क्या कहता है Article 370, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर क्या है राजनीतिक प्रतिक्रिया?
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संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता दी गई है। जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने राज्य के भारतीय गणराज्य में विलय के दौरान इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर किया था। अनुच्छेद 370 इसी के तहत आता है। वर्ष 1949 में जब इस प्रावधान को संविधान सभा में पेश किया गया तो कांग्रेस ने इसका भारी विरोध किया था। प्रावधान का मसौदा तैयार करने वाले गोपालस्वामी अयंगर कई मसलों पर संविधान सभा को संतुष्ट नहीं कर पाए थे।
भाजपा हर बार चुनाव में जाने से पहले अनुच्छेद 370 को हटाने का वादा करती है। हालांकि दो बार केंद्र की सत्ता में आने के बाद भाजपा ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। यहां तक कि इस समय भाजपा उसी पीडीपी के साथ जम्मू-कश्मीर की सत्ता में है जो इस अनुच्छेद का समर्थन करती रही है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने जो व्यवस्था दी है उसके बाद माना जा सकता है कि इस प्रावधान को हटाने या बनाए रखने का वादा कर अब कोई राजनीतिक दल फायदा नहीं ले पाएगा।
प्रावधान के तहत मिली हैं विशेष सहूलियतें
- - अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश और संचार मामले में कानून बनाने का अधिकार है। इसके अलावा किसी अन्य विषय से जुड़े कानून को लागू कराने के लिए केंद्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए।
- - जम्मू-कश्मीर पर संविधान का अनुच्छेद 356 लागू नहीं होता। नतीजतन राष्ट्रपति को राज्य का संविधान बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है।
- - राष्ट्रपति को संविधान के किसी भी प्रावधान को राज्य में लागू करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए राज्य की सलाह जरूरी है।
- - 1976 का शहरी भूमि कानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता। यानी दूसरे राज्यों के लोग यहां जमीन नहीं खरीद सकते।
- - सूचना का अधिकार (आरटीआई) और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून यहां लागू नहीं होता।
- - अनुच्छेद 360 के तहत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है। यह अनुच्छेद भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
- - राज्य की महिला अगर राज्य के बाहर शादी करती है तो वह यहां की नागरिकता गंवा देती है।
- - अनुच्छेद 370 की वजह से ही जम्मू-कश्मीर का अपना अलग झंडा और प्रतीक चिह्न भी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘अस्थायी नहीं है 370’
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिलाने वाला संविधान का अनुच्छेद 370 अस्थायी प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने पिछले साल सरफेसी एक्ट केस में दिए निर्णय का भी हवाला दिया। जस्टिस एके गोयल और आरएफ नरीमन की पीठ ने कहा, ‘ये मुद्दा इसी अदालत के 2017 सरफेसी मामले में दिए निर्णय से जुड़ा है, जहां हम अनुच्छेद 370 की संक्षिप्त भूमिका के बावजूद उसके अस्थायी प्रावधान नहीं होने की बात मान चुके हैं।’
हो चुके हैं बदलाव भी
इसी प्रावधान के कारण 1965 तक वहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री नहीं होता था। उनकी जगह सदर-ए-रियासत और प्रधानमंत्री होते थे, जिसे बाद में बदला गया। पहले जम्मू-कश्मीर में जाने के लिए भारतीय नागरिक को अपने साथ पहचान-पत्र रखना जरूरी था। भारी विरोध के बाद इस प्रावधान को भी हटा दिया गया।
तीन राष्ट्र का सिद्घांत लागू करने की योजना है यह प्रावधान : श्यामा प्रसाद
भारतीय जन संघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी अनुच्छेद 370 के खिलाफ थे। उन्होंने कहा था कि इससे भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट रहा है। उनका मानना था कि यह अनुच्छेद शेख अब्दुल्ला के तीन राष्ट्रों के सिद्धांत को लागू करने की योजना है। मुखर्जी ने इसके खिलाफ भूख हड़ताल भी की थी। बिना पहचान पत्र जम्मू-कश्मीर में घुसने की कोशिश के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था। 23 जून 1953 को हिरासत में ही उनकी मौत हो गई थी।
घिसते घिसते घिस जाएगा प्रावधान : पंडित नेहरू
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अनुच्छेद 370 को अस्थायी प्रबंध बताया था। 27 नवंबर 1963 को उन्होंने लोकसभा में कहा था कि जल्द ही इसे पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। इससे पहले 1949 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विरोध पर उन्होंने कहा था कि यह ‘घिसते घिसते घिस जाएगा’ यानी समय के साथ यह खुद ही खत्म हो जाएगा।
मैं कभी मंजूरी नहीं दूंगा : डॉ. अंबेडकर
संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अनुच्छेद 370 को मंजूरी देने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि यह नियम भारत की स्थिरता के लिए खतरनाक साबित होगा, इसलिए मैं कभी इसकी मंजूरी नहीं दूंगा।
प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने कहा कि ‘अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई व्यवस्था स्वागत योग्य है। यह प्रावधान जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय अखंडता के साथ ही धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषायी अखंडता को भी सुरक्षा देता है।’