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बंगाल: नारदा घोटाला, चुनाव के बाद हिंसा जैसे हाई-प्रोफाइल केस संभाल रहे एडवोकेट जनरल ने दिया इस्तीफा
Tue, 14 Sep 2021 02:00 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 14 Sep 2021 02:00 PM IST
सार
राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत उनका इस्तीफा मंजूर भी कर लिया है।
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ममता बनर्जी के शासनकाल में एडवोकेट जनरल का पद छोड़ने वाले किशोर दत्ता चौथे व्यक्ति हैं।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत उनका इस्तीफा मंजूर भी कर लिया है। इस ट्वीट में धनखड़ ने ममता बनर्जी को भी टैग किया।
गौरतलब है कि किशोर दत्ता ने फरवरी 2017 में एडवोकेट जनरल का पद संभाला था। उन्होंने चार साल के कार्यकाल के बाद अचानक पद से इस्तीफा देने के पीछे निजी वजहें बताईं। हालांकि, इसका पूरा विवरण नहीं दिया। उनसे पहले बंगाल के एडवोकेट जनरल रहे जयंत मित्रा ने भी सरकार से कुछ विवादों के चलते कार्यकाल पूरा करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। इसी तरह ममता सरकार के पहले एडवोकेट जनरल अनिंद्य मित्रा और उनके बाद इस पर नियुक्त किए गए बिमल चटर्जी ने भी कार्यकाल पूरा करने से पहले इस्तीफा सौंप दिया था। यानी ममता के 2011 में बंगाल की सत्ता में आने के बाद से अब तक चार एडवोकेट जनरल अपना पद छोड़ चुके हैं।
बता दें कि हालिया समय में किशोर दत्ता का नाम कई हाई-प्रोफाइल केसों में शामिल रहा। वे कलकत्ता हाईकोर्ट में ममता सरकार के खिलाफ दर्ज चुनाव बाद हिंसा के मामलों से जुड़े रहे थे। इसके अलावा नारदा घोटाले को लेकर चल रही जांच में वे बंगाल सरकार का पक्ष रख रहे थे। बता दें कि इस केस में सीबीआई ने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के चार बड़े नेताओं को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा दत्ता टीएमसी से जुड़े विधायक मुकुल रॉय की पीएसी अध्यक्षता को मिली चुनौती के मामले को भी देख रहे थे।
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गौरतलब है कि किशोर दत्ता ने फरवरी 2017 में एडवोकेट जनरल का पद संभाला था। उन्होंने चार साल के कार्यकाल के बाद अचानक पद से इस्तीफा देने के पीछे निजी वजहें बताईं। हालांकि, इसका पूरा विवरण नहीं दिया। उनसे पहले बंगाल के एडवोकेट जनरल रहे जयंत मित्रा ने भी सरकार से कुछ विवादों के चलते कार्यकाल पूरा करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। इसी तरह ममता सरकार के पहले एडवोकेट जनरल अनिंद्य मित्रा और उनके बाद इस पर नियुक्त किए गए बिमल चटर्जी ने भी कार्यकाल पूरा करने से पहले इस्तीफा सौंप दिया था। यानी ममता के 2011 में बंगाल की सत्ता में आने के बाद से अब तक चार एडवोकेट जनरल अपना पद छोड़ चुके हैं।
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बता दें कि हालिया समय में किशोर दत्ता का नाम कई हाई-प्रोफाइल केसों में शामिल रहा। वे कलकत्ता हाईकोर्ट में ममता सरकार के खिलाफ दर्ज चुनाव बाद हिंसा के मामलों से जुड़े रहे थे। इसके अलावा नारदा घोटाले को लेकर चल रही जांच में वे बंगाल सरकार का पक्ष रख रहे थे। बता दें कि इस केस में सीबीआई ने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के चार बड़े नेताओं को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा दत्ता टीएमसी से जुड़े विधायक मुकुल रॉय की पीएसी अध्यक्षता को मिली चुनौती के मामले को भी देख रहे थे।
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In terms of Article 165 of the Constitution have accepted with immediate effect resignation submitted by Shri Kishore Datta, Senior Advocate, as Advocate General of State of West Bengal @MamataOfficial with immediate effect. pic.twitter.com/IKK0Iu4qeG
— Governor West Bengal Jagdeep Dhankhar (@jdhankhar1) September 14, 2021