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अब एचआईवी ग्रस्त लोगों की नहीं छिनेगी नौकरी
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Tue, 25 Apr 2017 02:40 PM IST
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एचआईवी एड्स
एचआईवी ग्रस्त लोगों से भेदभाव समाप्त करने और सम्मान के साथ जीवन बसर करने के लिए नया कानून बनाया गया है। इसके मुताबिक अब एचआईवी पीड़ितों को नौकरी देने से इनकार नहीं किया जा सकता और न ही उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हाल ही में ह्यूमन इम्यूनोडेफीशिएंसी वाइरस (एचआईवी) और एक्वायर्ड इम्यून डेफीशिएंसी सिंड्रोम (एआईडीएस) रोकथाम एवं नियंत्रण कानून-2017 को मंजूरी दी है। इस कानून के तहत यदि किसी को भी एड्स या एचआईवी पीड़ित व्यक्ति के खिलाफ घृणा फैलाते पाया गया तो उसे कम से कम तीन महीने और अधिकतम दो साल की जेल की सजा हो सकती है।
इसके साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इस कानून से संबंधित बिल 11 अप्रैल को लोकसभा में और 21 मार्च को राज्यसभा से पास हो गया।
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हाल ही में ह्यूमन इम्यूनोडेफीशिएंसी वाइरस (एचआईवी) और एक्वायर्ड इम्यून डेफीशिएंसी सिंड्रोम (एआईडीएस) रोकथाम एवं नियंत्रण कानून-2017 को मंजूरी दी है। इस कानून के तहत यदि किसी को भी एड्स या एचआईवी पीड़ित व्यक्ति के खिलाफ घृणा फैलाते पाया गया तो उसे कम से कम तीन महीने और अधिकतम दो साल की जेल की सजा हो सकती है।
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इसके साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इस कानून से संबंधित बिल 11 अप्रैल को लोकसभा में और 21 मार्च को राज्यसभा से पास हो गया।
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पीड़ित की सुरक्षा का भी है प्रावधान
एचआईवी एड्स
नए कानून में इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के संपत्ति और उसके अधिकारों की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। इतना ही नहीं यदि किसी ने इनकी पहचान जाहिर की तो उसके खिलाफ भी सजा का प्रावधान है।
नए कानून में पीड़ित व्यक्तियों के साथ शिक्षण संस्थानों या रोजगार देने में किसी तरह के भेदभाव को रोकने का प्रवाधान किया गया है। साथ ही नए कानून में यह भी प्रावधान है कि पीड़ित व्यक्ति की मर्जी के बिना उसकी एचआईवी जांच या किसी तरह का उपचार नहीं किया जा सकता। अदालत को छोड़कर उसे अपनी बीमारी को जाहिर करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
नए कानून की खास बातें
न तो नौकरी देने से इनकार किया जा सकता है न ही निकाला जा सकता है
पीड़ित की पहचान जाहिर करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान
एचआईवी या एड्स ग्रस्त लोगों की मर्जी के बिना नहीं हो सकती स्वास्थ्य जांच
कोर्ट को छोड़कर उसे अपनी बीमारी जाहिर करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता
नए कानून में पीड़ित व्यक्तियों के साथ शिक्षण संस्थानों या रोजगार देने में किसी तरह के भेदभाव को रोकने का प्रवाधान किया गया है। साथ ही नए कानून में यह भी प्रावधान है कि पीड़ित व्यक्ति की मर्जी के बिना उसकी एचआईवी जांच या किसी तरह का उपचार नहीं किया जा सकता। अदालत को छोड़कर उसे अपनी बीमारी को जाहिर करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
नए कानून की खास बातें
न तो नौकरी देने से इनकार किया जा सकता है न ही निकाला जा सकता है
पीड़ित की पहचान जाहिर करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान
एचआईवी या एड्स ग्रस्त लोगों की मर्जी के बिना नहीं हो सकती स्वास्थ्य जांच
कोर्ट को छोड़कर उसे अपनी बीमारी जाहिर करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता