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त कहते हैं कि आज राजनीती बदल गई है। अब लोग नाम और चेहरे पर नहीं, बल्कि काम पर वोट देते हैं। 1971 में विपक्ष में रहते हुए हमने ‘इंदिरा हटाओ’ का नारा दिया था, जबकि इंदिरा गांधी अपनी सभाओं में कहती थीं कि हम गरीबी हटाने की बात करते हैं, विपक्ष इंदिरा को हटाने की बात करता है।
मस्त के मुताबिक़ आज वही स्थिति हमारे साथ है। आज नरेंद्र मोदी किसानों-युवाओं के लिए काम करने की बात करते हैं, जबकि विपक्ष ‘मोदी हटाओ’ अभियान चला रहा है। उनका कहना है कि विपक्ष की यह राजनीति कामयाब नहीं होगी और प्रियंका गांधी भाजपा की जीत नहीं रोक सकेंगी।