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सत्ता संग्राम 2019: जंगलमहल की लड़ाई में कौन मारेगा बाजी
Sun, 12 May 2019 04:22 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sun, 12 May 2019 04:22 AM IST
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ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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पश्चिम बंगाल में छठे दौर में चार जिलों की जिन आठ सीटों पर मतदान होना है उनमें से छह जंगलमहल इलाके में हैं। यहां छह में से तीन सीटों पर आदिवासी वोट ही निर्णायक हैं। वर्ष 2014 में इन आठों सीटों पर तृणमूल जीती थी।
मेदिनीपुरः भुइयां ने पथरीली की घोष की राह
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष मेदिनीपुर सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। उन्होंने इसी जिले की खड़गपुर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। घोष को इस बार अपनी जीत का पूरा भरोसा है। यहां उनका मुकाबला तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य मानस भुइयां से हैं। भुइयां कांग्रेस के टिकट पर लंबे अरसे तक इसी जिले से विधायक रहे हैं। बीते साल तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनको राज्यसभा का सदस्य बनाया गया था। लेकिन ममता बनर्जी ने दिलीप घोष की टक्कर में उनको मैदान में उतार दिया है। इससे घोष की राह पथरीली हो गई है।
प्रमुख मुद्देः विकास और बेरोजगारी।
घाटालः अभिनेता बनाम पूर्व आईपीएस की लड़ाई
पश्चिम मेदिनीपुर जिले की ही घाटाल संसदीय सीट पर बांग्ला फिल्मों के जाने-माने अभिनेता दीपक अदिकारी उर्फ देव इस बार भी तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। भाजपा ने उनके मुकाबले यहां जिले की एसपी रहीं पूर्व आईपीएस अधिकारी भारती घोष को टिकट दिया है।
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प्रमुख मुद्दे : स्वास्थ्य सुविधाएं, सिंचाई की सुविधा और रोजगार।
बांकुड़ाः मुनमुन की सीट पर सुब्रत बनाम सरकार
भाकपा नेता बासुदेव आचार्य बांकुड़ा में वर्ष 1980 से 2009 तक लगातार जीते थे। लेकिन वर्ष 2014 में अभिनेत्री मुनमुन सेन ने उन्हें हराकर सबको हैरत में डाल दिया था। हालांकि इलाके के लोगों और तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं में मुनमुन के खिलाफ नाराजगी को देखते हुए ममता ने वरिष्ठ नेता और पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी को यहां उम्मीदवार बनाया है। वहीं, भाजपा ने इस सीट पर डॉ. सुभाष सरकार को मैदान में उतारा है।
प्रमुख मुद्दे : स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार।
पुरुलियाः आदिवासी बहुल इलाके में रोचक लड़ाई
भाजपा ने आदिवासी बहुल पुरुलिया में पंचायत चुनावों में 33 फीसदी सीटें जीती थीं। तृणमूल कांग्रेस के मृगांक महतो ने पिछली बार फाॅरवर्ड ब्लाॅक के बीर सिंह महतो से यह सीट छीन ली थी। इस बार भी मृगांक ही मैदान में हैं। यह इलाका कुछ साल पहले तक फॉरवर्ड ब्लॉक का गढ़ माना जाता था। भाजपा ने यहां पिछले उम्मीदवार को बदलते हुए ज्योतिर्मय महतो को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के नेपाल महतो भी यहां किस्मत आजमा रहे हैं।
प्रमुख मुद्दे : स्वास्थ्य सुविधाएं और विकास।
झाड़ग्रामः तृणमूल के लिए चुनौती बनी भाजपा
माओवादियों का गढ़ रहे इस इलाके में पिछली बार जीतने वाली तृणमूल के लिए भाजपा चुनौती बन गई है। वर्ष 2014 में तृणमूल की उमा सोरेन ने माकपा के पुलिन बिहारी से यह सीट छीन ली थी। उसके साथ ही वामपंथियों की 42 साल लंबी पकड़ खत्म हो गई थी। अब तृणमूल के बीरवाहा सोरेन का मुकाबला माकपा की देवलीना हेम्ब्रम और भाजपा के कुनार हेम्ब्रम से हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में बदलाव की हवा बह रही है। इलाके के तमाम बाजारों और गांवों में तृणमूल के लिए चुनौती बनती भाजपा पर ही चर्चा ज्यादा हो रही है।
प्रमुख मुद्दे : विकास और रोजगार।
तमलुक और कांथीः अधिकारी परिवार का टूटेगा वर्चस्व
पूर्व मेदिनीपुर जिले की दो सीटों तमलुक और कांथी पर एक दशक से अधिकारी परिवार का कब्जा है। कांथी सीट पर शिशिर अधिकारी जीतते रहे हैं और तमलुक से उनके पुत्र शुभेंदु अधिकारी। वर्ष 2016 में शुभेंदु के मंत्री बनने के बाद इस्तीफे से खाली सीट पर उनके भाई दिब्येंदु जीते थे। वे इस बार भी तृणमूल के टिकट पर मैदान में हैं। तमलुक में कांग्रेस से लक्ष्मण चंद्र सेठ, भाजपा से सिद्धार्थ नास्कर मैदान में हैं। वहीं, कांथी से कांग्रेस के दीपक कुमार दास, सीपीआईएम के पारितोष पटनायक और भाजपा से देबाशीष सामंत मैदान में हैं।
