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Buddhadeb Bhattacharya: 34 साल के वाम शासन के दूसरे और आखिरी सीएम थे बुद्धदेव भट्टाचार्य; सादगी थी इनकी पहचान
Thu, 08 Aug 2024 11:32 AM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Thu, 08 Aug 2024 11:32 AM IST
सार
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य का सुबह आठ बजकर 20 मिनट पर निधन हो गया। वो कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। पिछले कुछ दिनों से उनका इलाज उनके घर पर ही किया जा रहा था।
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Buddhadeb Bhattacharjee
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पश्चिम बंगाल में सियासी गलियारों में गुरुवार को शोक की लहर दौड़ गई। यहां के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य का निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने 80 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने उनके निधन की जानकारी साझा की है। आइए जानते हैं पूर्व सीएम भट्टाचार्य के जीवन के बारे में।
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बुद्धदेव भट्टाचार्य का निधन सुबह आठ बजकर 20 मिनट पर हुआ। आपको बताते चलें कि वो काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वो कई अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे।पिछले कुछ दिनों से उनका इलाज उनके घर पर ही किया जा रहा था। उनके परिवार की बात करें तो उनकी पत्नी और एक बेटी हैं।
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कौन हैं बुद्धदेव भट्टाचार्य?
बुद्धदेव भट्टाचार्य का जन्म एक मार्च 1944 को उत्तरी कोलकाता में हुआ था। उनके पुरखों का घर बांग्लादेश में है। उन्होंने कोलकाता के प्रतिष्ठित प्रेसीडेंसी कॉलेज से बंगाली साहित्य की पढ़ाई की थी और बंगाली (ऑनर्स) में बीए की डिग्री प्राप्त की थी। बाद में वह साल 1966 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) से जुड़ गए थे। उन्हें जून, 1968 में सीपीआई की युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन का राज्य सचिव बनाया गया था, जिसके बाद डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया में विलय हो गया था।
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इतने साल रहे सीएम पद पर
भट्टाचार्य साल 2000 से 2011 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे थे। इसके साथ ही वह कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के पोलितब्यूरो के सदस्य भी रह चुके हैं।
औद्योगीकरण अभियान की शुरुआत की थी
कहा जाता है कि बंगाल में औद्योगीकरण अभियान की शुरुआत बुद्धदेव भट्टाचार्य ने ही की थी। उन्होंने ही टाटा की नैनो का उत्पादन प्लांट कोलकाता के पास स्थित सिंगुर में स्थापित कराया था। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद साल 2011 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार मनीष गुप्ता के हाथों मात मिली थी।
ज्योति बसु के मंत्रिमंडल में रहे
सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य करीब 18 साल तक ज्योति बसु के मंत्रिमंडल में मंत्री रहे और गृह मंत्रालय समेत कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों में काम किया। वह पहली बार 1977 में कोसीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और सन् 1987 में संस्कृति मंत्री बने।
यह रहा राजनीतिक जीवन
1982 में भट्टाचार्य चुनाव हार गए, मगर पार्टी में उनका कद बढ़ गया। 1987 में वह जाधवपुर से चुनाव लड़े और जीते। इसके बाद वह जाधवपुर से ही लगातार चुनाव जीतते रहे। ज्योति बसु के दौर में ही उन्हें डिप्टी सीएम के साथ गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। बाद में वह ज्योति बसु के उत्तराधिकारी बने।
बुद्धदेव भट्टाचार्य सन् 1996 में गृह मंत्री बने। बाद में सन् 1999 में उपमुख्यमंत्री का पद संभाला। इसके अलावा, 2000 से 2011 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे। साठ के दशक में वियतनाम एकजुटता समिति के एक महत्वपूर्ण पदाधिकारी थे।
सादगी के लिए जाने जाते थे बुद्धदेव भट्टाचार्य
बुद्धदेव भट्टाचार्य ने मीरा भट्टाचार्जी से शादी की। उनकी एक बेटी हैं, जिनका नाम सुचेतन भट्टाचार्जी (पूर्व में सुचेतना भट्टाचार्जी) है। उनकी सादगी मशहूर रही। सीएम रहने के दौरान भी उन्होंने बड़ा बंगला लेने से इनकार कर दिया था। परिवार कोलकाता के बालीगंज में दो कमरे के अपार्टमेंट में रहता है। वह दशकों तक दो कमरों के अपार्टमेंट में रहे और उसी आवास से मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। पांच दशक की लंबी राजनीति, 18 साल तक मंत्री और 11 साल सीएम रहने के बाद भी उनके पास बंगला और कार नहीं रहा। वह अपनी सैलरी भी पार्टी फंड में देते रहे। बताया जाता है कि जब वह मंत्री और सीएम थे, तब भी उनका परिवार सार्वजनिक वाहन से ही सफर करता था।