अबकी बार 400 पार नारे के साथ चुनावी कुरूक्षेत्र में उतरेंगे प्रधानमंत्री
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14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्राइक की और 8 मार्च आते-आते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर पुरानी लोकप्रियता की तरफ बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री को करीब से जानने वाले गुजरात भवन के एक अधिकारी का कहना है कि यही उनकी खासियत है। जबकि केन्द्र सरकार के एक मंत्री इसे प्रधानमंत्री की लगातार चलने वाली कोशिशों को मानते हैं।
गुजरात में कभी प्रधानमंत्री के साथ गली-मुहल्ले में घूमकर केन्द्रीय राजनीतिक गलियारे तक पहुंचे सूत्र का कहना है कि वह शुरू से दस साल बाद की चुनौती को ध्यान में रखकर चलते हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री खुद काफी कुछ करते हैं। गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद से उनकी एक टीम हमेशा उनके मार्ग दर्शन में कई योजनाओं पर कामकरती रहती है। सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री होमवर्क और परिणाम देने में यकीन रखते हैं। इसलिए वह खुद नए तरीके से सोचकर काफी कड़ी मोहनत करते हैं। इतना ही नहीं वह खान-पान, व्यायाम, योगा, दैनिक चर्या के मामले में भी काफी सतर्क रहते हैं।
हर रोज कर रहे हैं उद्घाटन
इन दिनों प्रधानमंत्री हर रोज कहीं न कहीं किसी योजना का शुभारंभ या उद्घाटन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद से वह सैकड़ों परियोजनाओं का उद्घाटन कर चुके हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी के अनुसार यह कुछ सौ में हैं। कहीं आधारशिला रख रहे तो कहीं मेट्रो की सवारी कर रहे हैं। शुक्रवार को सुबह प्रधानमंत्री बनारस में थे। उन्होंने बाबा विश्ननाथ कॉरिडोर का उद्घाटन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री कानपुर में थे। यहां आगरा-कानपुपर मेट्रो को हरी झंडी दिखाई। पनकी बिजली परियोजना काउद्घाटन किया। शाम होते-होते गाजियाबाद आ गए।
यहां प्रधानमंत्री हिंडन में नागरिक उड्डयन सेवा के लिए हरी झंडी दिखाई, दिल्ली से मेरठ तक जाने वाली रैपिड रेलसेवा का शुभारंभ किया। शनिवार को प्रधानमंत्री उ.प्र. के ग्रेटर नोएडा में थे। पिछले साढ़े तीन साल तक प्रधानमंत्री ने देश के भीतर घरेलू दौरे के लिए भरपूर समय दिया है ।प्रधानमंत्री बनने के बाद से करीब 20 बार वह अपने संसदीय क्षेत्र बनारस की यात्रा कर चुके हैं। इतना ही नहीं कभी वह उ.प्र. में तो कभी बिहार, कभी गुजरात, कभीमहाराष्ट्र, कभी पूर्वोत्तर के राज्यों में तो कभी दक्षिण भारत के राज्यों में जनसभा, उद्घाटन, शुभारंभ कर रहे हैं।
लोगों ने विकास का ताना मारा तो दिखाई विकास की उम्र
2017 में सोशल मीडिया साइट पर सबका साथ, सबका विकास को लेकर खूब तंज आए। भाजपा मुख्यालय में आईटी सेल में सक्रिय सूत्र के अनुसार लोग विकास की उम्रपूछ रहे थे। कुछ लोगों का तंज था कि विकास अभी चल भी नहीं पा रहा है, लेकिन अब कोई विकास की बात नहीं कर रहा है। क्योंकि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केन्द्र सरकार नेबिजली, पानी, सिंचाई के साधन, रेल, सड़क, कृषि समेत तमाम क्षेत्रों में जमकर काम किया है। कहीं योजनाएं पूरी हो रही हैं, कहीं आगे बढ़ रही हैं और कहीं इनका उद्घाटन हो रहा है।
सामाजिक क्षेत्र में उज्वला योजना, आयुष्मान भारत, लोगों को घर सबकुछ। सूत्र का कहना है कि अब जनता को सीधे विकास होता दिखाई दे रहा है। क्योंकिप्रधानमंत्री खुद इन योजनाओं को हरी झंडी दिखा रहे हैं। यहां तक कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भी 2016 में उड़ी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और फरवरी 2019 एयरस्ट्राइक बालाकोट करके केन्द्र सरकार ने नए आयाम स्थापित कर दिए हैं।
राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा की नई परिभाषा
शुक्रवार को भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक थी। बैठक में करीब तीन घंटे तक लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर चर्चा हुई। इसमें निर्णय किया गया है कि पार्टी राष्ट्रवाद औरराष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर चुनाव में जाएगी। अबकी बार फिर मोदी सरकार का नारा रहेगा। अबकी बार 400 के पार का लक्ष्य रहेगा। पार्टी 75 साल से अधिक उम्र के लोगोंको टिकट देने में लचर रुख अपनाएगी और केवल जिताऊ तथा अच्छे परफार्मेंस वालों को पारदर्शी तरीके से टिकट दिया जाएगा।
राष्ट्रवाद के बारे में पार्टी के एक महासचिवका कहना है कि देश की सच्ची सेवा ही राष्ट्रवाद है। प्रधानमंत्री खुद को प्रधानसेवक कहते हैं और सच्ची सेवा का अर्थ युवा, गरीब, मध्यमवर्ग समेत सभी का ख्याल रखना, देश का विकास करना है। राष्ट्रीय सुरक्षा का अर्थ देश आंतरिक और हितों से किसी भी प्रकार का समझौता न करना है।