फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Why is there no consensus among the opposition on seat sharing for the upcoming Lok Sabha elections?

'INDIA': सपा की कांग्रेस से तीन बैठकें बेनतीजा रहीं, RLD से दो में ही बात बनी; कहां फंसा सीट बंटवारे में पेंच?

Sun, 21 Jan 2024 05:29 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sun, 21 Jan 2024 05:29 PM IST
सार

गठबंधन समूह में शामिल राजनीतिक दलों के सूत्रों का कहना है कि अलग-अलग दलों के साथ कांग्रेस के नेताओं की सीट शेयरिंग को लेकर बैठक हो रही है। समाजवादी पार्टी के साथ भी तीन बार सीट शेयरिंग को लेकर बैठक हो चुकी है। लेकिन अब तक कुछ भी ठोस नतीजा नहीं निकला है।

विज्ञापन
Why is there no consensus among the opposition on seat sharing for the upcoming Lok Sabha elections?
विपक्ष - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विपक्षी दलों के गठबंधन समूह INDIA में अभी तक सीट शेयरिंग के फार्मूले पर कोई नतीजा नहीं निकल सका है। हालात यह हो गए हैं कि गठबंधन में शामिल अन्य दल अपने-अपने स्तर पर सीटों के शेयरिंग का फार्मूला निकालकर अपने सहयोगियों के साथ सीटें तय कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच उत्तर प्रदेश में सीट शेयरिंग का फार्मूला भी तीन बैठकों के बाद किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका है। जबकि समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल की दो बैठकों के बाद में ही सीटों का बंटवारा भी हो गया। ऐसे में चर्चा इस बात की हो रही है कि आखिर समाजवादी पार्टी कांग्रेस के बीच में सीट शेयरिंग का फार्मूला कहां पर फंस रहा है। हालांकि दोनों पार्टी के नेताओं का मानना है कि अगली एक से दो बैठकों के बीच में उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के बीच में सीटों के बंटवारे पर फैसला हो जाएगा। देश के अन्य हिस्सों में भी कांग्रेस के साथ गठबंधन वाले राजनीतिक दलों की सीटों की तस्वीर स्पष्ट होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

विज्ञापन

 
विपक्षी दलों के गठबंधन समूह INDIA में सीट शेयरिंग को लेकर अलग-अलग दलों के साथ शनिवार और रविवार को महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में शामिल सूत्रों के मुताबिक जिन राज्यों में कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत चल रही है उसमें अभी तक फिलहाल कोई खास नतीजा नहीं निकला है। हालांकि अनुमान लगाया जा रहा है कि 31 जनवरी तक सभी राज्यों में कांग्रेस के साथ होने वाली सीटों के शेयरिंग पर आम सहमति बन जाएगी। फिलहाल कांग्रेस के साथ सीटों की शेयरिंग में हो रही देरी पर अलग-अलग दलों ने अपना फार्मूला निकलना शुरू कर दिया है। जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय लोक दल के साथ सात सीटों की सहमति कांग्रेस में सीटों पर आम सहमति न होने के चलते ही निकाली गई है। 
विज्ञापन

