खुफिया रिपोर्ट में खुलासा, बालाकोट में मसूद अजहर का लड़का भी ले चुका है ट्रेनिंग
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पुलमावा हमले का मास्टरमाइंड और जैश का कंमाडर अब्दुल रशीद गाजी इसी कैंप में ट्रेनर रह चुका था, जिसे मंगलवार तड़के भारतीय वायुसेना के मिराज 2000 लड़ाकू विमानों ने नेस्तानाबूद कर दिया। इस हमले में 300 आतंकियों के साथ 25 से ज्यादा कमांडर मारे गए। माना जा रहा है कि बालाकोट का यह कैंप जैश के आतंकियों का बड़ा ट्रेनिंग सेंटर था और इस कैंप में 300 से ज्यादा आतंकी ट्रेनिंग ले रहे थे।
वायुसेना प्रमुख ने दिया था सुझाव
सूत्रों के मुताबिक 15 फरवरी को वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने एयर स्ट्राइक के विकल्प पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को दिए अपने प्रेजेंटेशन में बालाकोट पर ही हमला करने का सुझाव दिया था। इटेलिजेंस रिपोर्ट्स के मुताबिक बालाकोट में जैश ए मोहम्मद की गतिविधियां काफी लंबे वक्त से चल रही थीं।
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ट्रेनिंग कैंप में 5 से 6 बैरकें
खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाक अधिकृत कश्मीर से सटे खैबर पख्तूनख्वा इलाके के मानशेरा जिले में स्थित बालाकोट ट्रेनिंग कैंप में 5 से 6 बैरकें हैं, जहां आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग के दौरान हर वक्त 200 से 300 आतंकी हमेशा मौजूद रहते हैं। पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड और आईडी ब्लास्ट एक्सपर्ट अब्दुल रशीद गाजी बालाकोट के इसी कैंप में ट्रेनर था और उसने यहां ट्रेनिंग भी ली थी।
यहीं बनी पुलवामा हमले की योजना
बालाकोट के इसी ट्रेंनिग कैंप में आतंकी मसूद अजहर के लड़के अब्दुल्ला ने दिसंबर, 2017 को एडवांस ट्रेनिंग ली थी, जिसके बाद उसने 10 दिनों तक रिफ्रेशर ट्रेनिंग कैंप पूरा किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे पहले नवंबर, 2017 को बालाकोट स्थित जैश के कैंप में तकरीबन जैश ए मोहम्मद के 60 आतंकियों को कार के जरिए पुलवामा जैसा सुसाइड अटैक करने की ट्रेंनिंग दी गई। यह ट्रेनिंग 3 माह तक चली। खबरों के मुताबिक पुलवामा हमले की योजना को यहीं बनाया गया, जिसके बाद 14 फरवरी को आतंकी आदिल अहमद डार ने विस्फोटकों से भरी मारुति इको कार सीआरपीएफ की बस से टकरा दी थी, जिसमें 40 जवान शहीद हुए।
जैश के सीनियर कमांडरों ने भी यहीं ली ट्रेनिंग
खुफिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि 10 से 19 जुलाई 2017 तक जैश ए मोहम्मद के सीनियर कमांडरों ने भी बालाकोट के कैंप में ट्रेनिंग ली थी, जिनमें मसूद अजहर के साले मोहम्मद युसुफ अजहर उर्फ उस्ताद घौरी ने भी ट्रेनिंग ली थी। मोहम्मद युसुफ अजहर को ही बाद में बालाकोट ट्रेनिंग कैंप संभालने की जिम्मेदारी दी गई। खास बात यह रही कि यह ट्रेनिंग बॉर्डर एक्शन टीम यानी बैट ने दी थी।
बैट देती है ट्रेनिंग
रिपोर्ट्स के मुताबिक बॉर्डर एक्शन टीम यानी बैट एलओसी के पास ऑपरेशन करने में कुख्यात है और यह हमेशा घात लगा कर हमला करती है। बैट टीम में पाकिस्तानी सेना के साथ आतंकियों को भी शामिल किया जाता है। इस टीम में शामिल लोगों की ट्रेनिंग इस तरह की होती है कि वे ऑपरेशन के वक्त क्रूरता की सारी हदें पार कर जाते हैं। 2013 में शहीद हेमराज का सिर काटने का आरोप भी बैट पर लगा था।