प्रमुख मुद्दे : सड़कें और रोजगार।
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मेदिनीपुरः भुइयां ने पथरीली की घोष की राह
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष मेदिनीपुर सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। उन्होंने इसी जिले की खड़गपुर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। घोष को इस बार अपनी जीत का पूरा भरोसा है। यहां उनका मुकाबला तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य मानस भुइयां से हैं। भुइयां कांग्रेस के टिकट पर लंबे अरसे तक इसी जिले से विधायक रहे हैं। बीते साल तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनको राज्यसभा का सदस्य बनाया गया था। लेकिन ममता बनर्जी ने दिलीप घोष की टक्कर में उनको मैदान में उतार दिया है। इससे घोष की राह पथरीली हो गई है।
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प्रमुख मुद्देः विकास और बेरोजगारी।
घाटालः अभिनेता बनाम पूर्व आईपीएस की लड़ाई
पश्चिम मेदिनीपुर जिले की ही घाटाल संसदीय सीट पर बांग्ला फिल्मों के जाने-माने अभिनेता दीपक अदिकारी उर्फ देव इस बार भी तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। भाजपा ने उनके मुकाबले यहां जिले की एसपी रहीं पूर्व आईपीएस अधिकारी भारती घोष को टिकट दिया है।
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प्रमुख मुद्दे : स्वास्थ्य सुविधाएं, सिंचाई की सुविधा और रोजगार।
बांकुड़ाः मुनमुन की सीट पर सुब्रत बनाम सरकार
भाकपा नेता बासुदेव आचार्य बांकुड़ा में वर्ष 1980 से 2009 तक लगातार जीते थे। लेकिन वर्ष 2014 में अभिनेत्री मुनमुन सेन ने उन्हें हराकर सबको हैरत में डाल दिया था। हालांकि इलाके के लोगों और तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं में मुनमुन के खिलाफ नाराजगी को देखते हुए ममता ने वरिष्ठ नेता और पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी को यहां उम्मीदवार बनाया है। वहीं, भाजपा ने इस सीट पर डॉ. सुभाष सरकार को मैदान में उतारा है।
प्रमुख मुद्दे : स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार।
पुरुलियाः आदिवासी बहुल इलाके में रोचक लड़ाई
भाजपा ने आदिवासी बहुल पुरुलिया में पंचायत चुनावों में 33 फीसदी सीटें जीती थीं। तृणमूल कांग्रेस के मृगांक महतो ने पिछली बार फाॅरवर्ड ब्लाॅक के बीर सिंह महतो से यह सीट छीन ली थी। इस बार भी मृगांक ही मैदान में हैं। यह इलाका कुछ साल पहले तक फॉरवर्ड ब्लॉक का गढ़ माना जाता था। भाजपा ने यहां पिछले उम्मीदवार को बदलते हुए ज्योतिर्मय महतो को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के नेपाल महतो भी यहां किस्मत आजमा रहे हैं।
प्रमुख मुद्दे : स्वास्थ्य सुविधाएं और विकास।
झाड़ग्रामः तृणमूल के लिए चुनौती बनी भाजपा
माओवादियों का गढ़ रहे इस इलाके में पिछली बार जीतने वाली तृणमूल के लिए भाजपा चुनौती बन गई है। वर्ष 2014 में तृणमूल की उमा सोरेन ने माकपा के पुलिन बिहारी से यह सीट छीन ली थी। उसके साथ ही वामपंथियों की 42 साल लंबी पकड़ खत्म हो गई थी। अब तृणमूल के बीरवाहा सोरेन का मुकाबला माकपा की देवलीना हेम्ब्रम और भाजपा के कुनार हेम्ब्रम से हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में बदलाव की हवा बह रही है। इलाके के तमाम बाजारों और गांवों में तृणमूल के लिए चुनौती बनती भाजपा पर ही चर्चा ज्यादा हो रही है।
प्रमुख मुद्दे : विकास और रोजगार।
तमलुक और कांथीः अधिकारी परिवार का टूटेगा वर्चस्व
पूर्व मेदिनीपुर जिले की दो सीटों तमलुक और कांथी पर एक दशक से अधिकारी परिवार का कब्जा है। कांथी सीट पर शिशिर अधिकारी जीतते रहे हैं और तमलुक से उनके पुत्र शुभेंदु अधिकारी। वर्ष 2016 में शुभेंदु के मंत्री बनने के बाद इस्तीफे से खाली सीट पर उनके भाई दिब्येंदु जीते थे। वे इस बार भी तृणमूल के टिकट पर मैदान में हैं। तमलुक में कांग्रेस से लक्ष्मण चंद्र सेठ, भाजपा से सिद्धार्थ नास्कर मैदान में हैं। वहीं, कांथी से कांग्रेस के दीपक कुमार दास, सीपीआईएम के पारितोष पटनायक और भाजपा से देबाशीष सामंत मैदान में हैं।
प्रमुख मुद्दे : सड़कें और रोजगार।