 
गठबंधन समूह में शामिल राजनीतिक दलों के सूत्रों का कहना है कि अलग-अलग दलों के साथ कांग्रेस के नेताओं की सीट शेयरिंग को लेकर बैठक हो रही है। समाजवादी पार्टी के साथ भी तीन बार सीट शेयरिंग को लेकर बैठक हो चुकी है। लेकिन अब तक कुछ भी ठोस नतीजा नहीं निकला है। सियासी जानकारों की माने तो समाजवादी पार्टी ने गठबंधन में सीटों की शेयरिंग पर हो रही देरी के चलते ही राष्ट्रीय लोक दल के साथ आम सहमति पर सात सीटें तय कर ली है। अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच में बची हुई सीटों पर फार्मूला तय किया जाना है। समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि कांग्रेस के साथ सीटों की शेयरिंग पर तीन बैठके हो चुकी हैं। जबकि राष्ट्रीय लोकदल के साथ दो बैठकों में ही सात सीटों पर सहमति बनी। और चुनाव लड़ने के लिए वह सातों सीटें राष्ट्रीय लोक दल के खाते में आ गईं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 
हालांकि सूत्रों की मानें तो कांग्रेस की ओर से सीट शेयरिंग पर अब तक कुछ ठोस नतीजे न निकलने पर अंदरूनी तौर पर गठबंधन के कुछ राजनीतिक दलों में नाराजगी भी बनी हुई है। गठबंधन समूह में शामिल एक प्रमुख राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि समाजवादी पार्टी ने जिन सात सीटों को राष्ट्रीय लोकदल के साथ समझौते में दिया है। वह वैसे तो गठबंधन समूह की आम सहमति के साथ होना चाहिए था। लेकिन कांग्रेस की ओर से हो रही देरी में कोई भी राजनीतिक दल अपना नुकसान नहीं करना चाहता है। उनका कहना है कि समाजवादी पार्टी शुरुआत से ही यह बात कहती आई है कि उत्तर प्रदेश में वह सीटों को देने की हैसियत में है। इसीलिए उसने कांग्रेस का इंतजार किए बगैर अपने स्तर पर अपने पहले से सहयोगी रहे राष्ट्रीय लोकदल को आम सहमति के साथ सात सीटें दे दी। जबकि सभी सीटों पर समाजवादी पार्टी मजबूत के साथ तैयारी में जुटी है।
 
राजनैतिक जानकार जीडी शुक्ला कहते हैं कि जो स्थानीय राजनीतिक दल है उनके लिए अब सिर्फ सीटों के बंटवारे का इंतजार करना कोई बड़ी सियासी समझ जैसा सौदा नहीं लग रहा है। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी ने सभी सीटों पर बंटवारे का इंतजार करने की बजाय अपने तरीके से सीटों का बंटवारा अपने एक सहयोगी के साथ कर लिया। इसी के साथ सियासत को आगे बढ़ाने की तैयारी भी शुरू हो गई। गठबंधन समूह में शामिल पार्टी  के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि भले ही कांग्रेस सीटों के समझौते पर कोई भी ठोस रणनीति ना बना पाई हो लेकिन सियासी तौर पर तो राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय  यात्रा के साथ आगे बढ़ रही है। इसके माध्यम से कांग्रेस अपनी पैठ भी मजबूत कर रही है। ऐसे में उनका दल या गठबंधन समूह में शामिल अन्य दल सिर्फ इंतजार में तो नहीं बैठे रह सकते। वह कहते हैं कि जब गठबंधन में सीटों की शेयरिंग का फार्मूला लागू हो जाएगा तो उस हिसाब से आगे की रणनीति बनेगी। फिलहाल अपने-अपने राज्यों में अपने स्तर पर सियासी दल गठबंधन कर रहे हैं या करने की तैयारी में हैं।

 
सियासी जानकार भी मानते हैं कि अगर सीटों के बंटवारे में इतनी देरी होगी तो कोई भी राजनीतिक दल अपनी तैयारी करना सिर्फ सीटों के बंटवारे के लिहाज से नहीं छोड़ेगा। हालांकि गठबंधन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं की माने तो 31 जनवरी तक सीटों की शेयरिंग का फार्मूला लागू कर दिया जाएगा। इस संबंध में शनिवार और रविवार को गठबंधन दलों के नेताओं की एक बैठक भी आयोजित हुई। जिसमें सीटों के बटवारे को लेकर चर्चा हुई है। अनुमान यही लगाया जा रहा है कि अभी एक या दो बैठकें और होनी हैं। ये बैठके इसी सप्ताह होनी तय हुई हैं। जिसमें अलग-अलग दलों के नेताओं के साथ कांग्रेस की बैठके होनी हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed