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पश्चिम बंगाल: डॉक्टरों की हड़ताल पर राज्यपाल ने ममता को बुलाया लेकिन नहीं मिला कोई जवाब

Fri, 14 Jun 2019 10:12 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Gaurav Pandey Updated Fri, 14 Jun 2019 10:12 PM IST
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West Bengal: Governor said he called mamata banerjee to talk on Doctors strike but no answer came
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी (फाइल फोटो) - फोटो : ट्विटर

पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की हड़ताल का मामला देशव्यापी बन गया है। बंगाल में अब तक 100 से ज्यादा डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। भाजपा ने इस मामले पर यह कहते हुए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस्तीफे की मांग कर डाली है कि वह इसे अपनी प्रतिष्ठा का मामला बना रही हैं। वहीं, दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने कहा है कि डॉक्टरों की हड़ताल के मामले पर चर्चा के लिए उन्होंने ममता बनर्जी को बुलाया था, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। 

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राज्यपाल ने शुक्रवार को हमले में घायल जूनियर डॉक्टर परिबाह मुखोपाध्याय से अस्पताल जाकर मुलाकात की जहां उनका इलाज चल रहा है। इस दौरान उन्होंने कहा, मैंने मुख्यमंत्री से संपर्क करने की कोशिश की, उन्हें फोन भी किया। लेकिन अभी तक उनका कोई जवाब नहीं आया। अगर वह मुझे फोन करती हैं तो हम मामले पर चर्चा करेंगे। 
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मामले की शुरुआत कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज का है। यहीं पर दो प्रशिक्षु डॉक्टर परिबाहा मुखोपाध्याय और यश टेकवानी पर हमला हुआ था, जिसके बाद राज्य की स्वास्थ्य सेवा चरमरा गई। यहां सोमवार को शुरू हुई डॉक्टरों की हड़ताल पूरे देश में फैल गई है। शुक्रवार को महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेसीडेंट डॉक्टर्स ने देशभर के प्रदर्शन में हिस्सा लिया। हैदराबाद निजाम इ्स्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसिज के डॉक्टर्स ने विरोध मार्च में हिस्सा लिया। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन और एम्स के रेसिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन आज हड़ताल पर हैं। एम्स के रेसिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात की।
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हालांकि, गुरुवार को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीधे हस्तक्षेप किया था। मगर उस तरह से नहीं जैसा कि डॉक्टर उम्मीद लगाए बैठे थे। वह एसएसकेएम अस्पताल के कैंपस पहुंचीं और हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टर्स को चार घंटे के अंदर काम पर लौटने के लिए कहा। उन्होंने कहा यदि ऐसा नहीं हुआ तो सरकार उनपर कार्रवाई करेगी। जिसमें छात्रावासों से निष्कासन भी शामिल होगा।

हड़ताल कर रहे डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री के इस बयान को धमकी के तौर पर लिया और वह काम पर नहीं लौटे। उन्होंने कहा कि उनकी हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक कि सुरक्षा और न्याय की उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती। इसी तरह की धमकी कोलकाता नगर निगम ने 300 डॉक्टरों को दी थी। लेकिन, शाम को मुख्यमंत्री एक बंगाली न्यूज चैनल पर नजर आईं। उन्होंने एक बार फिर डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील की। इस बार उनके तेवर बदले नजर आए और उन्होंने कहा, 'इन युवा छात्रों ने जो कहा मैं उसपर ध्यान नहीं दे रही हूं। यदि आप मेरा सिर कलम करना चाहते हैं तो कर दें लेकिन कम पर लौट जाएं।' हालांकि, मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद भी परिस्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। 


वहीं, दूसरी ओर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अपील की है कि वह इसे अपनी प्रतिष्ठा का मुद्दा न बनाएं। उन्होंने डॉक्टरों को आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, 'मैं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हाथ जोड़कर कहना चाहता हूं कि इसे अपनी प्रतिष्ठा का मुद्दा न बनाएं। इतनी बुरी तरह पिटाई होने के बादवजूद डॉक्टर केवल पर्याप्त सुरक्षा और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई चाहते हैं। मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया और डॉक्टरों को अल्टीमेटम दे दिया। जिसके बाद देशभर के डॉक्टर गुस्सा हो गए और वह हड़ताल पर चले गए। यदि मुख्यमंत्री ने अपना रवैया नहीं बदला तो देशभर के मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।'

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