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जामनगर पहुंचे रूबियो: रिलायंस रिफाइनरी जाने से पहले गौतम अदाणी और एन चंद्रशेखरन से की मुलाकात, क्या हुई बात?

Wed, 21 Oct 2026 03:04 PM IST
देवेश त्रिपाठी एएनआई, मुंबई
एएनआई, मुंबई Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Wed, 21 Oct 2026 03:04 PM IST
सार

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो बुधवार को गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनरी का दौरा करने पहुंचे। उन्होंने संकेत दिया कि कंपनी की वेनेजुएला से आने वाले भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता पर चर्चा होगी।

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बुधवार सुबह मुंबई में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन से मुलाकात की। इसके बाद वह गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की तेल रिफाइनरी का दौरा करने रवाना हो गए। वह समूह के वनतारा और निर्माणाधीन गीगा फैक्टरियों का भी दौरा करेंगे।
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सूत्रों के अनुसार, मंगलवार दोपहर मुंबई पहुंचे रूबियो ने सबसे पहले गौतम अदाणी से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने एन चंद्रशेखरन के साथ बैठक की। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से इन बैठकों के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की गई।
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कौन हैं गौतम अदाणी?
गौतम अदाणी देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक का नेतृत्व करते हैं। अदाणी समूह का कारोबार बंदरगाहों, हवाई अड्डों, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में फैला है। समूह नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्र में भी अपने कारोबार का विस्तार कर रहा है। ये क्षेत्र घरेलू आपूर्ति शृंखला मजबूत करने और वैश्विक निवेश आकर्षित करने की भारत की महत्वाकांक्षाओं के लिहाज से अहम हैं।
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कौन हैं एन चंद्रशेखरन?
वहीं, एन चंद्रशेखरन टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन हैं। उनके नेतृत्व में समूह ऑटोमोबाइल, इस्पात, सूचना प्रौद्योगिकी, विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में कारोबार करता है। भारत की वैश्विक प्रौद्योगिकी और विनिर्माण आपूर्ति शृंखला में बड़ी भूमिका हासिल करने की कोशिशों के बीच टाटा समूह सेमीकंडक्टर और बैटरी तकनीक में निवेश कर रहा है।

जामनगर में किन परियोजनाओं का दौरा करेंगे रूबियो?
रूबियो के जामनगर दौरे के दौरान रिलायंस के औद्योगिक परिसर पर विशेष ध्यान रहेगा। यहां दुनिया की सबसे बड़ी एकल-स्थल तेल रिफाइनरी स्थित है, जिसकी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की संयुक्त क्षमता प्रतिदिन करीब 14 लाख बैरल है। इस परिसर में वनतारा भी है। यह वन्यजीवों के बचाव, उपचार और पुनर्वास से जुड़ी पहल है, जिसे अनंत अंबानी के नेतृत्व में रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस फाउंडेशन ने शुरू किया है। 3,500 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला यह केंद्र घायल, संकटग्रस्त और बचाए गए जानवरों की देखभाल तथा उनके पुनर्वास पर ध्यान देता है। यहां वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रयास भी किए जाते हैं।

जामनगर परिसर का एक अन्य प्रमुख हिस्सा रिलायंस का प्रस्तावित नई ऊर्जा विनिर्माण केंद्र है। इसे धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स नाम दिया गया है। 5,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली इस परियोजना में सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर, फ्यूल सेल और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली फैक्टरियां स्थापित करने की योजना है।

रिलायंस की रिफाइनरी क्यों खास?
ये निवेश रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत समूह अपने स्थापित तेल रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कारोबार के साथ बड़े एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा कारोबार का निर्माण करना चाहता है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भारत के ऊर्जा बदलाव को समर्थन देना और स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करना है। सूत्रों ने बताया कि रुबियो अमेरिका लौटने से पहले इन तीनों स्थानों का दौरा करेंगे।

गुजरात रवाना होने से पहले मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए रूबियो ने कहा कि रिलायंस के साथ बैठक में कंपनी की व्यापक रिफाइनिंग क्षमता पर चर्चा होगी। इसमें वेनेजुएला से आने वाले भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की उसकी क्षमता भी शामिल है। गौरतलब है कि इस रिफाइनरी में भारी और अधिक सल्फर वाले कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता है। यही वजह है कि वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति को लेकर होने वाली चर्चाओं में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ऊर्जा और निवेश के मुद्दे पर होगी चर्चा
रूबियो का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब वॉशिंगटन भारत के साथ ऊर्जा सहयोग मजबूत करने और रिलायंस को वेनेजुएला से अधिक मात्रा में कच्चा तेल प्रोसेस करने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रहा है। यह बातचीत भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा तथा निवेश के मुद्दों पर व्यापक चर्चा के बीच हो रही है।

रूबियो ने वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात की कोई निश्चित मात्रा या रिलायंस की ओर से किसी विशेष निवेश प्रतिबद्धता का जिक्र नहीं किया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा से जुड़े किसी विशिष्ट अनुरोध के बारे में विस्तृत जानकारी अमेरिकी ऊर्जा विभाग के स्तर पर दी जाएगी।

व्यापार, रक्षा और तकनीक पर भी चर्चा
रूबियो ने मंगलवार को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक बातचीत की थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सुरक्षा जैसे प्रमुख रणनीतिक क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार समझौते की बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और इसे जल्द अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। मंत्रालय ने कहा कि रूबियो का दौरा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्कों में लगातार बनी गति को दर्शाता है। साथ ही, यह 21वीं सदी के लिए भारत-अमेरिका कॉम्पैक्ट को आगे बढ़ाने के महत्व को भी रेखांकित करता है।

ट्रेड डील पर बोले रूबियो- बेहद करीब पहुंचे दोनों देश
रूबियो ने मंगलवार रात एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अंतिम चरण के करीब है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसे महीनों के बजाय कुछ ही हफ्तों में अंतिम रूप दिया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापार प्रतिनिधि समझौते की बातचीत संभाल रहे हैं और वह सीधे तौर पर इसमें शामिल नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह बातचीत की प्रगति पर करीबी नजर रख रहे हैं।

रूबियो ने कहा, "मैंने पहले भी ऐसा महसूस किया था। ऐसे समझौतों में यह जरूरी है कि सार्वजनिक घोषणा से पहले हर बिंदु पर पूरी सहमति हो। इतने महत्वपूर्ण संबंध को इस वजह से जोखिम में नहीं डाला जा सकता कि समझौते की घोषणा कर दी जाए और बाद में पता चले कि उसे अंतिम रूप नहीं दिया गया था।"


उन्होंने आगे कहा, "समझौता बेहद करीब है। मुझे लगता है कि अब कुछ तकनीकी मुद्दों पर काम होना बाकी है। ये तकनीकी बिंदु भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि दोनों पक्षों को इस बात पर सहमत होना होगा कि समझौते की भाषा का अर्थ एक जैसा है। बातचीत अब इसी स्तर पर पहुंच गई है।"
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