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Supreme Court: कानून मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के बीच क्यों जारी है तनातनी? जानें विवाद की पूरी कहानी
Wed, 30 Nov 2022 02:15 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Wed, 30 Nov 2022 02:15 PM IST
सार
सवाल उठता है कि आखिर ये नौबत आई कैसे? क्यों सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्री के बीच तनातनी चल रही है? विवाद के पीछे का किस्सा क्या है? आइए समझते हैं...
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कानून मंत्री किरण रिजिजू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश की सर्वोच्च अदालत और केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। दोनों के बीच चल रही तनातनी बढ़ती जा रही है। अब इस मामले में सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे का एक बयान सामने आया है। इसमें उन्होंने कानून मंत्री किरेन रिजिजू को लेकर कहा है कि उन्होंने अपनी लक्ष्मण रेखा को लांघने का काम किया है।
इसके पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट भी अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये नौबत आई कैसे? क्यों सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्री के बीच तनातनी चल रही है? विवाद के पीछे का किस्सा क्या है? आइए समझते हैं...
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इसके पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट भी अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये नौबत आई कैसे? क्यों सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्री के बीच तनातनी चल रही है? विवाद के पीछे का किस्सा क्या है? आइए समझते हैं...
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पहले जानिए क्यों शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, कुछ दिन पहले सरकार की तरफ से सीनियर आईएएस रहे अरुण गोयल को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया। आयुक्त बनाए जाने से दो दिन पहले ही गोयल ने वीआरएस लिया था। ये सब जब हो रहा था तब चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। गोयल की नियुक्ति को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस नियुक्ति का पूरा ब्योरा मांगा और कहा कि 24 घंटे से कम वक्त में कैसे फैसला लिया गया? सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि देश को इस समय टीएन शेषन जैसे मुख्य चुनाव आयुक्त की जरूरत है।
कोर्ट ने आगे कहा, 'जमीनी स्थिति खतरनाक है। अब तक कई सीईसी रहे हैं, मगर टीएन शेषन जैसा कोई कभी-कभार ही होता है। हम नहीं चाहते कि कोई उन्हें ध्वस्त करे। तीन लोगों (सीईसी और दो चुनाव आयुक्तों) के नाज़ुक कंधों पर बड़ी शक्ति निहित है। हमें सीईसी के पद के लिए सबसे अच्छा व्यक्ति खोजना होगा।'
दरअसल, कुछ दिन पहले सरकार की तरफ से सीनियर आईएएस रहे अरुण गोयल को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया। आयुक्त बनाए जाने से दो दिन पहले ही गोयल ने वीआरएस लिया था। ये सब जब हो रहा था तब चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। गोयल की नियुक्ति को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस नियुक्ति का पूरा ब्योरा मांगा और कहा कि 24 घंटे से कम वक्त में कैसे फैसला लिया गया? सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि देश को इस समय टीएन शेषन जैसे मुख्य चुनाव आयुक्त की जरूरत है।
कोर्ट ने आगे कहा, 'जमीनी स्थिति खतरनाक है। अब तक कई सीईसी रहे हैं, मगर टीएन शेषन जैसा कोई कभी-कभार ही होता है। हम नहीं चाहते कि कोई उन्हें ध्वस्त करे। तीन लोगों (सीईसी और दो चुनाव आयुक्तों) के नाज़ुक कंधों पर बड़ी शक्ति निहित है। हमें सीईसी के पद के लिए सबसे अच्छा व्यक्ति खोजना होगा।'
कानून मंत्री ने कसा था तंज
सरकार पर की गई सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर कानून मंत्री किरण रिजिजू का एक बयान आया। उन्होंने कहा, ये किस तरह का सवाल है? अगर ऐसा है तो आगे लोग ये भी पूछ सकते हैं कि कोलेजियम किस तरह से जजों के नामों को चुनता है। इस पर भी सवाल उठाए जा सकते हैं। जजों को अपने फैसलों के जरिए बोलना चाहिए और इस तरह की टिप्पणी करने से बचना चाहिए। केंद्रीय कानून मंत्री ने आगे कहा था, 'कोलेजियम यह नहीं कह सकता कि सरकार उसकी तरफ से भेजे हर नाम को तुरंत मंजूरी दे। अगर ऐसा है तो उन्हें खुद ही नियुक्ति कर लेनी चाहिए।'
सरकार पर की गई सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर कानून मंत्री किरण रिजिजू का एक बयान आया। उन्होंने कहा, ये किस तरह का सवाल है? अगर ऐसा है तो आगे लोग ये भी पूछ सकते हैं कि कोलेजियम किस तरह से जजों के नामों को चुनता है। इस पर भी सवाल उठाए जा सकते हैं। जजों को अपने फैसलों के जरिए बोलना चाहिए और इस तरह की टिप्पणी करने से बचना चाहिए। केंद्रीय कानून मंत्री ने आगे कहा था, 'कोलेजियम यह नहीं कह सकता कि सरकार उसकी तरफ से भेजे हर नाम को तुरंत मंजूरी दे। अगर ऐसा है तो उन्हें खुद ही नियुक्ति कर लेनी चाहिए।'
फिर सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी
कानून मंत्री के बयान के बाद से सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच तनातनी काफी बढ़ गई। सोमवार 28 नवंबर को जजों की नियुक्ति के मामले में कोलेजियम की तरफ से भेजे गए नामों पर सरकार की तरफ से निर्णय नहीं लिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जता दी।
कोर्ट ने कहा है कि अगर सरकार ने फैसला नहीं लिया तो उसे न्यायिक आदेश देना पड़ सकता है। जजों की नियुक्ति के मसले पर सुनवाई कर रही जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली बेंच ने लंबे समय से सरकार के पास अटकी फाइलों पर गहरा असंतोष जताया। जस्टिस कौल ने कहा, 'कुछ नाम डेढ़ साल से भी ज्यादा समय से सरकार के पास हैं। इस तरह सिस्टम कैसे चल सकता है? अच्छे वकीलों को जज बनने के लिए सहमत करना आसान नहीं है, लेकिन सरकार ने नियुक्ति को इतना कठिन बना रखा है कि देरी से परेशान लोग बाद में खुद ही अपना नाम वापस ले लेते है?'
कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार की तरफ से बिना कोई वजह बताए नामों को रोक कर रखना गलत है। सरकार अपनी मर्जी से नाम चुन रही है। इससे वरिष्ठता का क्रम भी गड़बड़ा रहा है। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने कहा कि वह लंबित फाइलों पर सरकार से बात कर जवाब देंगे।
कानून मंत्री के बयान के बाद से सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच तनातनी काफी बढ़ गई। सोमवार 28 नवंबर को जजों की नियुक्ति के मामले में कोलेजियम की तरफ से भेजे गए नामों पर सरकार की तरफ से निर्णय नहीं लिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जता दी।
कोर्ट ने कहा है कि अगर सरकार ने फैसला नहीं लिया तो उसे न्यायिक आदेश देना पड़ सकता है। जजों की नियुक्ति के मसले पर सुनवाई कर रही जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली बेंच ने लंबे समय से सरकार के पास अटकी फाइलों पर गहरा असंतोष जताया। जस्टिस कौल ने कहा, 'कुछ नाम डेढ़ साल से भी ज्यादा समय से सरकार के पास हैं। इस तरह सिस्टम कैसे चल सकता है? अच्छे वकीलों को जज बनने के लिए सहमत करना आसान नहीं है, लेकिन सरकार ने नियुक्ति को इतना कठिन बना रखा है कि देरी से परेशान लोग बाद में खुद ही अपना नाम वापस ले लेते है?'
कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार की तरफ से बिना कोई वजह बताए नामों को रोक कर रखना गलत है। सरकार अपनी मर्जी से नाम चुन रही है। इससे वरिष्ठता का क्रम भी गड़बड़ा रहा है। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने कहा कि वह लंबित फाइलों पर सरकार से बात कर जवाब देंगे।
अब आगे क्या?
इसे समझने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता चंद्र प्रकाश पांडेय से बात की। उन्होंने कहा, 'सरकार और कोर्ट के बीच इस तरह के मतभेद पहले भी होते रहे हैं। पिछले साल भी चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर विवाद हुआ था। हालांकि, इस बार कानून मंत्री ने कोलेजियम का मुद्दा उठाकर इसे ज्यादा ही तूल दे दिया है।'
पांडेय आगे कहते हैं, फिलहाल कोलेजियम से होने वाली नियुक्तियों के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में आठ दिसंबर को सुनवाई होनी है। उधर, लंबे समय से लंबित कोलेजियम के दो नामों की कानून मंत्रालय ने मंजूरी भी दे दी है। ऐसे में संभव है कि आने वाले कुछ समय के लिए ये विवाद फिर कुछ हद तक शांत हो जाए।
इसे समझने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता चंद्र प्रकाश पांडेय से बात की। उन्होंने कहा, 'सरकार और कोर्ट के बीच इस तरह के मतभेद पहले भी होते रहे हैं। पिछले साल भी चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर विवाद हुआ था। हालांकि, इस बार कानून मंत्री ने कोलेजियम का मुद्दा उठाकर इसे ज्यादा ही तूल दे दिया है।'
पांडेय आगे कहते हैं, फिलहाल कोलेजियम से होने वाली नियुक्तियों के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में आठ दिसंबर को सुनवाई होनी है। उधर, लंबे समय से लंबित कोलेजियम के दो नामों की कानून मंत्रालय ने मंजूरी भी दे दी है। ऐसे में संभव है कि आने वाले कुछ समय के लिए ये विवाद फिर कुछ हद तक शांत हो जाए।