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कौन है मोहम्मद बाघेर जोलगाद्र?: जिसे बनाया ईरान का नया सुरक्षा प्रमुख, लारिजानी की मौत के बाद नई नियुक्ति
Tue, 24 Mar 2026 05:21 PM IST
Himanshu Singh Chandel
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Tue, 24 Mar 2026 05:21 PM IST
सार
Mohammad Bagher Zolghadr Profile: इस्राइल के एयरस्ट्राइक में अली लारिजानी की मौत के बाद ईरान ने मोहम्मद बाघेर जोलगाद्र को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का नया सचिव बनाया है। जोलघदर पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर और अनुभवी सैन्य अधिकारी हैं। उनकी नियुक्ति को ईरान की सख्त सुरक्षा नीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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मोहम्मद बाघेर जोलगाद्र
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने अपने सुरक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। इस्राइल के हवाई हमले में शीर्ष नेता की मौत के बाद अब देश ने सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के नए सचिव की नियुक्ति कर दी है। क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील होने के बावजूद यह फैसला लिया गया है।
ईरान ने मंगलवार को पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर मोहम्मद बाघेर जोलगाद्र को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का नया सचिव नियुक्त किया। उन्होंने अली लारिजानी की जगह ली है, जिनकी पिछले सप्ताह इस्राइल के एयरस्ट्राइक में मौत हो गई थी। सरकारी टीवी के मुताबिक, जोलगाद्र ब्रिगेडियर जनरल रैंक तक पहुंच चुके हैं और इससे पहले एक्सपीडिएंसी काउंसिल में भी अहम पद संभाल चुके हैं।
कौन हैं मोहम्मद बाघेर जोलगाद्र?
जोलगाद्र का जन्म 1954 में शिराज के फासा शहर में हुआ था। उन्होंने तेहरान विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पढ़ाई की। वे 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले भी सक्रिय रहे और बाद में रिवोल्यूशनरी गार्ड के अहम सदस्य बने। उनका परिवार भी कूटनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में प्रभावशाली माना जाता है। उनके दामाद काजेम गरीबाबादी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
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ये भी पढ़ें- इस्राइली मीडिया का दावा- अमेरिका से बातचीत को तैयार मोजतबा, ट्रंप ने बताया आखिर कब खुलेगा होर्मुज?
क्या रहा है उनका विवादित और सैन्य इतिहास?
जोलगाद्र का नाम लंबे समय से ईरान की सैन्य और सुरक्षा संरचना से जुड़ा रहा है। वे रिवोल्यूशनरी गार्ड की इंटेलिजेंस यूनिट से भी जुड़े रहे हैं। उन पर अतीत में हमलों और सैन्य गतिविधियों में भूमिका के आरोप भी लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव के तहत उनका नाम प्रतिबंध सूची में भी शामिल रहा है, जो उनके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े होने के कारण जोड़ा गया।
क्या यह नियुक्ति ईरान की सख्त रणनीति का संकेत है?
जोलगाद्र की नियुक्ति को ईरान के भीतर बढ़ती सैन्य पकड़ के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला बताता है कि ईरान अब ज्यादा सख्त और सुरक्षा-केंद्रित नीति अपनाने की दिशा में बढ़ रहा है। खासकर इस्राइल और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह नियुक्ति एक रणनीतिक संदेश भी मानी जा रही है।
क्या इससे क्षेत्रीय हालात और बिगड़ सकते हैं?
इस नियुक्ति का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम एशिया में पहले से ही तनाव चरम पर है। ऐसे में एक सख्त छवि वाले सैन्य नेता का शीर्ष सुरक्षा पद पर आना आने वाले दिनों में हालात को और जटिल बना सकता है। इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी असर पड़ने की संभावना है।
अन्य अपडेट-
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ईरान ने मंगलवार को पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर मोहम्मद बाघेर जोलगाद्र को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का नया सचिव नियुक्त किया। उन्होंने अली लारिजानी की जगह ली है, जिनकी पिछले सप्ताह इस्राइल के एयरस्ट्राइक में मौत हो गई थी। सरकारी टीवी के मुताबिक, जोलगाद्र ब्रिगेडियर जनरल रैंक तक पहुंच चुके हैं और इससे पहले एक्सपीडिएंसी काउंसिल में भी अहम पद संभाल चुके हैं।
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कौन हैं मोहम्मद बाघेर जोलगाद्र?
जोलगाद्र का जन्म 1954 में शिराज के फासा शहर में हुआ था। उन्होंने तेहरान विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पढ़ाई की। वे 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले भी सक्रिय रहे और बाद में रिवोल्यूशनरी गार्ड के अहम सदस्य बने। उनका परिवार भी कूटनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में प्रभावशाली माना जाता है। उनके दामाद काजेम गरीबाबादी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
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क्या रहा है उनका विवादित और सैन्य इतिहास?
जोलगाद्र का नाम लंबे समय से ईरान की सैन्य और सुरक्षा संरचना से जुड़ा रहा है। वे रिवोल्यूशनरी गार्ड की इंटेलिजेंस यूनिट से भी जुड़े रहे हैं। उन पर अतीत में हमलों और सैन्य गतिविधियों में भूमिका के आरोप भी लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव के तहत उनका नाम प्रतिबंध सूची में भी शामिल रहा है, जो उनके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े होने के कारण जोड़ा गया।
क्या यह नियुक्ति ईरान की सख्त रणनीति का संकेत है?
जोलगाद्र की नियुक्ति को ईरान के भीतर बढ़ती सैन्य पकड़ के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला बताता है कि ईरान अब ज्यादा सख्त और सुरक्षा-केंद्रित नीति अपनाने की दिशा में बढ़ रहा है। खासकर इस्राइल और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह नियुक्ति एक रणनीतिक संदेश भी मानी जा रही है।
क्या इससे क्षेत्रीय हालात और बिगड़ सकते हैं?
इस नियुक्ति का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम एशिया में पहले से ही तनाव चरम पर है। ऐसे में एक सख्त छवि वाले सैन्य नेता का शीर्ष सुरक्षा पद पर आना आने वाले दिनों में हालात को और जटिल बना सकता है। इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी असर पड़ने की संभावना है।
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