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TMC Crisis: तृणमूल के 440 करोड़ रुपये के फंड पर घमासान, कलकत्ता हाईकोर्ट ने बैंक और राज्य सरकार को भेजा नोटिस
Tue, 30 Jun 2026 05:57 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 30 Jun 2026 05:57 AM IST
सार
तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों में जमा करीब के संचालन को लेकर विवाद अब कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले में ममता बनर्जी गुट ने पुलिस और बैंक की कार्रवाई को चुनौती दी है, जबकि अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
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कलकत्ता हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर शुरू हुआ संगठनात्मक विवाद अब पार्टी के वित्तीय संसाधनों तक पहुंच गया है। पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा करीब 440 करोड़ रुपये के संचालन और उस पर अधिकार को लेकर पैदा हुए विवाद ने अब कानूनी रूप ले लिया है।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सोमवार को मामले का उल्लेख जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत में किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जल्द सुनवाई का अनुरोध किया। अदालत ने कहा कि मामले में पुलिस, संबंधित बैंक और राज्य सरकार सहित सभी पक्षों को पहले नोटिस देना आवश्यक है। इसके बाद ही सुनवाई की तिथि तय की जाएगी।
यह विवाद उस समय गहरा गया जब चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नेतृत्व में एक गुट ने खुद को पार्टी का वास्तविक संगठन बताया, जबकि ममता बनर्जी का खेमा संगठन और उसके वित्तीय अधिकारों पर अपना दावा बनाए हुए है। इसी खींचतान के बीच पार्टी के बैंक खातों के संचालन का मुद्दा भी विवाद का कारण बन गया।
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सूत्रों के अनुसार, पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने बैंक को पत्र लिखकर खातों के संचालन पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद दूसरे गुट की शिकायत पर पुलिस ने संबंधित बैंक को निर्देश दिया कि पार्टी के तीन खातों से फिलहाल कोई लेन-देन न होने दिया जाए। पुलिस ने खातों से संबंधित दस्तावेज भी मांगे हैं। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए ममता का खेमा हाईकोर्ट पहुंचा है।
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ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सोमवार को मामले का उल्लेख जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत में किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जल्द सुनवाई का अनुरोध किया। अदालत ने कहा कि मामले में पुलिस, संबंधित बैंक और राज्य सरकार सहित सभी पक्षों को पहले नोटिस देना आवश्यक है। इसके बाद ही सुनवाई की तिथि तय की जाएगी।
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यह विवाद उस समय गहरा गया जब चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नेतृत्व में एक गुट ने खुद को पार्टी का वास्तविक संगठन बताया, जबकि ममता बनर्जी का खेमा संगठन और उसके वित्तीय अधिकारों पर अपना दावा बनाए हुए है। इसी खींचतान के बीच पार्टी के बैंक खातों के संचालन का मुद्दा भी विवाद का कारण बन गया।
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सूत्रों के अनुसार, पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने बैंक को पत्र लिखकर खातों के संचालन पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद दूसरे गुट की शिकायत पर पुलिस ने संबंधित बैंक को निर्देश दिया कि पार्टी के तीन खातों से फिलहाल कोई लेन-देन न होने दिया जाए। पुलिस ने खातों से संबंधित दस्तावेज भी मांगे हैं। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए ममता का खेमा हाईकोर्ट पहुंचा है।