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एनआरसी: अंतिम सूची में नाम नहीं होने पर छिन सकता है मताधिकार
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Sun, 09 Dec 2018 05:22 PM IST
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असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की अंतिम सूची में जिन लोगों का नाम शामिल नहीं होगा, उनसे मताधिकार छिन सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को बताया कि एनआरसी में दावों और आपत्ति की अवधि कुछ दिनों में खत्म हो जाएगी। अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद मताधिकार वापस लेना पहला संभावित कदम होगा।
एनआरसी के मसौदे से बाहर कुल 40 लाख लोगों में से अभी तक केवल 10 दस लाख ने नाम सूची में शामिल करने के लिए आवेदन किया है। इन लोगों ने सभी जरूरी दस्तावेज जमा करा दिए हैं। अधिकारी ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति भारतीय नागरिकता से संबंधित दस्तावेज नहीं पेश कर पाता है तो उससे मताधिकार वापस लिया जाना पहला कदम हो सकता है।
हालांकि ऐसे लोगों के संबंध में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा। कोर्ट भी असम में इस व्यापक अभियान की निगरानी कर रहा है। कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद एनआरसी के संबंध में दावे और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया 25 सितंबर को शुरू हुई थी और यह 15 दिसंबर को खत्म होगी।
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एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जिन लोगों के नाम मसौदे में नहीं थे, उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए। अगर कुछ लोग अपना नाम एनआरसी में शामिल नहीं कराना चाहते तो इसका मतलब है कि उनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं।
सूची से बाहर के दस्तावेज पेश नहीं कर सकते
असम में एनआरसी में नाम शामिल करने का दावा पेश करने के लिए लोग दो सूचियों से बाहर किए गए दस्तावेज दोबारा पेश नहीं कर सकते। एनआरसी के प्रदेश संयोजक दफ्तर की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पहले दिए गए दस्तावेजों को फिर से सौंपने की जरूरत नहीं है। कोई भी व्यक्ति या तो पहले जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार के लिए दावा पेश कर सकता है या फिर वह ए और बी सूची में शामिल दस्तावेजों के सहारे ऐसा कर सकता है।
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एनआरसी के मसौदे से बाहर कुल 40 लाख लोगों में से अभी तक केवल 10 दस लाख ने नाम सूची में शामिल करने के लिए आवेदन किया है। इन लोगों ने सभी जरूरी दस्तावेज जमा करा दिए हैं। अधिकारी ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति भारतीय नागरिकता से संबंधित दस्तावेज नहीं पेश कर पाता है तो उससे मताधिकार वापस लिया जाना पहला कदम हो सकता है।
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हालांकि ऐसे लोगों के संबंध में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा। कोर्ट भी असम में इस व्यापक अभियान की निगरानी कर रहा है। कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद एनआरसी के संबंध में दावे और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया 25 सितंबर को शुरू हुई थी और यह 15 दिसंबर को खत्म होगी।
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एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जिन लोगों के नाम मसौदे में नहीं थे, उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए। अगर कुछ लोग अपना नाम एनआरसी में शामिल नहीं कराना चाहते तो इसका मतलब है कि उनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं।
सूची से बाहर के दस्तावेज पेश नहीं कर सकते
असम में एनआरसी में नाम शामिल करने का दावा पेश करने के लिए लोग दो सूचियों से बाहर किए गए दस्तावेज दोबारा पेश नहीं कर सकते। एनआरसी के प्रदेश संयोजक दफ्तर की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पहले दिए गए दस्तावेजों को फिर से सौंपने की जरूरत नहीं है। कोई भी व्यक्ति या तो पहले जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार के लिए दावा पेश कर सकता है या फिर वह ए और बी सूची में शामिल दस्तावेजों के सहारे ऐसा कर सकता है।
एनआरसी सूची से बाहर के दस्तावेज जमा नहीं कर सकते लोग
असम में नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस (एनआरसी) में नाम शामिल करने का दावा पेश करने के लिए लोग एनआरसी की दो सूचियों से बाहर के दस्तावेज नहीं पेश कर सकते हैं। एक आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी गई है।
एनआरसी के प्रदेश संयोजक दफ्तर की ओर से जारी उक्त बयान में कहा गया है कि पहले जमा किए गए दस्तावेजों को दोबारा जमा करने की जरूरत नहीं है। कोई भी व्यक्ति या तो पहले जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार के लिए दावा पेश कर सकता है या फिर वह ‘ए’ और ‘बी’ सूची में शामिल दस्तावेजों के सहारे ऐसा कर सकता है।
बता दें कि पिछली 30 जुलाई को एनआरसी के अंतिम मसौदे के प्रकाशन के बाद लगभग 40 लाख नाम इससे बाहर हो गए थे। इसके लिए दावा पेश करने की आखिरी तारीख 15 दिसंबर है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि अब तक लगभग 10 लाख लोगों ने अपने दावे पेश किए हैं।
एनआरसी के प्रदेश संयोजक दफ्तर की ओर से जारी उक्त बयान में कहा गया है कि पहले जमा किए गए दस्तावेजों को दोबारा जमा करने की जरूरत नहीं है। कोई भी व्यक्ति या तो पहले जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार के लिए दावा पेश कर सकता है या फिर वह ‘ए’ और ‘बी’ सूची में शामिल दस्तावेजों के सहारे ऐसा कर सकता है।
बता दें कि पिछली 30 जुलाई को एनआरसी के अंतिम मसौदे के प्रकाशन के बाद लगभग 40 लाख नाम इससे बाहर हो गए थे। इसके लिए दावा पेश करने की आखिरी तारीख 15 दिसंबर है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि अब तक लगभग 10 लाख लोगों ने अपने दावे पेश किए हैं।