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CM की कुर्सी के दावेदारः 'कोई मोदी का करीबी, कोई अंबानी का'
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 05 Aug 2016 10:19 AM IST
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आनंदीबेन पटेल।
- फोटो : Amar Ujala - File
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आनंदी बेन पटेल के सीएम पद छोड़ने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री को लेकर बीजेपी के भीतर चर्चाएं गर्म हैं। बीजेपी और आरएसएस के 'मॉडल स्टेट' गुजरात में मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। इनके सबके बीच कई नाम निकल कर सामने आ रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करना है। बहरहाल, यहां पढ़िए उन नामों के बारे में, जो मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे हैं।
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सौरभ पटेलः अंबानी कनेक्शन
कैबिनेट में इन्हें सबसे पढ़ा लिखा विधायक माना जाता है।
- फोटो : The Hindu
2012 में गुजरात विधानसभा चुनावों में अकोटा से विधायक चुने गए सौरभ पटेल आनंदीबेन पटेल सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। सौरभ पटेल को गुजरात सरकार के कैबिनेट में सबसे पढ़ा लिखा विधायक माना जाता है। उनके पास एनर्जी और पेट्रो केमिकल्स, माइंस और खनिज, कॉटन उद्योग, नमक उद्योग, प्रिटिंग स्टेशनरी, प्लानिंग, टूरिज्म, सिविल एविएशन, वित्त, लेबर और रोजगार विभाग है।
अमेरिका से मैनेजमेंट की डिग्री हासिल करने वाले सौरभ पटेल मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी की चचेरी बहन के पति हैं। धीरूभाई अंबानी के बड़े भाई रमनिक अंबानी के दामाद हैं। एनर्जी फील्ड में दिलचस्पी रखने वाले सौरभ पटेल ने गांधीनगर में एनर्जी निगेटिव बिल्डिंग बनवाई है। इसके साथ ही एशिया के सबसे बड़े सोलर पॉवर प्रोजेक्ट के पीछे सौरभ पटेल का दिमाग है और नर्मदा कैनाल के ऊपर रूफटॉप सोलर पैनल के पायलट प्रोजेक्ट का श्रेय भी इन्हीं को जाता है।
अमेरिका से मैनेजमेंट की डिग्री हासिल करने वाले सौरभ पटेल मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी की चचेरी बहन के पति हैं। धीरूभाई अंबानी के बड़े भाई रमनिक अंबानी के दामाद हैं। एनर्जी फील्ड में दिलचस्पी रखने वाले सौरभ पटेल ने गांधीनगर में एनर्जी निगेटिव बिल्डिंग बनवाई है। इसके साथ ही एशिया के सबसे बड़े सोलर पॉवर प्रोजेक्ट के पीछे सौरभ पटेल का दिमाग है और नर्मदा कैनाल के ऊपर रूफटॉप सोलर पैनल के पायलट प्रोजेक्ट का श्रेय भी इन्हीं को जाता है।
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विजय रूपाणीः शाह के नजदीकी, PM मोदी के विश्वास पात्र
बीजेपी को ऐसा चेहरा चाहिए, जो सभी समुदायों से तालमेल बिठा सके।
- फोटो : google
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी के लाडले ट्रांसपोर्ट और जल आपूर्ति मंत्री विजय रूपाणी गुजरात के मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे बड़े दावेदारों में से एक हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के मुख्यमंत्री पद छोड़ने की पेशकश के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा तेज हो गई है।
राजकोट से विधायक और पाटीदार के गढ़ सौराष्ट्र से ताल्लुक रखने वाले विजय रूपाणी जैन समुदाय से हैं। पाटीदार आंदोलन और दलित आक्रोश का सामना कर रही बीजेपी को ऐसा चेहरा चाहिए, जो सभी समुदायों से तालमेल बिठा सके।
रूपाणी को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का खास माना जाता है। साथ ही उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वास पात्र के रूप में भी देखा जाता है। इसको ऐसे भी समझा जा सकता है कि सामान्य वर्ग के कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा के वक्त बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने विजय रूपाणी को ही आगे बढ़ाया था। और इस दौरान आनंदीबेन पटेल चुप्पी साधे हुई थी।
आश्चर्य नहीं है कि 60 वर्षीय रूपाणी फरवरी में राज्य प्रमुख बनने के बावजूद भी कैबिनेट में बने हुए हैं। आरएसएस वॉलंटियर से शुरुआत करने वाले रूपाणी राजकोट के मेयर और पार्टी के महासचिव भी रह चुके हैं। मृदुभाषी रूपाणी को एक ऐसा नेता कहा जा सकता है, जो काडर पर अपनी पकड़ रख सकता है।
राजकोट से विधायक और पाटीदार के गढ़ सौराष्ट्र से ताल्लुक रखने वाले विजय रूपाणी जैन समुदाय से हैं। पाटीदार आंदोलन और दलित आक्रोश का सामना कर रही बीजेपी को ऐसा चेहरा चाहिए, जो सभी समुदायों से तालमेल बिठा सके।
