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वाइस एडमिरल हरि कुमार बोले- छोटे हथियार निर्माण में आत्म-निर्भरता भारत की मूलभूत आवश्यकता है
Thu, 20 Feb 2020 03:31 PM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Thu, 20 Feb 2020 03:31 PM IST
सार
चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी अध्यक्ष (सीआईएससी) के एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख वाइस एडमिरल आर हरि कुमार ने गुरुवार को कहा कि भले ही सशस्त्र बलों की तत्काल आवश्यकताएं इस समय आयात से पूरी हो रही हैं, लेकिन भारत को छोटे हथियारों के निर्माण में आत्म-निर्भर होने की आवश्यकता है।
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vice admiral hari kumar
- फोटो : Twitter
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विस्तार
वाइस एडमिरल हरि कुमार ने उम्मीद जताई कि निजी कंपनियों के दौड़ में शामिल होने से रक्षा विनिर्माण अधिक प्रतिस्पर्धी होगा। उन्होंने कहा कि रक्षा खरीदारी प्रक्रिया में जारी सुधारों के तहत ओईएम (मौलिक उपकरण विनिर्माताओं) को इस (छोटे हथियारों के) बाजार में प्रवेश के लिए भारतीय कंपनियों के साथ साझीदारी करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
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कुमार ने यहां छोटे हथियारों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी मौजूदा एवं तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए हम आयात कर रहे हैं, लेकिन इस क्षेत्र में आत्म-निर्भरता दीर्घकाल में देश की मूलभूत आवश्यकता है। यह आवश्यक है कि मूलभूत हथियारों का निर्माण यहां हो।
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उन्होंने कहा कि छोटे हथियारों की सूची के आधुनिकीकरण के लिए डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) एक नई राइफल बना रहा है और एआरडीई (आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान) गोला बारूद बना रहा है। हमें उम्मीद है कि यह जल्द ही परीक्षण के लिए तैयार हो जाएगा।
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उन्होंने कहा कि अग्रिम बलों के लिए राइफल की त्वरित खरीदारी के मामले में प्रगति हो रही है और साथ ही अमेठी में 6.7 लाख एके 203 राइफलों के निर्माण को लेकर रूस के साथ संयुक्त उपक्रम एक बड़ी बात है।
कुमार ने कहा कि हमें मूलभूत सैन्य क्षमता में आत्म निर्भरता हासिल करने की आवश्यकता है ताकि अग्रिम बलों को समकालीन हथियार मिल सकें। हमें हमारे माननीय प्रधानमंत्री की सोच के अनुसार ‘मेक इन इंडिया’ पहल के लिए ऐसा करने की आवश्यकता है।