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'वोट चोरी के बाद अब पार्टी चोरी': टीएमसी पर चुनाव आयोग के फैसले से भड़के राहुल, ममता के समर्थन में क्या बोले?
Fri, 18 Sep 2026 11:42 AM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 18 Sep 2026 11:42 AM IST
सार
निर्वाचन आयोग के टीएमसी का नाम और 'फूल-घास' चुनाव चिह्न इस्तेमाल न करने के आदेश पर राहुल गांधी ने तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे 'पार्टी चोरी' करार दिया। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए राहुल गांधी ने क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
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राहुल गांधी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
विस्तार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को लेकर निर्वाचन आयोग के फैसले पर हमला बोला। निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के उपचुनावों के दौरान तृणमूल कांग्रेस के दोनों विरोधी गुटों को पार्टी का नाम और 'फूल और घास' चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने कहा कि निर्वाचन आयोग की सांविधानिक जिम्मेदारी लोगों के जनादेश की रक्षा करना है। लेकिन इसके बजाय आयोग उन्हीं ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को पलटती हैं।
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही तरीका अपनाया जाता है। भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर एक पार्टी को बांटने के लिए साथ आते हैं। फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है।
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राहुल गांधी ने कहा, जब एक पूरी पार्टी ही चुराई जा सकती है, तो यह हैरानी की बात नहीं है कि करोड़ों भारतीयों के वोट भी चुराए जा सकते हैं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी। ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं। उन्होंने कहा, निर्वाचन आयोग की सांविधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है। लेकिन इसके बजाय, वह उन्हीं ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को पलटती हैं।
राहुल गांधी ने कहा, यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक पार्टी की लड़ाई है। यह हर उस मतदाता की लड़ाई है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।
निर्वाचन आयोग के फैसले पर कांग्रेस ने क्या कहा?
इससे पहले कांग्रेस ने भी गुरुवार को निर्वाचन आयोग के फैसले की आलोचना की थी। आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के गुटों को पश्चिम बंगाल के उपचुनावों में पार्टी का नाम और 'फूल और घास' चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया था।
कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि निर्वाचन आयोग ने अपनी सांविधानिक जिम्मेदारी से पीछे हटने का काम किया है। कांग्रेस ने यह भी कहा था कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिह्न जब्त करना मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'देर रात जन्मदिन का तोहफा' है।
ये भी पढ़ें: ममता की टीएमसी ने चुनाव आयोग को भेजे नए नाम-चिह्न: फैसले पर जताया विरोध; 28 साल बाद बदलेगा पार्टी का निशान?
निर्वाचन आयोग ने एआईटीसी के दोनों विरोधी गुटों को उपचुनावों के दौरान पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं करने को कहा है। आयोग ने दोनों से शुक्रवार सुबह तक अपनी पसंद के नाम और चुनाव चिह्न देने को कहा है।
आयोग ने अंतरिम आदेश में क्या कहा?
निर्वाचन आयोग ने गुरुवार रात अपना अंतरिम आदेश जारी किया था। आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के नेताओं को सुनने के बाद कहा कि इस मामले पर चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के प्रावधानों के तहत आयोग को विस्तार से फैसला करना होगा।
अपने अंतरिम आदेश में आयोग ने कहा, दस्तावेजों में उपलब्ध पूरी जानकारी पर उचित विचार करने के बाद आयोग की राय है कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस में दो विरोधी समूह हैं। एक का नेतृत्व सुश्री ममता बनर्जी कर रही हैं और दूसरे का नेतृत्व श्री अरूप रॉय कर रहे हैं।
आयोग ने कहा, दोनों समूह अब खुद को पार्टी बता रहे हैं। इसलिए इस मामले पर 1968 के चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश के पैराग्राफ 15 के तहत आयोग को विस्तार से फैसला करना होगा।
आयोग ने कहा कि दोनों विरोधी गुटों को समान स्थिति में रखने के लिए और उनके अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए अंतरिम आदेश दिया गया है। आयोग ने कहा कि यह आदेश मौजूदा उपचुनावों के लिए लागू रहेगा। यह विवाद पर अंतिम फैसला होने तक जारी रहेगा।
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राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने कहा कि निर्वाचन आयोग की सांविधानिक जिम्मेदारी लोगों के जनादेश की रक्षा करना है। लेकिन इसके बजाय आयोग उन्हीं ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को पलटती हैं।
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उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही तरीका अपनाया जाता है। भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर एक पार्टी को बांटने के लिए साथ आते हैं। फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है।
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राहुल गांधी ने कहा, जब एक पूरी पार्टी ही चुराई जा सकती है, तो यह हैरानी की बात नहीं है कि करोड़ों भारतीयों के वोट भी चुराए जा सकते हैं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी। ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं। उन्होंने कहा, निर्वाचन आयोग की सांविधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है। लेकिन इसके बजाय, वह उन्हीं ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को पलटती हैं।
राहुल गांधी ने कहा, यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक पार्टी की लड़ाई है। यह हर उस मतदाता की लड़ाई है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।
निर्वाचन आयोग के फैसले पर कांग्रेस ने क्या कहा?
इससे पहले कांग्रेस ने भी गुरुवार को निर्वाचन आयोग के फैसले की आलोचना की थी। आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के गुटों को पश्चिम बंगाल के उपचुनावों में पार्टी का नाम और 'फूल और घास' चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया था।
कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि निर्वाचन आयोग ने अपनी सांविधानिक जिम्मेदारी से पीछे हटने का काम किया है। कांग्रेस ने यह भी कहा था कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिह्न जब्त करना मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'देर रात जन्मदिन का तोहफा' है।
ये भी पढ़ें: ममता की टीएमसी ने चुनाव आयोग को भेजे नए नाम-चिह्न: फैसले पर जताया विरोध; 28 साल बाद बदलेगा पार्टी का निशान?
निर्वाचन आयोग ने एआईटीसी के दोनों विरोधी गुटों को उपचुनावों के दौरान पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं करने को कहा है। आयोग ने दोनों से शुक्रवार सुबह तक अपनी पसंद के नाम और चुनाव चिह्न देने को कहा है।
आयोग ने अंतरिम आदेश में क्या कहा?
निर्वाचन आयोग ने गुरुवार रात अपना अंतरिम आदेश जारी किया था। आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के नेताओं को सुनने के बाद कहा कि इस मामले पर चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के प्रावधानों के तहत आयोग को विस्तार से फैसला करना होगा।
अपने अंतरिम आदेश में आयोग ने कहा, दस्तावेजों में उपलब्ध पूरी जानकारी पर उचित विचार करने के बाद आयोग की राय है कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस में दो विरोधी समूह हैं। एक का नेतृत्व सुश्री ममता बनर्जी कर रही हैं और दूसरे का नेतृत्व श्री अरूप रॉय कर रहे हैं।
आयोग ने कहा, दोनों समूह अब खुद को पार्टी बता रहे हैं। इसलिए इस मामले पर 1968 के चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश के पैराग्राफ 15 के तहत आयोग को विस्तार से फैसला करना होगा।
आयोग ने कहा कि दोनों विरोधी गुटों को समान स्थिति में रखने के लिए और उनके अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए अंतरिम आदेश दिया गया है। आयोग ने कहा कि यह आदेश मौजूदा उपचुनावों के लिए लागू रहेगा। यह विवाद पर अंतिम फैसला होने तक जारी रहेगा।