रूपाणी को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का खास माना जाता है। साथ ही उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वास पात्र के रूप में भी देखा जाता है। इसको ऐसे भी समझा जा सकता है कि सामान्य वर्ग के कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा के वक्त बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने विजय रूपाणी को ही आगे बढ़ाया था। और इस दौरान आनंदीबेन पटेल चुप्पी साधे हुई थी।
आश्चर्य नहीं है कि 60 वर्षीय रूपाणी फरवरी में राज्य प्रमुख बनने के बावजूद भी कैबिनेट में बने हुए हैं। आरएसएस वॉलंटियर से शुरुआत करने वाले रूपाणी राजकोट के मेयर और पार्टी के महासचिव भी रह चुके हैं। मृदुभाषी रूपाणी को एक ऐसा नेता कहा जा सकता है, जो काडर पर अपनी पकड़ रख सकता है।
भीकू दलसानिया हो सकते हैं छुपा रुस्तम
रूपाणी की तरह दलसानिया का जनाधार नहीं है।
- फोटो : google
हरियाणा के मुख्यमंत्री के चयन का पैमाना देखें, तो आरएसएस नेता और लिउवा पटेल समुदाय के नेता भीकू दलसानिया भी छुपा रूस्तम साबित हो सकते हैं। दलसानिया, रूपाणी के सीनियर और संगठन सचिव हैं। राज्य में पार्टी के दशकों तक चेहरा रहे हैं। हालांकि रूपाणी की तरह दलसानिया का जनाधार नहीं है।
पुरुषोत्तम रूपाला और PM मोदी की मुलाकात
पीड़ित दलित परिवारों से मिलने ऊना भेजे गए।
- फोटो : google
हालांकि अपुष्ट खबरों के मुताबिक कृषि और किसान वेलफेयर राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला की प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात उन्हें इस रेस में आगे करती है। कदवा जाति के रूपाला की संभावना इसलिए ज्यादा है कि ऊना उत्पीड़न की घटना के बाद पार्टी ने रूपाला को ही दलित परिवारों से मिलने के लिए भेजा। हालांकि रूपाला को राज्यसभा भेजे जाने को पार्टी के भीतर उन्हें सीएम की दौड़ से अलग करने के रूप में देखा जा रहा है।
पटेल होने के बावजूद उन्हें पाटीदारों का समर्थन नहीं।
CM पद के लिए पहले भी दौड़ में रहे।
- फोटो : google
यह पहली बार नहीं, जब मुख्यमंत्री पद के लिए नितिन पटेल का नाम चर्चा में है। 2014 में भी नरेंद्र मोदी के गुजरात छोड़ने के बाद उनका नाम सबसे आगे था और उन्होंने आगे बढ़कर कहा था कि 'अगर पार्टी जिम्मेदारी देती है, तो संभालने के लिए तैयार हूं।'
तपे तपाए नेता माने जाने वाले नितिन पटेल ने पिछले दो सालों में तेजी से कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ी हैं। आनंदी बेन सरकार में उनकी हैसियत नंबर दो की थी।
1995 में पहली बार चुनाव लड़ने वाले नितिन पटेल कादी विधानसभा से चुने गए और उन्हें केशुभाई पटेल की सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। 30 सालों से पार्टी में सक्रिय नितिन पटेल ने संगठन में भी कई पदों पर जिम्मेदारी संभाली है। इंडस्ट्री फ्रेंडली होने की वजह से गुजरात को फेवरेट इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनाए रखने में उन्हें मदद मिल सकती है। हालांकि पटेल होने के बावजूद उन्हें पाटीदारों का समर्थन नहीं है।
अगर मुख्यमंत्री पद के लिए चुने जाते हैं, तो उनके लिए यह मुश्किल चुनौती होगी।
गुजरात कैबिनेट में स्वास्थ्य, मेडिकल एजुकेशन, परिवार कल्याण, रोड और बिल्डिंग, गुजरात सरकार में कैपिटल प्रोजेक्ट विभाग का प्रभार नितिन पटेल के पास है। 2012 में मेहसाणा से चुनाव जीतने वाले नितिन पटेल कैबिनेट मिनिस्टर हैं और उनके पास जल आपूर्ति, शहरी विकास और हाउसिंग है।
तपे तपाए नेता माने जाने वाले नितिन पटेल ने पिछले दो सालों में तेजी से कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ी हैं। आनंदी बेन सरकार में उनकी हैसियत नंबर दो की थी।
1995 में पहली बार चुनाव लड़ने वाले नितिन पटेल कादी विधानसभा से चुने गए और उन्हें केशुभाई पटेल की सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। 30 सालों से पार्टी में सक्रिय नितिन पटेल ने संगठन में भी कई पदों पर जिम्मेदारी संभाली है। इंडस्ट्री फ्रेंडली होने की वजह से गुजरात को फेवरेट इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनाए रखने में उन्हें मदद मिल सकती है। हालांकि पटेल होने के बावजूद उन्हें पाटीदारों का समर्थन नहीं है।
अगर मुख्यमंत्री पद के लिए चुने जाते हैं, तो उनके लिए यह मुश्किल चुनौती होगी।
गुजरात कैबिनेट में स्वास्थ्य, मेडिकल एजुकेशन, परिवार कल्याण, रोड और बिल्डिंग, गुजरात सरकार में कैपिटल प्रोजेक्ट विभाग का प्रभार नितिन पटेल के पास है। 2012 में मेहसाणा से चुनाव जीतने वाले नितिन पटेल कैबिनेट मिनिस्टर हैं और उनके पास जल आपूर्ति, शहरी विकास और हाउसिंग है।