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Himachal pradesh: रोजगार यात्रा के रास्ते सत्ता वापसी की कोशिश में कांग्रेस, क्या कायम रहेगा पहाड़ का ‘रिवाज’?

Thu, 15 Sep 2022 05:38 PM IST
जयदेव सिंह स्पेशल डेस्क, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, नई दिल्ली Published by: जयदेव सिंह Updated Thu, 15 Sep 2022 05:38 PM IST
सार

Himachal pradesh Election: कांग्रेस सत्ता वापसी की कोशिशों में लगी है। पार्टी युवा रोजगार यात्रा निकाल रही है। इस यात्रा का एक चरण गुरुवार को संपन्न हुआ। यात्रा के संयोजक शिमला ग्रामीण से विधायक विक्रमादित्य सिंह हैं। 

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Virbhadra singh’s son begins campaign in Himachal Pradesh Explained
विक्रमादित्य सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में अगले महीने  विधानसभा चुनावों का एलान हो सकता है। इससे पहले सियासी दलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। सत्ताधारी भाजपा दावा कर रही है कि राज्य में इस बार ताज नहीं रिवाज बदलेगा। हर पांच साल पर सरकार बदलने का चलन बदलेगा और वह दोबारा वापसी करेगी। 

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वहीं, कांग्रेस सत्ता वापसी की कोशिशों में लगी है। पार्टी युवा रोजगार यात्रा निकाल रही है। इस यात्रा का एक चरण गुरुवार को संपन्न हुआ। यात्रा के संयोजक शिमला ग्रामीण से विधायक विक्रमादित्य सिंह हैं। विक्रमादित्य राज्य के छह बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के बेटे हैं। इस परिवार को शिमला और मंडी इलाके में प्रभाव माना जाता है। 

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इस यात्रा के सियासी मायने क्या हैं? यात्रा को लेकर कांग्रेस का क्या कहना है? भाजपा इस यात्रा को लेकर क्या कह रही है? यात्रा को लेकर कोई विवाद भी जुड़ा है क्या? आइये जानते हैं…

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Virbhadra singh’s son begins campaign in Himachal Pradesh Explained
Himachal Rozgaar Yatra - फोटो : सोशल मीडिया

इस यात्रा के सियासी मायने क्या हैं?
हिमाचल में नवंबर में चुनाव होने हैं। इस यात्रा के जरिए कांग्रेस अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। एक तरफ पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा निकाल रहे हैं, तो दूसरी तरफ शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य सिंह युवा रोजगार यात्रा निकाल रहे हैं। 

कांग्रेस का कहना है कि राज्य में होने वाले चुनाव में बेरोजगारी बेहद अहम हैं। इस यात्रा के दौरान विक्रमादित्य कई पिछड़े इलाकों से भी गुजरे। इस दौरान उन्होंने नौकरी से लेकर पर्यटन व्यवसाय और परिवहन ऑपरेटरों तक के मुद्दों पर बात की। हालांकि, यात्रा शुरू होने से पहले ही यह विवादों में भी घिर गई। पार्टी की गुटबाजी भी जगह-जगह खुलकर सामने आई।

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Vikramaditya Singh - फोटो : सोशल मीडिया

 यात्रा को लेकर क्या विवाद हुए हैं?

सोमवार को मंडी के करसोग से इस यात्रा की शुरुआत हुई। इससे पहले ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी की महासचिव आश्रय शर्मा ने रोजगार यात्रा की कैंपेन कमेटी से इस्तीफा दे दिया। आश्रय ने शिमला के नेताओं पर मंडी में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया। 

2019 में लोकसभा चुनाव लड़ चुके आश्रय शर्मा पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम के पोते हैं। आश्रय के पिता अनिल शर्मा इस वक्त भाजपा के विधायक हैं। अनिल शर्मा के भी कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगती रही हैं। लेकिन, आश्रय के इस कदम के बाद एक बार फिर सुखराम और वीरभद्र के परिवार की राजनीतिक अदावत बढ़ने की बातें होने लगी हैं। 

यात्रा के दौरान भी कई जगह कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर सामने आई। मंडी के नाचन विधानसभा क्षेत्र में जब यात्रा पहुंची तो उस दौरान भी गुटबाजी दिखाई दी। टिकट के दावेदारों ने जमकर शक्ति प्रदर्शन किया। यात्रा के दौरान जैसे ही विक्रमादित्य को उनके समर्थकों ने कंधे पर उठाया टिकट के दावेदार नेताओं के समर्थकों ने भी अपने-अपने नेता को कंधे पर उठा लिया। 

हिमाचल कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य उमंग सिंघार के शिमला पहुंचने पर भी टिकट के दावेदारों ने बागी तेवर दिखाए। सिंघार ने बंद कमरे में हर विधानसभा के एक-एक दावेदार का पक्ष सुना था। इस दौरान उन्होंने 100 से भी अधिक दावेदारों से उन्होंने मुलाकात की थी। 

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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर। - फोटो : संवाद

भाजपा की इस यात्रा को लेकर क्या कहना है?

राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी ने विक्रमादित्य की रोजगार संघर्ष यात्रा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि एक दिल्ली तो दूसरा हिमाचल का राजकुमार सत्तासीन होने के मुंगेरी लाल के सपने देख रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस देश ही नहीं हर प्रदेश से गायब हो रही है।  

भाजपा किस रिवाज को बदलने की बात कह रही है?

राज्य में अब तक 13 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। बीते आठ चुनावों से हर बार सत्ताधारी पार्टी सत्ता गंवा देती है। एक बार राज्य में कांग्रेस जीतती है तो दूसरी बार भाजपा। 32 साल से चली आ रही रवायत को भाजपा इस बार बदलने का दावा कर रही है। वहीं, कांग्रेस को इस रिवाज की वजह से सत्ता वापसी की उम्मीद दिखाई दे रही है। नवंबर 2021 में हुए विधानसभा उप-चुनावों ने भी उसके लिए मनोबल बढ़ाने का काम किया है। 

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राजीव कुमार - फोटो : ANI

कब तक हो सकती है चुनावों की घोषणा? 

मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार 22 से 24 सितंबर तक हिमाचल के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर निर्वाचन अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त प्रदेश में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से भी मिलकर विधानसभा चुनाव को लेकर फीडबैक ले सकते हैं। इसके बाद ही चुनावों का एलान हो सकता है। 2017 की बात करें तो उस वक्त चुनाव का एलान 12 अक्टूबर  को हुआ था। 

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