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CJI ठाकुर बोले- हाईकोर्ट के 500 जजों के पद खाली, मूलभूत सुविधाएं तक नहीं

Sat, 26 Nov 2016 05:17 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 26 Nov 2016 05:17 PM IST
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 we have vacant court room but no judges says TS Thakur
सीजेआई
जजों की नियुक्ति के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने एक बार फिर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में जजों की नियुक्ति पर ब्रेक लगा हुआ है। स्थिति यह आ गई है कि कोई भी रिटायर जज ट्रिब्यूनल को हेड नहीं करना चाहता। 
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उन्होंने कहा कि कई कोर्ट खाली हैं। ऐसे में अपने रिटायर साथियों को वहां भेजने में तकलीफ होती है। सरकार कोर्ट को किसी भी तरह की सुविधा देने को तैयार नहीं है। वहीं दूसरी ओर
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केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि हम सम्मान के साथ उनके (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) साथ असहमति व्यक्त करते हैं, इस साल 120 जजों की नियुक्ति की गई है
 
उन्होंने कहा कि 500 कोर्ट खाली पड़े हैं। वहीं, कई कोर्ट में मूलभूत सुविधाओं की भी भारी कमी है। कोर्ट रूम खाड़ी पड़े हैं। न्याय की अहमियत होती है। जिनके पास लोगों के अधिकारों को प्रभावित करने का अधिकार है उन्हें इस जिम्मेदारी को समझना चाहिए।
 

क्यों अब तक नहीं हो सकी है जजों की नियुक्ति 

 we have vacant court room but no judges says TS Thakur
सीजेअाई

केंद्र सरकार और न्यायपालिका के बीच जजों की नियुक्ति को लेकर खींचतान काफी समय से जारी है। हाईकोर्ट में जजों की भर्ती के लिए चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम ने जिन जजों के नाम की सिफारिश की थी, उनमे से आधे से ज्यादा नामों को केंद्र सरकार ने अपनी मंजूरी नहीं दी है।

सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि जजों के कॉलेजियम के भेजे गए 77 नामों में से सरकार ने 43 नामों को लौटा दिया है जबकि 34 जजों की नियुक्ति केंद्र सरकार ने कर दी है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2015 में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के परामर्श से संशोधित मेमोरेंडम ऑफ प्रॉशिजर बनाने के लिए कहा था।

यहीं नहीं 15 अगस्त को प्रधानमंत्री के भाषण के ठीक बाद चीफ जस्‍टिस ठाकुर ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी ने अपने भाषण में न्यायपालिका में सुधार के बारे में कोई बात नहीं की।

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