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Hindi News ›   India News ›   Water Crisis in Bundelkhand, Dry Bawri First time.

बुंदेलखंड में जल संकट, पहली बार सूखी बावरी

Wed, 25 May 2016 04:29 AM IST
राजू तिवारी/अमर उजाला, डौंगरा खुर्द (ललितपुर)
राजू तिवारी/अमर उजाला, डौंगरा खुर्द (ललितपुर) Updated Wed, 25 May 2016 04:29 AM IST
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Water Crisis in Bundelkhand, Dry Bawri First time.
Water Crisis in Bundelkhand - फोटो : अमर उजाला, डौंगरा खुर्द (ललितपुर)
सूखा की मार झेल रहे तपते बुंदेलखंड में पानी की त्राहि-त्राहि मची है। डौंगरा के वन क्षेत्र में तालाब सूख जाने से जहां वन्य पशुओं को प्यास बुझाना मुश्किल हो रहा है, वहीं गांव में प्राचीन बावरी सूख जाने से पानी का संकट गहरा गया है। अब ग्रामीण हैंडपंप के सहारे हो गए हैं।
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जिले में विंध्याचल पर्वत शृंखला फैली हुई है। इसके आसपास के क्षेत्र में घना जंगल है। ग्राम डौंगरा खुर्द जिला मुख्यालय से 55 किमी दूर है। बरसात के दिनों में यहां जब हरियाली अपने चरम पर होती है तो लगता है मानो प्रकृति पूरा शृंगार करके सामने आई है। लेकिन, वर्तमान में स्थिति काफी खराब है।
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गर्मी और सूखे के कारण ज्यादातर जल स्रोत सूख गए हैं। पेड़ के पत्ते झड़ जाने से जंगल और आसपास के क्षेत्र में उजड़ा चमन जैसा माहौल है। पास से निकली जामनी नदी पूरी तरह से सूख गई है।
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गांव में बनी प्राचीन बावरी भी सूख गई है। इससे सांभर, बंदरों को प्यास बुझाना मुश्किल पड़ रहा है। वन्य पशु रात्रि के समय गांव में आते हैं और घरों के बाहर, हैंडपंप के आसपास अथवा नालियों में भरे पानी से प्यास बुझा रहे हैं।

वन्य पशुओं के लिए पानी का संकट

Water Crisis in Bundelkhand, Dry Bawri First time.
ग्रामीण बताते हैं कि गांव का तालाब उन्होंने कभी सूखा नहीं देखा, लेकिन इस बार तालाब भी सूख गया है। यह तालाब करीब 36 एकड़ जमीन के भराव क्षेत्र में आता है और काफी बड़ा है। इससे आसपास की करीब एक हजार एकड़ खेती की जमीन की सिंचाई होती है। इस तालाब के पानी से आसपास के ग्राम डोंगराखुर्द, पटना, चांदौरा, गुढ़ा आदि गांवों में खेतों में सिंचाई की जाती है। लेकिन, इस वर्ष पानी नहीं होने के कारण किसानों को सिंचाई की सुविधा नहीं मिली।

प्राचीन बावरी भी न केवल ग्रामीणों की प्यास बुझाती है, बल्कि आसपास 20 एकड़ खेती की सिंचाई की सुविधा भी है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सका। पिछले दिनों बाबरी की खुदाई कराई गई थी, लेकिन पानी नहीं आया। पानी के अभाव में ग्राम डौंगरा के आसपास फैले वन क्षेत्र में रहने वाले वन्य जीवों की मौत हो रही है। ग्रामीण हैंडपंप के सहारे हो गए हैं। यहां के बारे में मान्यता है कि पांडवों ने एक वर्ष अज्ञातवास के रूप में डौंगरा खुर्द के जंगल में ही बिताया था।

बावरी बहुत प्राचीन है। इसका इतिहास नहीं मिलता, लेकिन यह बावरी 40-50 साल से नहीं सूखी है। परंतु इस बार बावरी सूख जाने से ग्रामीणों को पानी की परेशानी हो रही है। 
- राजाराम तिवारी, ग्राम डौंगरा खुर्द

जब से होश संभाला, यह तालाब पहली बार सूखा है। इससे पशुओं व वन्य जीवों के सामने पानी की समस्या खड़ी हो गई है। जंगली जीव प्यास बुझाने के लिए रात में गांव में आते हैं।
- राम सिंह बुंदेला (झुन्नू राजा), ग्राम डौंगरा खुर्द

पानी की कमी के कारण वन्य जीवों पर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन को जल्द ही पानी के संसाधनों पर ध्यान देना चाहिए, अन्यथा वन्य जीवों के लिए काफी परेशानी हो जाएगी। 
- भूप्रताप सिंह, ग्राम डौंगरा कलां
 
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