{"_id":"68f3d8812212c4f45a08f787","slug":"west-bengal-congress-chief-subhankar-sarkar-urged-eco-to-convene-all-party-meeting-2025-10-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"West Bengal: \"बिना सुधार के एसआईआर लागू करना गलत\", बंगाल कांग्रेस प्रमुख की EC से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
West Bengal: "बिना सुधार के एसआईआर लागू करना गलत", बंगाल कांग्रेस प्रमुख की EC से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
Sat, 18 Oct 2025 11:42 PM IST
लव गौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: लव गौर
Updated Sat, 18 Oct 2025 11:42 PM IST
सार
West Bengal News: पश्चिम बंगाल कांग्रेस प्रमुख शुभंकर सरकार ने चुनाव आयोग से सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि बिहार में एसआईआर में भारी गड़बड़ियां है, बंगाल में लागू करने से पहले इस पर विचार जरूरी है।
विज्ञापन
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार समर्थकों के साथ-फाइल
- फोटो : ANI
विस्तार
पश्चिम बंगाल कांग्रेस प्रमुख शुभंकर सरकार ने शनिवार (18 अक्तूबर) को चुनाव आयोग से राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू करने से पहले एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। सरकार ने यह भी दावा किया कि बिहार में किया गया एसआईआर "बेहद दोषपूर्ण और मताधिकार से वंचित करने वाला" है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार एसआईआर मॉडल "दोषपूर्ण" है और बिना संशोधन के इसे अन्य राज्यों में लागू करना बेहद अनुचित होगा।
बंगाल पीसीसी चीफ ने उठाए सवाल
बंगाल पीसीसी चीफ (डब्ल्यूबीपीसीसी) सरकार ने कहा, "चुनाव आयोग के अपने आंकड़ों के अनुसार, बिहार में पूरी SIR प्रक्रिया में कुल 47 लाख नाम हटाए गए हैं, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या 7.89 करोड़ से घटकर 7.42 करोड़ रह गई है।" उन्होंने दावा किया, "गणना चरण में 26 लाख से ज्यादा मतदाताओं को 'स्थायी रूप से स्थानांतरित' के रूप में चिह्नित किया गया था, जिनमें से ज्यादातर विवाहित महिलाएं या आंतरिक प्रवासी थे, और उनके नाम उनके नए निवास स्थान पर पुनः नामांकन सुनिश्चित किए बिना ही हटा दिए गए।"
सरकार ने कहा कि बिहार की अंतिम मतदाता सूची में "डुप्लिकेट और मृत मतदाताओं, और यहाँ तक कि फर्जी प्रविष्टियों" की निरंतर उपस्थिति, चुनाव आयोग के एसआईआर के बाद शुद्धिकरण के दावों को गलत साबित करती है। कांग्रेस नेता ने कहा, "एसआईआर 2025 में पिछली संशोधन प्रक्रियाओं से बड़े बदलाव किए गए हैं, जैसे गणना का भार मतदाताओं पर डालना और घर-घर जाकर सत्यापन प्रक्रिया को कमजोर करना है।"
विज्ञापन
'बिना सुधार के मॉडल को लागू करना अनुचित'
पीसीसी चीफ ने आगे कहा, "पश्चिम बंगाल में बिना सुधार के इस मॉडल को लागू करना बेहद अनुचित होगा।" सरकार ने मांग की कि 2002 से सभी मतदाता सूचियां खोज उपकरणों के साथ ऑनलाइन प्रकाशित की जाएं, और बीएलओ को घर-घर जाकर फॉर्म एकत्र करने की जिम्मेदारी सौंपी जाए।
उन्होंने कहा, "सभी मतदाताओं को पावती पर्ची मिलनी चाहिए। अस्थायी अनुपस्थिति को नाम हटाने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।" उन्होंने महिलाओं और प्रवासी मतदाताओं के लिए सुरक्षा उपायों की भी माँग की और मौजूदा मतदाताओं के लिए अतिरिक्त नागरिकता दस्तावेजों का विरोध किया।
बंगाल कांग्रेस प्रमुख ने कहा, "आधार के साथ स्व-घोषणा स्वीकार की जानी चाहिए। माता-पिता के जन्म प्रमाण जैसे दस्तावेज नहीं मांगे जाने चाहिए।" सरकार ने आगे कहा, "कोई भी पात्र मतदाता छूटना नहीं चाहिए और कोई भी अपात्र व्यक्ति शामिल नहीं होना चाहिए।"
विज्ञापन
बंगाल पीसीसी चीफ ने उठाए सवाल
बंगाल पीसीसी चीफ (डब्ल्यूबीपीसीसी) सरकार ने कहा, "चुनाव आयोग के अपने आंकड़ों के अनुसार, बिहार में पूरी SIR प्रक्रिया में कुल 47 लाख नाम हटाए गए हैं, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या 7.89 करोड़ से घटकर 7.42 करोड़ रह गई है।" उन्होंने दावा किया, "गणना चरण में 26 लाख से ज्यादा मतदाताओं को 'स्थायी रूप से स्थानांतरित' के रूप में चिह्नित किया गया था, जिनमें से ज्यादातर विवाहित महिलाएं या आंतरिक प्रवासी थे, और उनके नाम उनके नए निवास स्थान पर पुनः नामांकन सुनिश्चित किए बिना ही हटा दिए गए।"
विज्ञापन
सरकार ने कहा कि बिहार की अंतिम मतदाता सूची में "डुप्लिकेट और मृत मतदाताओं, और यहाँ तक कि फर्जी प्रविष्टियों" की निरंतर उपस्थिति, चुनाव आयोग के एसआईआर के बाद शुद्धिकरण के दावों को गलत साबित करती है। कांग्रेस नेता ने कहा, "एसआईआर 2025 में पिछली संशोधन प्रक्रियाओं से बड़े बदलाव किए गए हैं, जैसे गणना का भार मतदाताओं पर डालना और घर-घर जाकर सत्यापन प्रक्रिया को कमजोर करना है।"
विज्ञापन
'बिना सुधार के मॉडल को लागू करना अनुचित'
पीसीसी चीफ ने आगे कहा, "पश्चिम बंगाल में बिना सुधार के इस मॉडल को लागू करना बेहद अनुचित होगा।" सरकार ने मांग की कि 2002 से सभी मतदाता सूचियां खोज उपकरणों के साथ ऑनलाइन प्रकाशित की जाएं, और बीएलओ को घर-घर जाकर फॉर्म एकत्र करने की जिम्मेदारी सौंपी जाए।
उन्होंने कहा, "सभी मतदाताओं को पावती पर्ची मिलनी चाहिए। अस्थायी अनुपस्थिति को नाम हटाने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।" उन्होंने महिलाओं और प्रवासी मतदाताओं के लिए सुरक्षा उपायों की भी माँग की और मौजूदा मतदाताओं के लिए अतिरिक्त नागरिकता दस्तावेजों का विरोध किया।
बंगाल कांग्रेस प्रमुख ने कहा, "आधार के साथ स्व-घोषणा स्वीकार की जानी चाहिए। माता-पिता के जन्म प्रमाण जैसे दस्तावेज नहीं मांगे जाने चाहिए।" सरकार ने आगे कहा, "कोई भी पात्र मतदाता छूटना नहीं चाहिए और कोई भी अपात्र व्यक्ति शामिल नहीं होना चाहिए।"